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राम और भरत का प्रेम देख देवताओं ने की जय-जयकार

Tue, 24 Sep 2019 01:48 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 24 Sep 2019 01:48 AM IST
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ramnagar ki ramleela
रामनगर। भगवान श्रीराम को देखकर भाव विह्वल हुए भरत साष्टांग दंडवत प्रणाम करते हैं। भगवान श्रीराम उन्हें उठाकर हृदय से लगाते हैं, दोनों भाइयों की आंखों में आंसुओं की धार बहने लगती है। यह देख लक्ष्मण भी अपने आंसू नहीं रोक पाते हैं। भगवान श्रीराम और भरत का अगाध स्नेह देखकर देवता भी जय-जयकार करने लगते हैं। रामनगर की रामलीला के 12वें दिन सोमवार को भरत यमुनावतरण, ग्रामवासी मिलन, श्रीरामचंद्र दर्शन की लीला का मंचन हुआ।
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लीला के प्रथम चरण में यमुना में स्नान कर भरत तीर्थराज को प्रणाम करते हैं और मुनिराज से श्रीराम के दर्शन का आशीर्वाद प्राप्त कर चित्रकूट प्रयाण करते हैं। इन्द्रदेव बृहस्पति से कहते हैं कि श्रीराम संकोची व प्रेमवशी हैं इसलिये कोई ऐसा उपाय करें जिससे भरत व श्रीराम न मिल सकें। उन्होंने समझाया कि श्रीराम के साथ छल करने का परिणाम ठीक नहीं है। भरत की मनोदशा देखकर जहां मुनिगण चिन्तित हैं, वही ग्राम वासी भरत के साथ आई चतुरंगिणी सेना को देखकर सशंकित हैं। परन्तु भरत जी प्रभु श्रीराम का गुणगान करते रहते हैं। वे राम, लक्ष्मण व सीता का पता ग्राम वासियों से लेते हैं। ग्रामवासी भरत का श्रीराम प्रेम देख उनसे श्रीराम चरणों मे प्रीति का वरदान मांगते हैं। निषाद राज उन्हें श्रीराम के निवास स्थान की जानकारी देते हैं दूसरी ओर सीता श्रीराम को रात्रि मे देखे सपने का वर्णन करती हैं। तत्पश्चात राम भगवान शिव का पूजन करते हैं। निषाद राज गुह समेत सभी को वही रुकने के कह कर भरत व शत्रुघ्न को लेकर श्रीराम के पास जाते हैं। आश्रम के समीप पहुंच कर भरत व शत्रुघ्न साष्टांग दंडवत कर पृथ्वी पर लोट जाते हैं। भरत के आगमन की सूचना मिलते ही श्रीराम दौड़कर भरत व शत्रुघ्न को गले लगा लेते हैं।
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श्रीराम गुरू वशिष्ठ को दंडवत कर प्रणाम करते हैं। श्रीराम अपनी तीन माताओं को प्रणाम कर उनसे वार्तालाप करते हैं। सभी श्रीराम के आश्रम में आते हैं तो सीता के चरण स्पर्श करने पर माताएं सुहाग अचल रहने का आशीर्वाद देती हैं। श्रीदशरथ के निधन का समाचार सुन श्रीराम बहुत दुखी होते हैं तो गुरू वशिष्ठ उन्हें समझाते हैं। पुरंजन सभी भाईयों के प्रेम अनुराग का गुणगान करते हैं। सीता जी अपनी सभी सास की सेवा करती हैं। भरत जी रात भर जागते हुए सोचते हैं कि श्रीराम वशिष्ठ व माता कौशल्या के कहने पर अयोध्या लौट कर राज्याभिषेक कराएंगे अथवा नहीं। यदि मैं हठ करता हूं तो अधर्म होगा। यही पर आरती के साथ लीला को अगले दिन के लिए विश्राम दिया जाता है।
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पीएसी के जवानों ने दी सलामी
रामनगर। भारद्वाज आश्रम से भरत जब अपनी चतुरंगिणी सेना के साथ राम से मिलने के लिए चित्रकूट जाने के लिए चलते हैं तो लीला से पूर्व 36 वीं वाहिनी पीएसी के एक टुकड़ी के जवानों ने हाथी पर सवार काशी राज परिवार के अनंत नारायण सिंह को परंपरानुसार सलामी दी। सलामी लेने के बाद लीला शुरू होती है।
पांच सौ साल पुरानी रामलीला हुई शुरू
वाराणसी। पांच सौ वर्ष पुरानी काशी की श्रीचित्रकूट रामलीला बड़ागणेश स्थित अयोध्या भवन में मुकुट पूजन के साथ शुरू हुई। गणेश पूजन, वरुण पूजन, मुकुट पूजन, किरीट पूजन एवं रामायण पूजन के साथ वेद मंत्र गूंज उठे। इसके उपरांत राज्याभिषेक की लीला संपन्न हुई। भगवान के स्वरूपों ने मानव जाति के कल्याणार्थ लीला संपादन का संकल्प लिया। इसके उपरांत मुकुट धारण कर सिंहासन पर विराजमान हुए। व्यवस्थापक पं. मुकुंद उपाध्याय ने आरती उतारी। इस दौरान सुबोध अग्रवाल, मोहन कृष्ण अग्रवाल, मुकुंद उपाध्याय, सत्येंद्र कुमार राय, अशोक सिंह, अभिनव उपाध्याय, रघुनाथ दास, विवेकानंद उपाध्याय, मुकेश सिंह, अजय सिंह, राहुल सेठ आदि मौजूद रहे।
आदि लाटभैरव रामलीला में गूंजे मानस के प्रसंग
वाराणसी। अतिप्राचीन आदि लाटभैरव रामलीला में मानस के प्रसंग गूंज उठे। सोमवार को गणपति पूजन, पंचस्वरूपों के पूजन व मुकुट पूजन के साथ लीला का शुभारंभ हुआ। विशेश्वरगंज स्थित रामलीला स्थल अयोध्या पर रामायणी दल ने गाइये गणपति जग वंदन के साथ मानस के प्रसंगों में पगे दोहों का गायन शुरू किया। नवग्रह, हनुमान जी के मुखौटे, मानस संवाद पोथी व रामलीला के दौरान उपयोग में आने वाले साजो सामान और रामायणी दल के मृदंग का भी पूजन किया गया। रामलीला के प्रधानमंत्री व वरिष्ठ अधिवक्ता कन्हैया लाल यादव यजमान थे। पुरोहित के रूप में डॉ. राम अवतार पांडेय के आचार्यत्व में ब्राम्हणों के समूह ने सस्वर मंत्रों के बीच पूजन अनुष्ठान कराए। इस दौरान केवल कुशवाहा, निखिल त्रिपाठी और जितेंद्र कुशवाहा आदि मौजूद रहे।
श्री मौनी बाबा की रामलीला शुरू
वाराणसी। श्री 108 श्री मौनी बाबा रामलीला कमेटी की 21 दिवसीय रामलीला जतनबर स्थित अयोध्या भवन में शुरू हुई। मुकुट पूजन के साथ लीला आरंभ हुई। महंत पं. श्रीराम शर्मा ने बताया कि लीला में काशी के कई कलाकार हिस्सा ले रहे हैं। आठ अक्तूबर को लक्ष्मण शक्ति की ऐतिहासिक लीला का मंचन किया जाएगा।
धनुषयज्ञ की लीला का हुआ मंचन
वाराणसी। प्राचीन श्रीराम लीला कमेटी शिवानगर के तत्वावधान में धनुष यज्ञ की लीला का मंचन किया गया। देर रात हुई लीला को देखने के लिए भारी संख्या में दर्शकाें की भीड़ लगी रही। दानगंज संवाददाता के अनुसार नियार डीह की रामलीला मुकुट पूजन के साथ शुरू हुई।

राम को मनाने चित्रकूट पहुंचे भरत
चिरईगांव। टूड़ीनगर जाल्हूपुर की रामलीलामें भारद्वाज आश्रम से भरत भगवान राम को मनाने चित्रकूट पहुंचते हैं। गुरु और माताआें से आशीर्वाद लेकर श्रीराम ने भरत को गले लगाया। उसके बाद चारों भाई गले मिलते हैं। इसके साथ ही भगवान की आरती के बाद रामलीला को विश्राम दिया जाता है।
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