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रामनगर की रामलीला: श्रीराम के धनुष तोड़ते ही लगे जयकारे, मिस फायर हो गई तोप, छाता लेकर डटे रहे लीला प्रेमी

Tue, 03 Oct 2023 09:54 AM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Tue, 03 Oct 2023 09:54 AM IST
सार

रामनगर की रामलीला के पांचवें दिन राजा जनक के आमंत्रण पर सीता के स्वयंवर में पहुंचे भगवान राम ने जैसे ही शिव धनुष को तोड़ा तीनों लोक भयंकर ध्वनि से गूंज उठे। तोपों की गर्जना से पूरा रामनगर गूंज उठता था। लेकिन इस बार तोप मिस फायर हो गया। 

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Ramnagar ki Ramleela people started cheers after Shri Ram broke bow Leela lovers stood firm with umbrellas
रामनगर की रामलीला के पांचवे दिन छाता लेकर खड़े लोग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लेत चढ़ावत खैंचत गाढ़ें, काहुं न लखा देख सबु ठाढ़ें। तेहि छन राम मध्य धनु तोरा, भरे भुवन धुनि घोर कठोरा...अर्थात लेते, चढ़ाते और जोर से खींचते हुए किसी ने नहीं लखा (अर्थात ये तीनों काम इतनी फुर्ती से हुए कि धनुष को कब उठाया, कब चढ़ाया और कब खींचा, इसका किसी को पता नहीं लगा), सबने श्री रामजी को (धनुष खींचे) खड़े देखा। उसी क्षण श्री रामजी ने धनुष को बीच से तोड़ डाला। भयंकर कठोर ध्वनि से लोक भर गए।

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सोमवार को विश्वप्रसिद्ध रामनगर की रामलीला के पांचवें दिन राजा जनक के आमंत्रण पर सीता के स्वयंवर में पहुंचे भगवान राम ने जैसे ही शिव धनुष को तोड़ा तीनों लोक भयंकर ध्वनि से गूंज उठे। तोपों की गर्जना से पूरा रामनगर गूंज उठता था लेकिन इस बार तोप मिस फायर होने से आवाज नहीं हो सकी। धनुष टूटते ही लीलाप्रेमियों ने सजल नेत्रों से इस दृश्य को देख राजा रामचंद्र की जय का उदघोष किया। इस दौरान धनुष यज्ञ व परशुराम- लक्ष्मण संवाद लीला का मंचन किया गया। बरसात के बावजूद लीलाप्रेमी छाता लगाकर लीला स्थल पर डटे रहे।
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प्रसंगानुसार सीता स्वयंवर में गुरु विश्वामित्र की आज्ञा मांग श्रीराम व लक्ष्मण रंगभूमि में रखे शिव के धनुष के पास पहुंचे। हर लीलाप्रेमी की सांसे थमी थीं। ऐसा लगा मानों वक्त ठहर गया हो। लीलाप्रेमियों की आंखें एकटक रंगभूमि में रखे शिवधनुष पर टिकी थी। शिवधनुष को तोड़ने के लिए अनेक राजा यहां तक की लंकाधिपति रावण भी जनकपुर पहुंचा। सभी असफल हो वापस लौट गए। लोगों ने इन राजाओं की खिल्लियां भी उड़ाई। गुरु की आज्ञा के बाद श्रीराम ने धनुष को प्रणाम किया और उसे अपने हाथों में उठा लिया।

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36वीं वाहिनी पीएसी परिसर में तोप

जनकपुर का लीला प्रांगण भगवान राम के जय के उदघोष से गूंज उठा। जैसे ही प्रभु श्रीराम ने धनुष की प्रत्यंचा खींची प्रवेश द्वार की बुर्जी पर खड़े मशालची ने 36वीं वाहिनी पीएसी परिसर में तोप पर लगे तोपची को मशाल का इशारा किया। शिव धनुष टूटने के साथ ही तोप को दागा गया लेकिन मिस फायर हो गया। बैकअप के रुप में रखे गए दूसरे तोप को भी दागा गया लेकिन इस बार भी तेज आवाज नहीं हो सकी। दूसरी ओर शिवधनुष तीन खंडों में विभक्त हो गया।

श्वेत लाल महताबी की रोशनी में धनुष का एक टूटा भाग अपने हाथों में लिए श्रीराम की झांकी का दर्शन कर रामलीला का एक-एक श्रद्धालु भावविभोर हो गया। शिव के धनुष टूटने की गर्जना सुनकर रंगभूमि में पधारे परशुराम व लक्ष्मण के मध्य हुए संवादों का भी लीलाप्रेमियों ने आनंद उठाया। लक्ष्मण की बातों ने परशुराम का दंभ तोड़ दिया। अंततः परशुराम भी श्रीराम की विनम्रता से प्रभावित हो आशीर्वाद देकर चले गए। इधर भगवान सूर्य के रथ के घोड़ों ने धनुष टूटने की गर्जना सुन दक्षिणायन की ओर जा रही अपनी दिशा बदलकर उत्तरायण की और मुंह कर लिया।

सूर्य के उत्तरायण जाते ही राम-सीता विवाह के मंगल कार्य शुरू हुए। सीता ने श्रीराम के गले में वरमाला डाल दी। आकाश में देवगणों ने पुष्प वर्षा कर अलौकिक क्षण का आनंद उठाया। विश्वामित्र की सलाह पर राजा जनक ने महाराज दशरथ को सूचना देने के लिए अपने दूतों को भेजा। जनकपुर में चारों ओर खुशियां छा जाती हैं। राजा जनक पूरे राज्य को सजाने का निर्देश दे मंडप सजाने को कहते हैं। यहीं लीला को विश्राम दिया गया।

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