{"_id":"6526f37907f809442c0a6444","slug":"ram-set-out-to-establish-the-ideal-of-dignity-varanasi-news-c-20-vns1013-388497-2023-10-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Varanasi News: मर्यादाओं का आदर्श स्थापित करने निकले राम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Varanasi News: मर्यादाओं का आदर्श स्थापित करने निकले राम
विज्ञापन
मर्यादाओं का आदर्श स्थापित करने राम 14 वर्ष के वनवास के लिए निकल पड़े। भातृत्व प्रेम में पगे लक्ष्मण और पति के चरणों में अपना सर्वस्व अर्पण करने वाली जानकी भी उनके सहगामी बनकर साथ निकले।
लाटभैरव की रामलीला के चौथे दिन वनगमन की लीला हुई। राम जानकी सहित भाई लक्ष्मण के वनवास पर निकलते हैं। बहुमूल्य आभूषणों व रेशमी वस्त्र को त्याग वल्कल धारण करने का दृश्य देख हर आंख नम हो गई। वनगमन की लीला से राम का वनवास काल प्रारंभ हो गया। निषादराज के घर रात्रि विश्राम के साथ ही लीला को विराम दिया गया। इस अवसर पर समिति के व्यास दयाशंकर त्रिपाठी, प्रधानमंत्री कन्हैयालाल यादव, केवल कुशवाहा आदि रहे।
--
भरत के प्रति श्रीराम का स्नेह देख देवगण बेचैन
रामनगर। रामनगर की विश्व प्रसिद्ध रामलीला के 14वें दिन रामलीला में बुधवार को चित्रकूट में मुनि वशिष्ठ व जनक सभा की लीला संपन्न हुई। मंचन के दौरान भगवान श्रीराम के श्रीमुख से प्रेम वाणी सुन लीलाप्रेमी भाव विभोर हो गए। उनकी आंखें भी नम दिखाई दीं। लीला प्रसंगानुसार भरत प्रभु श्रीराम के समीप आते हैं और प्रणाम कर उनके समीप बैठ जाते हैं। गुरु वशिष्ठ भरत से कहते हैं कि राम का जन्म देवताओं के हित के लिए हुआ है। वे सभी को सुख देने वाले हैं। प्रभु श्रीराम अयोध्या लौटे कुछ ऐसा उपाय करो।
विज्ञापन
भरत कहते हैं कि यह हमारा दुर्भाग्य है कि आप हमसे ही उपाय पूछते हैं। वशिष्ठ जी श्रीराम को भरत का वचन सुना कर विचार करने को कहते हैं। परंतु श्रीराम कहते हैं कि मैं शपथ खाकर कहता हूं कि भरत के समान तीन लोकों में कोई भाई नहीं है। भरत की विलाप वाणी सुनकर लीलाप्रेमियों की आंखों से अश्रु धारा बहने लगी। इंद्रदेव दूसरे देवताओं से कहते हैं कि सब मिलकर माया रचो नहीं तो काम बिगड़ जाएगा। माता सरस्वती से कहते हैं कि हम सभी देवगण आप की शरण में हैं इसलिए भरत की मति फेर कर देवकुल की रक्षा कीजिए। यहीं पर आरती के साथ लीला को विश्राम दिया गया। संवाद
-- -- --
राम ने किया ताड़का का वध, अहिल्या का उद्धार
दानगंज। नियार की रामलीला में पांचवें दिन भगवान श्रीराम ने ताड़का राक्षसी का वध कर विश्वामित्र के आदेश का पालन किया। विश्वामित्र से अजेय अस्त्र प्राप्त कर मारीच और सुबाहु राक्षस को परास्त किया। उधर सीता स्वयंवर का निमंत्रण पर विश्वामित्र राम और लक्ष्मण के साथ मिथिला जाते हैं। रास्ते में गौतम ऋषि के आश्रम में शिला के संदर्भ में प्रभु राम विश्वामित्र से जानकारी लेते हैं। यहां राम अपने चरण को शिला पर रखकर अहिल्या का उद्धार करते हैं। इसके साथ ही लीला संपन्न होती।
विज्ञापन
लाटभैरव की रामलीला के चौथे दिन वनगमन की लीला हुई। राम जानकी सहित भाई लक्ष्मण के वनवास पर निकलते हैं। बहुमूल्य आभूषणों व रेशमी वस्त्र को त्याग वल्कल धारण करने का दृश्य देख हर आंख नम हो गई। वनगमन की लीला से राम का वनवास काल प्रारंभ हो गया। निषादराज के घर रात्रि विश्राम के साथ ही लीला को विराम दिया गया। इस अवसर पर समिति के व्यास दयाशंकर त्रिपाठी, प्रधानमंत्री कन्हैयालाल यादव, केवल कुशवाहा आदि रहे।
विज्ञापन
भरत के प्रति श्रीराम का स्नेह देख देवगण बेचैन
रामनगर। रामनगर की विश्व प्रसिद्ध रामलीला के 14वें दिन रामलीला में बुधवार को चित्रकूट में मुनि वशिष्ठ व जनक सभा की लीला संपन्न हुई। मंचन के दौरान भगवान श्रीराम के श्रीमुख से प्रेम वाणी सुन लीलाप्रेमी भाव विभोर हो गए। उनकी आंखें भी नम दिखाई दीं। लीला प्रसंगानुसार भरत प्रभु श्रीराम के समीप आते हैं और प्रणाम कर उनके समीप बैठ जाते हैं। गुरु वशिष्ठ भरत से कहते हैं कि राम का जन्म देवताओं के हित के लिए हुआ है। वे सभी को सुख देने वाले हैं। प्रभु श्रीराम अयोध्या लौटे कुछ ऐसा उपाय करो।
विज्ञापन
भरत कहते हैं कि यह हमारा दुर्भाग्य है कि आप हमसे ही उपाय पूछते हैं। वशिष्ठ जी श्रीराम को भरत का वचन सुना कर विचार करने को कहते हैं। परंतु श्रीराम कहते हैं कि मैं शपथ खाकर कहता हूं कि भरत के समान तीन लोकों में कोई भाई नहीं है। भरत की विलाप वाणी सुनकर लीलाप्रेमियों की आंखों से अश्रु धारा बहने लगी। इंद्रदेव दूसरे देवताओं से कहते हैं कि सब मिलकर माया रचो नहीं तो काम बिगड़ जाएगा। माता सरस्वती से कहते हैं कि हम सभी देवगण आप की शरण में हैं इसलिए भरत की मति फेर कर देवकुल की रक्षा कीजिए। यहीं पर आरती के साथ लीला को विश्राम दिया गया। संवाद
राम ने किया ताड़का का वध, अहिल्या का उद्धार
दानगंज। नियार की रामलीला में पांचवें दिन भगवान श्रीराम ने ताड़का राक्षसी का वध कर विश्वामित्र के आदेश का पालन किया। विश्वामित्र से अजेय अस्त्र प्राप्त कर मारीच और सुबाहु राक्षस को परास्त किया। उधर सीता स्वयंवर का निमंत्रण पर विश्वामित्र राम और लक्ष्मण के साथ मिथिला जाते हैं। रास्ते में गौतम ऋषि के आश्रम में शिला के संदर्भ में प्रभु राम विश्वामित्र से जानकारी लेते हैं। यहां राम अपने चरण को शिला पर रखकर अहिल्या का उद्धार करते हैं। इसके साथ ही लीला संपन्न होती।