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राममनोहर लोहिया जयंती: बीएचयू से लोहिया ने फूंका था आंदोलन का बिगुल

Tue, 23 Mar 2021 05:31 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Tue, 23 Mar 2021 05:31 PM IST
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Ram Manohar Lohia Jayanti: Lohia start andolan from BHU 
राममनोहर लोहिया - फोटो : narendramodi.in

डॉ. राममनोहर लोहिया पर राष्ट्रीय आंदोलनों का बहुत असर पड़ा था। बीएचयू परिसर से 1967 में उन्होंने भाषा के खिलाफ आंदोलन का जो बिगुल फूंका, उसका असर केवल बनारस ही नहीं, बल्कि पूरे देश पर पड़ा। बीएचयू, काशी विद्यापीठ के साथ ही देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्र सड़क पर उतर आए। अंबेडकरनगर के अकबरपुर में 23 मार्च 1910 को जन्मे लोहिया का 12 अक्तूबर 1967 को निधन हो गया था। अब जब 23 मार्च को उनकी जयंती है, तो उनके संघर्षों को याद करना जरूरी है।

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बात 1967 की है, जब बीएचयू में समाजवादी युवजन सभा की शाखा खुली थी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ भी उस समय समाजवादियों का केंद्र था। यहां डॉ. लोहिया बहुत आते-जाते थे। अंतिम बार 30 मई 1967 को डॉ. लोहिया काशी विद्यापीठ में आचार्य नरेंद्र देव छात्रावास में समाजवादी युवजन सभा के  शिविर का उदघाटन करने आए थे। इसमें जनेश्वर मिश्र सहित अन्य लोगों ने भी भाग लिया था। बीएचयू से संचालित विद्यालय से 1925 में इंटरमीडिएट की पढ़ाई करने के बाद वह उच्च शिक्षा के लिए जर्मनी भी गए।
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डा. लोहिया को करीब से जानने वाले सपा एमएलसी शतरुद्र प्रकाश का कहना है कि भाषा आंदोलन को भी लोहिया ने नई धार दी थी। शतरुद्र प्रकाश ने कहा कि 1950 में जब संविधान लागू हुआ तो यह हुआ कि अंग्रेजी हट जानी चाहिए, तब डॉक्टर लोहिया ने कहा कि कोई भारतीय भाषा आए लेकिन भारत की भाषा अंग्रेजी नहीं होनी चाहिए। बीएचयू से ही इसका विरोध शुरू हुआ था। तब यही नारा दिया गया था गांधी लोहिया की अभिलाषा चले देश में देशी भाषा। आंदोलन की सफलता यह रही कि बनारस से निकली आवाज बिहार्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा तक गूंजी और विश्वविद्यालयों के युवा सड़क पर आ गए। इसके अलावा बड़ा जुलूस भी बनारस में निकला था।

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लोहिया चेयर में कर सकेंगे शोध, डिप्लोमा कोर्स भी चलेगा 
बीएचयू सामाजिक विज्ञान संकाय के तहत डॉ. राममनोहर लोहिया के नाम पर शोध पीठ (लोहिया चेयर) स्थापित करने की तैयारी अंतिम चरण में है। लोहिया चेयर में विद्यार्थी शोध कर सकेंगे, साथ ही यहां डिप्लोमा कोर्स भी चलेगा। संकाय प्रमुख प्रो. कौशल किशोर मिश्रा ने बताया कि इस शोध पीठ से युवा पीढ़ी को लोहिया के दर्शन, उनके विचारों के बारे में जानने का मौका मिलेेगा। यहां उनके विचारों को आगे बढ़ाने का काम भी किया जाएगा। केंद्र में फील्ड वर्क को भी बढ़ावा दिया जाएगा। चार करोड़ रुपये से चलने वाले शोध पीठ का प्रस्ताव शिक्षा मंत्रालय में चला गया है। साथ ही संकाय स्तर की पॉलिसी प्लानिंग कमेटी में भी इससे जुड़ी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद नियमानुसार आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। 

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