वाराणसी: राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट को सौंपे जाएंगे तराशे गए पत्थर, संघ की बैठक में फैसला
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अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए सरकार की ओर गठित होने वाले ट्रस्ट को तराशे गए लाखों पत्थर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) की ओर से सौंपे जाएंगे। आरएसएस ने उम्मीद जताई है कि रामनवमी से राम मंदिर निर्माण शुरू होगा। इसमें कारसेवकपुरम में रखे गए पत्थरों से ही ट्रस्ट मंदिर का निर्माण शुरू कर सकता है। यह निर्णय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की वाराणसी के कोईराजपुर स्थित अतुलानंद स्कूल में हुई बैठक में लिया गया।
आरएसएस के सरकार्यवाह सुरेश भैयाजी जोशी, सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्णगोपाल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ की मौजूदगी में मंगलवार की रात राम मंदिर निर्माण पर लंबी चर्चा हुई। अयोध्या के कारसेवकपुरम में मंदिर निर्माण के लिए तराशे जा रहे पत्थरों के बारे में बताया गया कि मंदिर बनाने के लिए जो पत्थर तराशे जा रहे हैं, उसे विश्व हिंदू परिषद के लोग मिलकर करा रहे हैं।
ये पत्थर मंदिर निर्माण के लिए ही हैं। मंदिर निर्माण कराने वाले ट्रस्ट को यह पत्थर सौंप दिए जाएंगे। राम मंदिर निर्माण में आरएसएस सहयोगी की भूमिका में रहेगा। संघ की ओर से कहा गया कि राम मंदिर पुराना मुद्दा था, लेकिन वर्ष 1984 के आसपास राम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति की स्थापना के बाद इस मुद्दे पर जनजागरण किया गया। ऐसे में सरकार जल्द ही राम मंदिर निर्माण पर अपने निर्णय लें।
डॉ. फिरोज के जरिए मुस्लिमों में संस्कृत का प्रचार
बीएचयू के धर्म विज्ञान संकाय में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर नियुक्त डॉ. फिरोज खान के समर्थन में संघ अपने बयान पर अडिग रहेगा। बैठक में बताया गया कि विरोध समाप्त करवाने में संघ के निर्णय से समाज में सकारात्मक संदेश गया है।
डॉ. फिरोज के मुद्दे पर संघ मुस्लिमों के बीच संस्कृत का प्रचार प्रसार भी करेगा। 15 दिन से बीएचयू में चले विवाद में देशभर के लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रिया आई और संघ ने फिरोज का समर्थन किया था। इसके बाद विवाद भी पूरी तरह से खत्म हो गया। ऐसे में संघ अब इस मुद्दे पर भी अपनी रणनीति तय करेगा।
विद्वत परिषद के साथ धार्मिक नीति निर्धारण पर होगी चर्चा
कोईराजपुर में सरकार्यवाह सुरेश भैया जी जोशी और सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्णगोपाल की बैठक के बाद आरएसएस काशी में तीन दिनों तक अलग-अलग संगठनों के साथ अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा करेगा। इसमें धार्मिक पक्षों पर नीति निर्धारण, काशी विद्वत परिषद के विस्तार आदि पर बात की जाएगी।