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रोगों से मुक्ति देने वाला राम कटोरा खुद व्याधि ग्रस्त
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Wed, 15 Jun 2016 01:51 AM IST
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व्याधियों से मुक्ति दिलाने वाले राम कटोरा कुंड की दुर्दशा हैरान करने वाली है। इस कुंड में डुबकी लगाने से बच्चों को सूखा रोग और बड़ों को क्षय रोग से मुक्ति मिलती रही है लेकिन अब इसमें सीवर बजबजा रहा है। आक्सीजन की कमी होने से मछलियां और कछुए तड़प रहे हैं। मुहल्ले के लोग फूलमाला के अलावा प्लास्टिक की थैलियों में घरों का कचरा इस कुंड में फेंकते हैं। अब स्नान तो दूर लोग इसके जल को स्पर्श भी नहीं करते।
राम कटोरा कुंड पर मेले लगते हैं। भगवान राम-जानकी का दरबार भी इसी कुंड के तट पर स्थित है। क्वार में नारद मोह की रामलीला भी कुंड पर होती है और उसे देखने के लिए मेला लग जाता है। इसके अलावा हरितालिका तीज, जीवित्पुत्रिका व्रत, डाला षष्ठी के मौके पर भी महिलाओं की भीड़ इस कुंड पर लोकोत्सव का रूप ले लेती है। इस कुंड के जल की औषधीय विशेषता विख्यात रही है। कभी इस कुंड के जल से बच्चों का सूखा रोग दूर होता था। लोग बीमार बच्चों को लेकर दूर-दूर से आते थे। इतना ही नहीं क्षय रोग से भी मुक्ति राम कटोरा कुंड के जल से मिलती रही है। हिंदी खड़ी बोली के प्रवर्तक भारतेंदु हरिश्चंद्र ने कभी इस कुंड का जीर्णोद्धार कराया था। इलाके के लोग बताते हैं कि करीब 50 वर्षों में कुंड की सफाई नहीं कराई गई। बीते वर्ष पंप लगाकर पानी जरूर निकाला गया था लेकिन सिल्ट जस की तस जमा है। अब कुंड में सीवर भर रहा है और एक तरफ की सीढ़ियां भी धंस गई हैं।
राम कटोरा कुंड के अवतरण की कहानी त्रेता युग से जुड़ी है। कहते हैं कि जब राजा दशरथ की आज्ञा पाकर भगवान राम 14 वर्ष के लिए वनवास पर निकले थे, तब वह काशी के आनंद कानन वन से हो कर गुजरे थे। उस दौरान यहां उनके हाथ से कटोरा गिर गया था। इसी वजह से इस कुंड का नाम राम कटोरा पड़ गया।
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राम कटोरा कुंड पर मेले लगते हैं। भगवान राम-जानकी का दरबार भी इसी कुंड के तट पर स्थित है। क्वार में नारद मोह की रामलीला भी कुंड पर होती है और उसे देखने के लिए मेला लग जाता है। इसके अलावा हरितालिका तीज, जीवित्पुत्रिका व्रत, डाला षष्ठी के मौके पर भी महिलाओं की भीड़ इस कुंड पर लोकोत्सव का रूप ले लेती है। इस कुंड के जल की औषधीय विशेषता विख्यात रही है। कभी इस कुंड के जल से बच्चों का सूखा रोग दूर होता था। लोग बीमार बच्चों को लेकर दूर-दूर से आते थे। इतना ही नहीं क्षय रोग से भी मुक्ति राम कटोरा कुंड के जल से मिलती रही है। हिंदी खड़ी बोली के प्रवर्तक भारतेंदु हरिश्चंद्र ने कभी इस कुंड का जीर्णोद्धार कराया था। इलाके के लोग बताते हैं कि करीब 50 वर्षों में कुंड की सफाई नहीं कराई गई। बीते वर्ष पंप लगाकर पानी जरूर निकाला गया था लेकिन सिल्ट जस की तस जमा है। अब कुंड में सीवर भर रहा है और एक तरफ की सीढ़ियां भी धंस गई हैं।
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राम कटोरा कुंड के अवतरण की कहानी त्रेता युग से जुड़ी है। कहते हैं कि जब राजा दशरथ की आज्ञा पाकर भगवान राम 14 वर्ष के लिए वनवास पर निकले थे, तब वह काशी के आनंद कानन वन से हो कर गुजरे थे। उस दौरान यहां उनके हाथ से कटोरा गिर गया था। इसी वजह से इस कुंड का नाम राम कटोरा पड़ गया।
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