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यूपी: राज्यसभा के उपसभापति को मिला 2020 का बीएचयू डिस्टिंग्विश्ड एलुमनी अवार्ड, विवेकानंद की प्रतिमा स्थापित

Thu, 10 Sep 2026 06:11 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Thu, 10 Sep 2026 06:11 AM IST
सार

राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश को 2020 का बीएचयू डिस्टिंग्विश्ड एलुमनी अवार्ड प्रदान किया गया। छह साल पहले इसकी घोषणा हुई थी। कार्यक्रम में शिकागो धर्म सम्मेलन में स्वामी विवेकानंद के संबोधन की स्मृति में बीएचयू में पहली बार स्थापित विवेकानंद की प्रतिमा का भी उल्लेख हुआ। समारोह में कजरी की प्रस्तुतियों ने माहौल को सांस्कृतिक रंग दिया।

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Rajya Sabha Deputy Chairman receives BHU Distinguished Alumnus Award Vivekananda statue installed
उपसभापति हरिवंश नारायण को बीएचयू डिस्टिंग्विश्ड एलुमनी अवार्ड। - फोटो : संवाद

विस्तार

बीएचयू में बुधवार को कुलसचिव राजन श्रीवास्तव ने राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण को वर्ष 2020 का बीएचयू डिस्टिंग्विश्ड एलुमनी अवार्ड 2020 दिया। छह साल पहले इसकी घोषणा हुई थी लेकिन वह जापान दौरे पर थे। बीएचयू दौरे में हरिवंश नारायण ने सरदार वल्लभभाई पटेल छात्रावास में विश्वविद्यालय परिसर के पहले स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का अनावरण किया। वहीं, नवनिर्मित साइबर लाइब्रेरी का उद्घाटन किया। 

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यह बीएचयू के 72 हॉस्टलों के लिए पहली साइबर लाइब्रेरी है। इस कार्यक्रम के बाद हरिवंश नारायण स्वामी विवेकानंद के ऐतिहासिक शिकागो संबोधन की स्मृति में राष्ट्रीय जागरण और स्वामी विवेकानंद विषयक युवा संवाद और कजरी उत्सव में पं. ओंकारनाथ ठाकुर प्रेक्षागृह पहुंचे। 
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बतौर मुख्य अतिथि उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद की उपलब्धियों को केवल उनके प्रसिद्ध भाषणों और व्यक्तित्व में ही न देखें, बल्कि उनके पीछे तप, साधना, संघर्ष और त्याग को समझना होगा। जिस समय भारत दीनता, पराधीनता और निराशा के कठिन दौर से गुजर रहा था, उस समय स्वामी विवेकानंद ने राष्ट्रीय आत्मविश्वास और नवजागरण की चेतना को स्वर दिया।

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विवेकानंद का चिंतन संकीर्ण धार्मिक आग्रहों से परे
मुख्य वक्ता बीएचयू के वरिष्ठ आचार्य और प्रख्यात आलोचक प्रो. अवधेश प्रधान ने कहा कि विवेकानंद का चिंतन संकीर्ण धार्मिक आग्रहों से परे मानवता और सेवा को केंद्र में रखता है। उन्होंने किसी व्यक्ति की धार्मिक पहचान पूछे बिना निष्काम सेवा को तरजीह दी। स्वामी धर्म और अधर्म के अंतर को गहराई से समझते थे। यही वजह है कि उनका चिंतन अपने समय से आगे का और आज भी उतना ही आधुनिक व प्रासंगिक है।

विवेकानंद का चिंतन अतीत के गौरव का स्मरण
कुलसचिव राजन श्रीवास्तव ने कहा कि विवेकानंद का चिंतन सिर्फ अतीत के गौरव का स्मरण नहीं कराता, बल्कि शक्ति, चरित्र, सेवा और राष्ट्रनिर्माण के लिए वर्तमान को जागृत करता है। छात्र अधिष्ठाता प्रो. रंजन कुमार सिंह ने कहा कि यह कार्यक्रम नई पीढ़ी को उनके विचारों और जीवन-दृष्टि से जोड़ने की सार्थक पहल है।

थाईलैंड और म्यांमार से आए छात्रों ने गाया मंगलाचरण
कजरी उत्सव में पूर्वांचल की माटी की सुगंध, लोकजीवन की सहज अनुभूति और उसकी जीवंत सांस्कृतिक विरासत की महक उठी। मंच कला संकाय की डीन प्रो. संगीता पंडित के निर्देशन में ये प्रस्तुत किया गया। थाईलैंड और म्यांमार से आए छात्रों ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन पत्रकारिता विभाग के प्राध्यापक और मुख्य संयोजक डॉ. धीरेंद्र कुमार राय ने किया। 

उन्होंने बताया कि सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती वर्ष पर भारत वैभव के तहत ये कार्यक्रम किया गया। इसके तहत कला, साहित्य, संगीत, संवाद और विमर्श के विविध माध्यमों से नई पीढ़ी को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जोड़ा जा रहा है। पाली के प्राध्यापक व सरदार वल्लभ भाई पटेल छात्रावास के संरक्षक डॉ. शैलेंद्र सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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