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राजभाषा सम्मेलन: गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा ने कथा सम्राट के गांव पहुंचकर दी श्रद्धांजलि, कहा- मुंशी जी की कृतियां आज भी प्रेरक

Sun, 14 Nov 2021 07:35 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Sun, 14 Nov 2021 07:35 PM IST
सार

गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को वाराणसी के ट्रेड फैसिलिटी सेंटर में अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन का शुभारंभ किया था। रविवार को समारोह को गृह राज्यमंत्री ने संबोधित किया। 

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rajbhasha sammelan in varanasi Minister of State for Home Ajay Mishra teni  paid tribute to katha samrat munshi premchand
गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वाराणसी में आयोजित राजभाषा विभाग गृह मंत्रालय की ओर से दो दिवसीय अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन  के अंतिम दिन गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा समेत अन्य लोगों ने मुंशी प्रेमचंद के गांव लमही पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। अजय मिश्रा ने मुंशी जी के आवास और परिसर का भ्रमण कर जायजा लिया। कहा कि मुंशी जी की कृतियां आज भी प्रेरक और पथ-प्रदर्शक हैं। उनकी रचनाएं आज भी प्रासंगिक हैं। मुंशी प्रेमचंद ने ऐसी कृतियों की रचना की, जिसने हर वर्ग का प्रतिनिधित्व किया।

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इधर, ट्रेड फैसिलिटी सेंटर बड़ालालपुर में आयोजित राजभाषा सम्मेलन में वक्ताओं ने हिंदी के विकास, उसके प्रचार-प्रसार और लोकप्रियता पर विस्तार से चर्चा की। समापन समारोह में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय कुमार मिश्रा ने कहा कि क्षेत्रीय भाषाओं के साथ ही हिंदी का विकास संभव है। ऐसा इसलिए क्योंकि सभी क्षेत्रीय भाषाओं का जुड़ाव हिंदी से ही है। इस दिशा मे एकजुटता के साथ काम करने की जरूरत है। 
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भारतीय संस्कृति में सर्वे भवंतु सुखिन: की बात
गृह राज्यमंत्री ने कहा कि सम्मेलन में राजभाषा विभाग सहित अन्य कार्यालयों से जुड़े लोगों की भारी संख्या में प्रतिभागिता हिंदी के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। भारतीय संस्कृति में लोग दबाव या घृणा की बात नहीं करते, सर्वे भवंतु सुखिन: की बात करते हैं।
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पढ़ेंः अमित शाह बोले- हिंदी को लचीला बनाने की जरूरत, सावरकर नहीं होते तो हम अंग्रेजी ही बोल रहे होते

अजय मिश्रा ने कहा कि भारत से बाहर रह रहे लोगों ने भी हिंदी और अपनी-अपनी भाषाओं के प्रसार में बहुत योगदान दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न केवल भाषा की पुनर्स्थापना की बल्कि उन्होंने देश की संस्कृति, गौरव परंपरा को विश्व को दिखाया है। राजभाषा विभाग एक प्रतिबद्ध विभाग है और हम सभी भाषाओं को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। कार्यक्रम में प्रो. रजनीश शुक्ल, प्रो. राममोहन पाठक, प्रो. श्रद्धांनद, डा. रामसुधार सिंह आदि लोग मौजूद रहे। 

 
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