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बलियाः रेलवे की 72.40 एकड़ भूमि को पट्टा करने में लेखपाल सस्पेंड,150 पर केस

Sun, 22 Apr 2018 11:43 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Updated Sun, 22 Apr 2018 11:43 PM IST
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Railways land illegaly capture complain against 150 persons
रेल ट्रेक - फोटो : demo pic
यूपी के बलिया जिले में रेलवे की भूमि को अवैध रूप से पट्टा करने के मामले में बड़ी कार्रवाई  हुई है। बेल्थरारोड एसडीएम सुशील लाल श्रीवास्तव ने एक लेखपाल को निलंबित करने के साथ ही पट्टा निरस्त कर दिया है।
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तुर्तीपार गांव के पास स्थित रेलवे की भूमि को अवैध तरीके से पट्टा करने के मामले में 150 से अधिक लोगों पर मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई करने का निर्देश भी दिया। इसमें 144 पट्टाधारकों के अलावा भूमि प्रबंधन समिति, राजस्व अधिकारी, कर्मचारी व संबंधित रेल अधिकारी भी शामिल हैं।
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एसडीएम ने यह कार्रवाई जिलाधिकारी न्यायालय द्वारा जारी आदेश के अनुपालन में किया है। इससे पट्टाधारकों और आवंटन प्रक्रिया से जुड़े लोगों में हड़कंप मच गया है।
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एसडीएम सुशील लाल श्रीवास्तव ने बताया कि रेलवे की भूमि को अवैध तरीके से पट्टा करने के मामले में पट्टाधारक समेत 150 से अधिक लोगों पर मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिया गया है।

संबंधित लेखपाल को निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई डीएम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में की गई है।इस कार्रवाई से पट्टा आवंटन से जुड़े लोगों में अफरा-तफरी मची हुई है।

ये है पूरा मामला

Railways land illegaly capture complain against 150 persons
भूमि पर अवैध कब्जा - फोटो : अमर उजाला
बताया जाता है कि तुर्तीपार में सरकारी अभिलेखों में 150.84 एकड़ भूमि रेलवे सरकार की भूमि के रूप में दर्ज है। लेकिन भूमि प्रबंधन समिति ने 11 अगस्त 1986 को 89 व्यक्तियों को 25.14 एकड़, 30 दिसंबर 1986 को चार व्यक्तियों को 1.96 एकड़, पांच जनवरी 1987 को 10 व्यक्तियों को 4.66 एकड़, 30 जुलाई 2003 को 25 व्यक्तियों को 24.94 एकड़ और 15 दिसंबर 2003 को 16 व्यक्तियों को 15.70 एकड़ भूमि पर अवैध रूप से पट्टा कर दिया।

जबकि रेलवे की भूमि होने के चलते भूमि प्रबंधन समिति को पट्टा देने का अधिकार नहीं है। यही नहीं तत्कालीन उप जिलाधिकारी, तहसीलदार, दो नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक, लेखपाल ने भी इस पट्टे के लिए स्वीकृति दे दी।

हैरानी की बात रही कि रेलवे भूमि के आवंटन की जानकारी होने के बाद भी रेल अधिकारी संवेदनहीन बने रहे। इस मामले में ग्राम निवासी ओमप्रकाश सिंह ने चार जुलाई 2017 को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित तहसील दिवस पर शिकायती पत्र प्रस्तुत किया।

इसके साथ ही जिलाधिकारी न्यायालय में वाद दाखिल किया गया। मामले में सुनवाई करते हुए तत्कालीन जिलाधिकारी सुरेंद्र विक्रम ने पट्टा आवंटन को असंवैधानिक करार दिया। अपने निर्णय में डीएम ने स्पष्ट किया कि रेलवे की संपत्ति होने के चलते भूमि चकबंदी प्रक्रिया से बाहर है, जिस पर पट्टा देने का अधिकार किसी का नहीं है।

उन्होंने माना था कि गलत तरीके से पांच बार में 144 व्यक्तियों को रेलवे की 72.40 एकड़ भूमि का अवैध पट्टा कर दिया गया। जिलाधिकारी न्यायालय के आदेश पर एसडीएम ने लेखपाल को निलंबित करते हुए पट्टे निरस्त कर दिया गया और पट्टधारक समेत तत्कालीन उप जिलाधिकारी, तहसीलदार, दो नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक, लेखपाल व रेलवे कर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है। 
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