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रेलवे का तत्काल टिकट सिस्टम ध्वस्त, दलाल कर ले रहे हैं हैक, नहीं थम रही टिकटों की कालाबाजारी

Mon, 31 Aug 2020 01:54 AM IST
swadhin tiwari स्‍वाधीन तिवारी
Updated Mon, 31 Aug 2020 01:54 AM IST
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Railway's instant ticket system destroyed, brokers are hacked
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

मुंबई, सूरत, गुजरात व अहमदाबाद की ट्रेनों की संख्या कम और यात्रियों की बढ़ती संख्या का फायदा टिकट दलाल फिर से उठाने लगे हैं। स्पेशल ट्रेनों में कंफर्म टिकट नहीं मिलने पर यात्री तत्काल कोटा की ओर भाग रहे हैं लेकिन यहां भी उन्हें राहत नहीं मिल रही है। तत्काल टिकट का 90 फीसदी टिकट दलाल लेकर उड़ जा रहे हैं। अवैध सॉफ्टवेयर के जरिए दलाल अधिकतर टिकट बुक कर ले रहे हैं। रात भर स्टेशन पर टिकट के लिए लाइन लगाने के बाद भी यात्रियों को निराशा हाथ लग रही है।

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रेलवे से जुड़े एक अधिकारी के अनुसार टिकट दलालों का नेटवर्क बहुत तगड़ा है। टिकट दलाल इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (आईआरसीटीसी) के समानांतर सिस्टम चला रहे हैं। यह सिस्टम तत्काल टिकटों की बुकिंग शुरू होते ही रेलवे के सिस्टम को हैक कर लेता है। एएनएमएस व ब्लैक टीएस जैसे दर्जन भर अवैध सॉफ्टवेयर इंटरनेट के प्लेटफार्म पर उपलब्ध हैं।
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इन सॉफ्टवेयर की चाल रेलवे के सॉफ्टवेयर से कई गुना फास्ट होती है। टिकट दलाल इतने शातिर होते हैं कि टिकट बुक होने से पहले ही यात्री का नाम, उम्र और अन्य विवरण भरकर तैयार रहते हैं। रेलवे काउंटर पर जब तक क्लर्क एक टिकट बुक करता है, तब तक दलालों का नेटवर्क अपने सिस्टम से 20-25 टिकट बुक कर लेता है।
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खास बात कि तत्काल के समय इंटरनेट से टिकटों की बुकिंग बंद रहती है। इसके बावजूद भी टिकट दलाल टिकट बुक करके यात्रियों से मुंहमांगी रकम वसूल रहे हैं। पिछले दिनों आरपीएफ ने अभियान चलाकर इस कोरोना काल में तीन से चार टिकट दलालों को गिरफ्तार भी किया था। 
 

Railway's instant ticket system destroyed, brokers are hacked
IRCTC - फोटो : IRCTC

तत्काल में भी लागू है प्रीमियम किराया 

हर ट्रेन में 30 फीसदी बर्थ तत्काल के लिए आरक्षित रहती है। समान्यत: तत्काल कोटे में स्लीपर के निर्धारित किराए से 150 व एसी के लिए 300 रुपये अधिक लगते हैं। यात्रा से एक दिन पहले सुबह 10 बजे से वातानुकूलित और 11 बजे से स्लीपर श्रेणी के तत्काल टिकट बुक होते हैं। अब तत्काल में भी प्रीमियम सिस्टम लागू हो गया है। तत्काल कोटे का 50 फीसदी टिकट बुक होने के बाद किराया लगातार बढ़ता जाता है।

ट्रेनों में वरिष्ठ नागरिकों के टिकट पर यात्रा कर रहे युवा

वरिष्ठ नागरिकों के टिकट पर कम उम्र के यात्री सफर कर रहे हैं। यह काम टिकट दलाल एक नेटवर्क बनाकर कर रहे हैं। पूर्वोत्तर रेलवे वाराणसी मंडल की टीम ने इस फर्जीवाड़े को पकड़ा है। डीआरएम वीके पंजियार के निर्देश पर सीनियर डीसीएम संजीव शर्मा ने रविवार को मुंबई, अहमदाबाद, नई दिल्ली की ट्रेनों में चेकिंग अभियान चलाकर ऐसे यात्रियों को पकड़ा, जो फर्जीवाड़े के तहत सफर कर रहे थे।

सप्ताह भर तक चले जांच में टीम ने ताप्ती गंगा एक्सप्रेस, गोरखपुर अहमदाबाद एक्सप्रेस, पवन एक्सप्रेस, शिवगंगा एक्सप्रेस अन्य ट्रेनों में आरक्षित टिकटों की कालाबाजारी पकड़ी। वरिष्ठ नागरिकों के टिकट पर अधेड़, युवा यात्रा करते हुए मिले। कई यात्रियों के पास मूल टिकट नहीं मिला उन्हें दलालों ने टिकट स्कैन करके दे दिया था। अवैध तरीके से यात्रा कर रहे 320 यात्रियों को विभिन्न स्टेशनों पर उतारा गया। वहीं 26 यात्रियों से 36000 जुर्माना वसूला गया।
 

ट्रेनों में आरक्षित टिकटों की कालाबाजारी की संभावना को देखते हुए जांच अभियान चलाया जा रहा है। स्टेशनों के आरक्षण काउंटर पर भी आरपीएफ द्वारा विशेष निगरानी की जा रही है। प्लेटफॉर्मों  पर प्रवेश द्वार पर सघन टिकट जांच अभियान चलाया जा रहा है। -अशोक कुमार, जन संपर्क अधिकारी

मंडुवाडीह स्टेशन पर सोशल डिस्टेंसिंग बेपटरी  

अब रेलवे स्टेशनों व ट्रेनों में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं हो रहा है। यात्री और रेल प्रशासन भी बेफिक्र हो चुका है। मंडुवाडीह से एक मात्र ट्रेन शिवगंगा एक्सप्रेस के समय तो यात्री लंबी लाइन लगाकर स्क्रिनिंग को तैयार रहते हैं। कोई मास्क तो कोई बगैर मास्क के लाइन में लगा रहता है। दो गज की दूरी का पालन को कौन कहे, यहां तो एक पर एक यात्री चढ़कर अपनी बारी की प्रतीक्षा में रहते हैं।

आरपीएफ व जीआरपी भी अब इन यात्रियों को कतारबद्ध कराने के दौरान कोविड नियमों का पालन नहीं कराते हैं। यही हाल कैंट रेलवे स्टेशन पर भी है। आरक्षण टिकट केंद्र पर भीड़ उमड़ रही और मुंबई, अहमदाबाद, सूरत, गुजरात व नई दिल्ली की ट्रेनों में भी जैसे-तैसे यात्री सफर कर रहे हैं। कहीं सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं किया जा रहा है।

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