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पूर्वांचल विवि दीक्षांत समारोहः राज्यपाल राम नाईक के हाथों सोना पाकर चहके मेधावी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Tue, 06 Nov 2018 10:57 AM IST
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छात्रा को गोल्ड मेडल देते राज्यपाल राम नाईक
- फोटो : amar ujala
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जौनपुर के वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के 22 वें दीक्षांत समारोह के स्वर्णिम बेला में कुलाधिपति राम नाईक के हाथों मंच पर मेडल पाकर मेधावी गदगद हो उठे। टॉपर छात्रों ने अपनी सफलता के पीछे अपने माता पिता और गुरुजनों का योगदान बताया। हाल में बैठे अभिभावक भी अपने बच्चों को मंच पर सम्मानित होते देखकर फूले नहीं समा रहे थे।
दीक्षांत समारोह में कुल 58 छात्रों को गोल्ड मेडल दिया गया। इसमें स्नातक के 16 छात्र थे। जिसमें 10 छात्र और 6 छात्राएं शामिल थी। इसी प्रकार परास्नातक में 42 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक दिया गया। जिसमें 14 छात्र और 28 छात्राएं शामिल थी।
विश्वविद्यालय के बीटेक कंप्यूटर साइंस की छात्रा प्रगति राय का कहना है कि उनकी मेहनत और माता पिता की आशीर्वाद रंग लाया है। जिसके चलते उन्हें गोल्ड मेडल मिला। आज का दिन उनके यादगार रहेगा।
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विश्वविद्यालय के एमए मासकॉम की छात्रा सोनम विश्वकर्मा और एलएलबी की छात्रा तहजीब जहां का कहना है कि उन्हें विश्वास था उनका चयन गोल़्ड के लिए किया जाएगा। पूरे साल पढ़ाई पर बडी ईमानदारी के साथ ध्यान दिया था। जिसका नतीजा रहा कि उन्हें आज मंच से सम्मानित किया गया।
बीकाम के छात्र अभिषेक पाठक का कहना है कि उनकी सफलता के पीछे उनके माता पिता और गुरुजनों का हाथ हैं। सभी का आशीर्वाद से उनके जीवन में खुशी का यह पल आया। मंच से राज्यपाल के हाथों उन्हें सम्मानित किया।
इसी प्रकार बीपीई के छात्र सुधीर सिंह और बीएससी कृषि के छात्र दिवाकर जी का कहना है कि मंच पर सम्मानित किया जाना बड़े सम्मान की बात है। राज्यपाल के हाथों मेडल और सम्मान पाकर वह अभिभूत है। अपनी सफला का श्रेय वह अपने गुरूजन, माता पिता और साथियों को देतें हैं। मेडल पाने के बाद टापर छात्र काफी उत्साहित दिखे। हाल से बाहर निकलने के बाद कोई परिवार के साथ तो कोई अपने मित्रों के साथ सेल्फी लेते देखा गया।
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दीक्षांत समारोह में कुल 58 छात्रों को गोल्ड मेडल दिया गया। इसमें स्नातक के 16 छात्र थे। जिसमें 10 छात्र और 6 छात्राएं शामिल थी। इसी प्रकार परास्नातक में 42 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक दिया गया। जिसमें 14 छात्र और 28 छात्राएं शामिल थी।
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विश्वविद्यालय के बीटेक कंप्यूटर साइंस की छात्रा प्रगति राय का कहना है कि उनकी मेहनत और माता पिता की आशीर्वाद रंग लाया है। जिसके चलते उन्हें गोल्ड मेडल मिला। आज का दिन उनके यादगार रहेगा।
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विश्वविद्यालय के एमए मासकॉम की छात्रा सोनम विश्वकर्मा और एलएलबी की छात्रा तहजीब जहां का कहना है कि उन्हें विश्वास था उनका चयन गोल़्ड के लिए किया जाएगा। पूरे साल पढ़ाई पर बडी ईमानदारी के साथ ध्यान दिया था। जिसका नतीजा रहा कि उन्हें आज मंच से सम्मानित किया गया।
बीकाम के छात्र अभिषेक पाठक का कहना है कि उनकी सफलता के पीछे उनके माता पिता और गुरुजनों का हाथ हैं। सभी का आशीर्वाद से उनके जीवन में खुशी का यह पल आया। मंच से राज्यपाल के हाथों उन्हें सम्मानित किया।
इसी प्रकार बीपीई के छात्र सुधीर सिंह और बीएससी कृषि के छात्र दिवाकर जी का कहना है कि मंच पर सम्मानित किया जाना बड़े सम्मान की बात है। राज्यपाल के हाथों मेडल और सम्मान पाकर वह अभिभूत है। अपनी सफला का श्रेय वह अपने गुरूजन, माता पिता और साथियों को देतें हैं। मेडल पाने के बाद टापर छात्र काफी उत्साहित दिखे। हाल से बाहर निकलने के बाद कोई परिवार के साथ तो कोई अपने मित्रों के साथ सेल्फी लेते देखा गया।
लड़कियां बढ़ रही आगे लड़कों को सोचना होगा
दीक्षांत समारोह में आए छात्र-छात्राएं
- फोटो : amar ujala
दीक्षांत समारोह में राज्यपाल राम नाईक ने छात्रों को शिक्षा के लिए प्रेरित किया। शिक्षा के क्षेत्र में लड़कियों की तेजी से बढ रही भागीदारी की सराहना की वहीं दूसरी तरफ छात्रों को आगे बढ़ने के लिए चेताया भी। उन्होंने कहा कि लड़कियां आगे बढ़ रही हैं लड़कों को सोचना होगा। राज्यपाल प्रदेश के कई विश्वविद्यालयों में लड़कों और लड़कियों के प्रतिशत का तुलनात्मक आंकड़ा भी प्रस्तुत किया।
डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा में छात्राओं की भागीदारी 85 फीसदी होने पर शाबाशी दी। वहीं पूर्वांचल विश्वविद्यालय की लड़कियों को शिक्षा के क्षेत्र में और ऊंची उड़ान भरने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा सफलता के लिए अपने भीतर प्रतिस्पर्धा को बढ़ाना होगा। राज्यपाल राम नाईक में शिक्षा में छात्र और छात्राओं की भागीदारी का आंकड़ा प्रस्तुत किया।
उन्होंने बताया कि इस साल विश्वविद्यालय की मुख्य परीक्षा में फिर छात्राओं ने बाजी मारी है। लड़कों को पीछे छोड़ लड़कियों ने फिर परचम लहराया। कुल 58 छात्रों का चयन गोल्ड मेडल के लिए किया गया। जिसमें 24 छात्र और 34 छात्राएं शामिल हैं। इसमें छात्र 38 फीसदी और छात्राएं 62 फीसदी शामिल हैं। छात्राएं बधाई की हकदार हैं।
उन्होंने बताया कि 2017 की मुख्य परीक्षा में कुल 158276 छात्रों को डिग्री दी गई है। जिसमें 60471 छात्र और 97805 छात्राएं शामिल हैं। छात्रों की भागीदारी 41 फीसदी जबकि छात्राएं 62 फीसदी हैं।
राज्यपाल रामनाईक ने पूर्वांचल विश्वविद्यालय के अलावा छत्रपति साहू जी विश्वविद्यालय कानपुर और महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में छात्राओं की संख्या 81 फीसदी, गोरखपुर विश्वविद्यालय में 82 फीसदी और डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा में 85 फीसदी छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रही हैं।
प्रदेश के 24 विश्वविद्यालयों के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो कुल 12.58 छात्रों को डिग्री दी गई है। जिसमें 56 फीसदी छात्राएं हैं और 44 फीसदी छात्र शामिल हैं। जबकि पिछले वर्ष की परीक्षा में छात्राओं का प्रतिशत 51 था। एक वर्ष में छात्राओं की संख्या पांच फीसदी बढ गई है। जो महिला सशक्तिकरण के लिए सुखद संदेश हैं।
डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा में छात्राओं की भागीदारी 85 फीसदी होने पर शाबाशी दी। वहीं पूर्वांचल विश्वविद्यालय की लड़कियों को शिक्षा के क्षेत्र में और ऊंची उड़ान भरने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा सफलता के लिए अपने भीतर प्रतिस्पर्धा को बढ़ाना होगा। राज्यपाल राम नाईक में शिक्षा में छात्र और छात्राओं की भागीदारी का आंकड़ा प्रस्तुत किया।
उन्होंने बताया कि इस साल विश्वविद्यालय की मुख्य परीक्षा में फिर छात्राओं ने बाजी मारी है। लड़कों को पीछे छोड़ लड़कियों ने फिर परचम लहराया। कुल 58 छात्रों का चयन गोल्ड मेडल के लिए किया गया। जिसमें 24 छात्र और 34 छात्राएं शामिल हैं। इसमें छात्र 38 फीसदी और छात्राएं 62 फीसदी शामिल हैं। छात्राएं बधाई की हकदार हैं।
उन्होंने बताया कि 2017 की मुख्य परीक्षा में कुल 158276 छात्रों को डिग्री दी गई है। जिसमें 60471 छात्र और 97805 छात्राएं शामिल हैं। छात्रों की भागीदारी 41 फीसदी जबकि छात्राएं 62 फीसदी हैं।
राज्यपाल रामनाईक ने पूर्वांचल विश्वविद्यालय के अलावा छत्रपति साहू जी विश्वविद्यालय कानपुर और महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में छात्राओं की संख्या 81 फीसदी, गोरखपुर विश्वविद्यालय में 82 फीसदी और डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा में 85 फीसदी छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रही हैं।
प्रदेश के 24 विश्वविद्यालयों के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो कुल 12.58 छात्रों को डिग्री दी गई है। जिसमें 56 फीसदी छात्राएं हैं और 44 फीसदी छात्र शामिल हैं। जबकि पिछले वर्ष की परीक्षा में छात्राओं का प्रतिशत 51 था। एक वर्ष में छात्राओं की संख्या पांच फीसदी बढ गई है। जो महिला सशक्तिकरण के लिए सुखद संदेश हैं।