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हृदय और फेफड़े में टूटकर फंसे 60 सेमी ट्यूब को बाहर निकाला
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ब्रेस्ट कैंसर से जूझ रही एक साठ साल की महिला के हृदय और फेफड़े में कीमोथेरेपी के दौरान करीब 60 सेंटीमीटर लंबी ट्यूब फंस गई थी। बीएचयू में हृदय रोग विभाग के प्रोफेसर ओमशंकर की अगुवाई वाली डॉक्टरों की टीम ने इन्वेसिव सर्जरी कर इसे बाहर निकाला। सुई की मदद से बिना चीर फाड़ इस ट्यूब को तीन घंटे की सर्जरी के बाद निकालने में सफलता मिली है। फिलहाल महिला स्वस्थ है और उसे डिस्चार्ज भी कर दिया गया है।
वाराणसी निवासी महिला के कैंसर का इलाज लंबे समय से चल रहा था। मंगलवार को वह हृदय रोग विभाग में पहुंची और ट्यूब फंसने के बारे में जानकारी दी। प्रोफेसर ओमशंकर ने तुरंत सर्जरी का फैसला लिया। उन्होंने बताया कि कीमोथेरेपी में आम तौर पर ट्यूब का इस्तेमाल किया जाता है। ताकि कैंसर से बचाव के लिए दी जाने वाली दवा के दुष्प्रभाव का खतरा नसों पर कम हो। महिला की कीमोथेरेपी जहां हुई थी, वहां 70 सेंटीमीटर लंबी ट्यूब का इस्तेमाल किया गया था, लेकिन दवा चढ़ाने के बाद करीब 60 सेंटीमीटर ट्यूब अंदर ही टूट गई। जब कैंसर चिकित्सक ने सीटी स्कैन करवाया तो पता चला कि नली नसों से निकलकर हृदय से होते हुए फेफड़ों में जा पहुंची। उसका आधा भाग दाहिने हृदय में भी फंसा हुआ है। अगर इस नली को नहीं निकाला गया होता तो खून का थक्का बन सकता था और मरीज की जान जा सकती थी।
पहली बार सुई से निकाला गया टयूब
प्रोफेसर ओमशंकर ने बताया कि आम तौर पर इस तरह के ट्यूब को निकालने के लिए ओपेन हार्ट सर्जरी करनी पड़ती है। इसमें अधिक खर्च के साथ ही जान का खतरा भी रहता है। पहली बार मिनिमली इन्वेसिव सर्जरी कर सूई के माध्यम से ट्यूब को बिना किसी चीरफाड़ बाहर निकाला गया।
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वाराणसी निवासी महिला के कैंसर का इलाज लंबे समय से चल रहा था। मंगलवार को वह हृदय रोग विभाग में पहुंची और ट्यूब फंसने के बारे में जानकारी दी। प्रोफेसर ओमशंकर ने तुरंत सर्जरी का फैसला लिया। उन्होंने बताया कि कीमोथेरेपी में आम तौर पर ट्यूब का इस्तेमाल किया जाता है। ताकि कैंसर से बचाव के लिए दी जाने वाली दवा के दुष्प्रभाव का खतरा नसों पर कम हो। महिला की कीमोथेरेपी जहां हुई थी, वहां 70 सेंटीमीटर लंबी ट्यूब का इस्तेमाल किया गया था, लेकिन दवा चढ़ाने के बाद करीब 60 सेंटीमीटर ट्यूब अंदर ही टूट गई। जब कैंसर चिकित्सक ने सीटी स्कैन करवाया तो पता चला कि नली नसों से निकलकर हृदय से होते हुए फेफड़ों में जा पहुंची। उसका आधा भाग दाहिने हृदय में भी फंसा हुआ है। अगर इस नली को नहीं निकाला गया होता तो खून का थक्का बन सकता था और मरीज की जान जा सकती थी।
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पहली बार सुई से निकाला गया टयूब
प्रोफेसर ओमशंकर ने बताया कि आम तौर पर इस तरह के ट्यूब को निकालने के लिए ओपेन हार्ट सर्जरी करनी पड़ती है। इसमें अधिक खर्च के साथ ही जान का खतरा भी रहता है। पहली बार मिनिमली इन्वेसिव सर्जरी कर सूई के माध्यम से ट्यूब को बिना किसी चीरफाड़ बाहर निकाला गया।
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