बजट मिलने के बाद भी देरी, आज सीएम के निशाने पर होंगे जल, लोक निर्माण और राजकीय निर्माण निगम के अफसर
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विकास की राह पर चल रहे वाराणसी में अफसरों की लापरवाही लोगों की मुसीबत बढ़ा रही है। राजकीय निर्माण निगम की ज्यादातर परियोजनाएं लापरवाही की भेंट चढ़ रही हैं। कई परियोजनाएं तो ऐसी थी, जिसका बजट तो जारी हो गया मगर उसका काम शुरू ही नहीं हो पाया। हालांकि आनन-फानन में परियोजनाओं पर काम तो शुरू करा दिया गया, मगर उनमें तय समय से काफी देर हो चुकी है।
मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विकास परियोजनाओं की हकीकत जानने वाराणसी आ रहे हैं। ऐसे में उनके निशाने पर राजकीय निर्माण निगम, जल निगम और लोक निर्माण विभाग के अधिकारी होंगे। 16 अक्तूबर को मुख्यमंत्री ने वाराणसी दौरे पर राजकीय निर्माण निगम के अधिकारियों पर नाराजगी जताई थी और कार्रवाई का निर्देश भी दिया था। राजकीय निर्माण निगम को सेवापुरी में सरदार वल्लभ भाई पटेल, बड़ागांव में आईटीआई का निर्माण कराना है। इनमें एक भी परियोजना ऐसी नहीं हैं जो समय से शुरू हुई हो। देरी से काम शुरू करने के बाद उसकी गति बहुत धीमी है। जिलाधिकारी कौशलराज शर्मा ने राजकीय निर्माण निगम के परियोजनाओं की फाइलें भी तलब की हैं।
मैटरनिटी विंग का काम 25 फीसदी भी नहीं पूरा
पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय चिकित्सालय परिसर में 21.88 करोड़ रुपये की लागत से 50 बेड का मैटरनिटी विंग राजकीय निर्माण निगम तैयार कर रहा है। मार्च 2020 तक पूरी होने वाली परियोजना अब तक 25 फीसदी भी काम नहीं हो पाया। राजकीय निर्माण निगम ने ठेकेदार को कार्य का ड्राइंग बहुत देरी से उपलब्ध कराया गया। प्रशासनिक अधिकायिों ने ठेकेदार से समय पर काम पूरा कराने का एफिडेविट लेकर निर्माण कराया जा रहा है।
आठ साल बाद भी सेंट्रल जेल का काम अधूरा
वर्ष 2011 में केंद्रीय कारागार में 9.86 करोड़ से 2500 मीटर चहारदीवारी, 6.78 करोड़ रुपये से 450 बैरक, 5.16 करोड़ रुपये से दो रूम फ्लैट के 45 आवास के निर्माण को स्वीकृति मिली थी। राजकीय निर्माण निगम को यह काम 2014 में पूरा करना था। लेकिन 15 अप्रैल 2015 तक चहारदीवारी का पूरा पैसा खर्च होने के बाद केवल एक हजार मीटर ही चहारदीवार बनी। आगे के निर्माण के लिए बजट मांगा गया। 2016 में जांच की गई तो 17.51 करोड़ खर्च होने के बाद भी केवल 2100 मीटर चहारदीवारी बनी। 450 बैरकों में केवल 270 ही हैंडओवर किए गए। 120 का ढांचा खड़ा है। जबकि 60 का निर्माण ही शुरू नहीं हुआ है। बजट पूरा खर्च होने के बाद अधूरे पड़े काम की एसआईटी जांच कराई जा रही है।
कालेज का निर्माण भी अधर में
सेवापुरी में राजकीय कालेज और बड़गांव में आईटीआई का निर्माण राजकीय निर्माण निगम को कराना है। इसका बजट जारी होने के बाद भी यहां काम शुरू नहीं कराया गया था। अक्तूबर में मुख्यमंत्री ने समीक्षा बैठक में इस पर नाराजगी जताई थी और परियोजना प्रबंधक से जवाब-तलब किया था। राजकीय कालेज का निर्माण शुरू कराया गया है, मगर आईटीआई का निर्माण नहीं शुरू हुआ।
लोक निर्माण की गड्ढामुक्त सड़कों पर हिचकोले
मुख्यमंत्री ने 15 नवंबर तक सड़कों को गड्ढामुक्त करने का निर्देश दिया था। कागजी खानापूर्ति कर लोक निर्माण विभाग ने सड़कों को गड्ढामुक्त करने का दावा किया है। मगर, वाराणसी की ज्यादातर सड़कों पर लोग हिचकोले खाने को मजबूर हैं। कुछ सड़कों पर तो अब तक काम भी नहीं कराया गया।
केंद्रीय कारागार में निर्माण कार्य का डीएम ने किया निरीक्षण
जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने सोमवार को केन्द्रीय कारागार में निर्माण निगम द्वारा कराये जा रहे कार्यो का स्थलीय निरीक्षण किया। कार्यदायी संस्था के अभियंता को काम तेज करने का निर्देश दिया। केन्द्रीय कारागार में निर्माणाधीन 60 कमरों और 120 कमरों की दो बैरकों तथा आवासीय भवन का निरीक्षण किया। महाप्रबंधक तथा प्रोजेक्ट मैनेजर निर्माण निगम से बजट की जानकारी ली और भवन निर्माण का कार्य बंद होने का कारण पूछा। सांस्कृतिक संकुल में भी निर्माण निगम द्वारा पर्यटन विभाग के कराये गये कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया।
परियोजनाओं की लेट लतीफी पर जिम्मेदारी तय की जा रही है। राजकीय निर्माण निगम के कामों को शुरू कराया गया है। लगातार समीक्षा भी की जा रही है। जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई भी होगी।
दीपक अग्रवाल, मंडलायुक्त