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साहित्य व राजनीति के सेतु थे पं. सुधाकर पांडेय

Thu, 01 Jul 2021 12:48 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 01 Jul 2021 12:48 AM IST
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Pt. Sudhakar Pandey was the bridge of literature and politics
नागरी प्रचारिणी सभा के पूर्व प्रधानमंत्री व साहित्यकार पं. सुधाकर पांडेय की साहित्य सेवा व सर्जना बेमिसाल थी। उन्होंने अपने व्यक्तित्व से यह महसूस कराया कि हिंदी केवल भाषा नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति की संवाहिका है। वह साहित्य व राजनीति के सेतु थे। वह दोनों में समन्वय स्थापित करने में सफल रहे।
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नागरी प्रचारिणी सभा के ब्रजेश चंद्र पांडेय ने बताया कि भारतेंदु हरिश्चंद्र के आदर्श सुधाकर जी के व्यक्तित्व व कृतित्व में नजर आते थे। वह जितने बड़े साहित्यकार थे उतने ही सहज भी थे। बनारस का खांटीपन उनमें विद्यमान था। सुधाकर पांडेय का जन्म एक जुलाई 1927 को चंदौली में हुआ था। वह हिंदी साहित्य की प्रमुख विधाओं के उत्कृष्ट लेखक और सुधारक थे। उनकी छवि एक निष्ठावान और स्वाभिमानी व्यक्ति की थी।
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वह न केवल हिंदी की सबसे बड़ी संस्था के प्रधान थे बल्कि स्वयं एक अच्छे लेखक व संपादक भी थे। उन्होंने लगभग 30 ग्रंथों का संपादन किया था। हिंदी के लेखक व प्रचारक होने के बावजूद वह सभी भाषाओं का आदर व सम्मान करते थे। वर्ष 1971 में कांग्रेस के उम्मीदवार और सांसद भी चुने गए थे। उनकी पहली कविता का प्रकाशन 1943 और पहली कहानी 1944 में प्रकाशित हुई थी। उनकी पहली काव्यकृति निहारिका 1950 में आई थी। वह 1969 से 2003 तक नागरी प्रचारिणी सभा के प्रधानमंत्री रहे। 18 अप्रैल, 2003 को सुधाकर पांडेय चिर समाधि में लीन हुए।
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