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पं. राजन मिश्र की पहली पुण्यतिथि: भाई साजन मिश्र बोले- आज भी नहीं भूलता वह काला दिन, जब काल ने छीन लिया बडे़ भैया को

Mon, 25 Apr 2022 10:56 AM IST
वाराणसी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: वाराणसी ब्यूरो Updated Mon, 25 Apr 2022 10:56 AM IST
सार

शास्त्रीय गायन की दुनिया में अपनी अमिट छाप छोड़ने वाले पंडित राजन मिश्र की आज पहली पुण्यतिथि है। 

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pandit Rajan Mishra first death anniversary today brother sajan mishra said  not forget that Black day of corona time
पंडित राजन मिश्र की आज पहली पुण्यतिथि - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शास्त्रीय संगीत के जगत में राम-लक्ष्मण की जोड़ी के तौर पर पं. राजन-साजन मिश्र को जाना जाता था। कोरोना के क्रूर पंजे ने संगीत जगत के इस नगीने को 25 अप्रैल 2021 को हमसे छीन लिया। पं. राजन मिश्र की प्रथम पुण्यतिथि पर जब उनके लक्ष्मण यानि की छोटे भाई पं. साजन मिश्र से बातचीत की गई तो उनकी कोरें फिर से नम हो आईं।

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पद्मभूषण पं. साजन मिश्र ने कहा कि सपने में भी कभी नहीं सोचा था कि कभी भैया के बिना मंच पर गाना होगा। वह तो मेरे राम थे और आज भी मेरे स्वरों में जीवित हैं। जब भी मैं मंच पर स्वर लगाता हूं तो महसूस होता है कि बड़े भैया मेरे पीछे ही हैं। भैया के बिना गाने का असर तो पड़ेगा ही, मंच पर हर बार उनकी कमी हमको खलेगी लेकिन उनकी छवि मेरे अंदर ही विराजमान है।

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स्मृतियों को संगीत के जरिये सहेजने की कोशिश

55 साल से लगातार हम लोग जुगलबंदी करते आ रहे थे, लेकिन कोरोना के क्रूर हाथों ने उनको हमसे छीन लिया। जब मैं छह साल का था और भैया 11 साल के थे तब से हम लोग साथ गा रहे थे। भैया की स्मृतियों को संगीत के जरिये सहेजने की कोशिश में लगा हुआ हूं।

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पढ़ेंः पंडित राजन मिश्र जी की पुण्यतिथि: बनारस घराने की शान पद्मभूषण पंडित राजन मिश्र, अमर रहेगी उनकी प्रतिभा

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राजन-साजन मिश्रा (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
इस साल संकटमोचन संगीत समारोह में जब भैया के बिना प्रस्तुति देने पहुंचा तो दिल का दर्द सुरों में छलक आया था। भैया की स्मृति में नई दिल्ली में श्रद्धांजलि समारोह का तीन दिवसीय आयोजन किया गया है। 23 से 25 अप्रैल तक होने वाले आयोजन में पं. राजन मिश्र के शिष्यों समेत देश भर के कलाकार संगीत की स्वरांजलि अर्पित कर रहे हैं।

कोरोना संक्रमण काल में हुआ था निधन
पं. राजन मिश्रा को सन 2007 में भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। इनका संबंध बनारस घराने से था। उन्होंने 1978 में श्रीलंका में अपना पहला संगीत कार्यक्रम दिया और इसके बाद उन्होंने जर्मनी, फ्रांस, स्विट्जरलैंड, आस्ट्रिया, संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन, नीदरलैंड, यूएसए, सिंगापुर, कतर, बांग्लादेश और दुनिया भर के कई देशों में प्रदर्शन किया।
 

हनुमत दरबार से ही शुरू हुई पं. राजन मिश्र की संगीत यात्रा

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संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभरनाथ मिश्र - फोटो : अमर उजाला
संकटमोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभरनाथ मिश्र ने बताया कि 1979 के संकटमोचन संगीत समारोह में पं. राजन-साजन मिश्र ने पहली प्रस्तुति दी थी। वह भोर में गाने के लिए बैठे तो उस दिन पं. रविशंकर का जन्मदिन भी था। वह सुबह में संकटमोचन का दर्शन करने आए थे, जब उनके कानों में दोनों भाईयों के गायन का स्वर पड़ा तो वह भी सुनने बैठ गए। उन्होंने पूरा कार्यक्रम सुना और उनको बहुत पसंद आया।

विश्व में फहराई थी शास्त्रीय संगीत की यश पताका
संगीत नाटक अकादमी के अध्यक्ष पद्मश्री डॉ. राजेश्वर आचार्य ने कहा कि पं. राजन मिश्र ने विश्व में शास्त्रीय संगीत की यश पताका फहराई थी। यह उनकी प्रतिभा का ही कमाल था कि उन्होंने अपनी कला से यह बता दिया कि उपशास्त्रीय व सुगम संगीत से ज्यादा प्रभावी शास्त्रीय संगीत है। मैंने तो उनको आठ साल की आयु से ही संगीत का रियाज करते हुए देखा था। जैसे बचपन में मिलते थे वैसे ही संगीत जगत के शीर्ष पर पहुंचने के बाद भी।
 
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