बनारस आकर हो जाता हूं फिर से जवां... 75 वें जन्मदिन पर पं. बिरजू महाराज की प्रस्तुति आज भी है जेहन में ताजा
पद्मविभूषण पं. बिरजू महाराज ने मंच से कहा कि उम्र तो बस नंबरों का खेल है। 75 साल का होने के बाद भी मैं जब बनारस आता हूं तो खुद को जवां महसूस करता हूं।
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वाकया नौ साल पुराना है। 2013 में बनारस में कला प्रकाश के कार्यक्रम गुलाबबाड़ी में कथक सम्राट मौजूद थे। सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान स्थानीय कलाकार अपनी प्रस्तुतियां दे रहे थे। बारी जब कथक सम्राट की आई तो अस्वस्थता के कारण उन्होंने बैठे-बैठे ही भावपूर्ण कथक की प्रस्तुतियां शुरू कीं। अंत में उनका मन नहीं माना और उनके पैर घुंघरू की झंकार पर थिरकने लगे।
अस्वस्थता के बावजूद भी पद्मविभूषण पं. बिरजू महाराज ने 30 मिनट तक नृत्य किया और दर्शक भी दम साधे उनकी प्रस्तुतियों को देखते रहे। घुंघरूओं की झंकार, मोर की चाल, ट्रैफिक की आवाज, तबले की थाप को अपने नृत्य में समेटे हुए कथक सम्राट की वह प्रस्तुति हर दिल को छू गई। थोड़ी थकान हुई तो मंच पर बैठ गए और बिना कदम चलाए अपने चेहरे के भावों से ही महफिल लूट ली।
उनकी नजरों का खेल और हाथों की अठखेलियां देखने के बाद दर्शकों ने भी जोरदार तालियां बजाईं। मंच से ही उन्होंने कहा कि उम्र तो बस नंबरों का खेल है। 75 साल का होने के बाद भी मैं जब बनारस आता हूं तो खुद को जवां महसूस करता हूं। वही ऊर्जा, वही थिरकन, वही उल्लास मेरे पैरों में दौड़ने लगता है जो 18 साल की उम्र में हुआ करता था।
चल गयल एही मोहल्ले क ठसकदार समधी, एही बस्ती क लजाधुर जंवाई: पं. कामेश्वर
कामेश्वर, हमें त यार बनारस क दुईय चीज ह प्यारी। एक ठे समधियाने क मीठ-मीठ गारी अ दूसर ससुराल क खातिरदारी। इतना कहते ही पं. कामेश्वर नाथ मिश्र की आंखें झलक उठीं। बिलखते हुए कामेश्वर मिश्र ने कहा कि अब उ अलमस्त अंदाज भला उ कहां देखाई। चल गयल एही मोहल्ले क ठसकदार समधी, एही बस्ती क लजाधुर जवांई। सिसकने के बाद पं. कामेश्वर मिश्र फफक उठे।
कबीरचौरा में कथक सम्राट के निधन की खबर पहुंचते ही पद्मगली में शोक की लहर दौड़ गई। शोकाकुल कामेश्वर मिश्र ने बताया कि उन्हें आज भी याद है कि वह दिन जब बिरजू महाराज के चाचा पं. शंभु महाराज अपने भतीजे की बरात लेकर आए थे। पिपलानी कटरा में जनवासा बनाया गया था। बहुत रौनक थी। जब भी बिरजू महाराज से मुलाकात होती तो वह खूब चुटकी लेते थे।
का बनारस का लखनऊ! अवध क बिरजू महाराज अ काशी क पं. रामसहाय जी क पुरखा त एके रहलन न बचऊ। महाराज जी जिंदगी भर इ आन निबहलन काशी के घरौंदा अ लखनऊ के घराना मनलन। पं. बिरजू महाराज का विवाह बनारस संगीत घराने के सलाका पुरुष पं. श्रीचंद्र मिश्र की पुत्री अन्नपूर्णा से हुआ था, जबकि सारंगी वादक पं. हनुमान मिश्र उनके समधी थे। हनुमान मिश्र के छोटे बेटे पद्मभूषण साजन मिश्र का विवाह बिरजू महाराज की पुत्री कविता से हुआ था।