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पीड़ितों का एसजीपीजीआई में इलाज कराएं वीसी : हाईकोर्ट

Sat, 02 Apr 2016 02:39 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, ब्यूरो
ब्यूरो/अमर उजाला, ब्यूरो Updated Sat, 02 Apr 2016 02:39 AM IST
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Provide victims of the PGI in the treatment VC: High
बीएचयू अस्पताल
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में गलत इलाज से सात मरीजों की आंख खराब होने के मामले में हाईकोर्ट ने कुलपति को निर्देश दिया है कि वह पीड़ितों का इलाज एसजीपीजीआई में कराएं। कोर्ट ने कहा कि यदि पीड़ित तैयार हों तो उनका इलाज पीजीआई में कराया जाए और इसका पूरा खर्च विश्वविद्यालय उठाए। यहां तक कि उनके आने-जाने और रहने का खर्च भी विश्वविद्यालय उठाए। 
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विधि छात्रा दीक्षा द्विवेदी और अन्य द्वारा दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायमूर्ति डॉ. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खंडपीठ ने प्रदेश सरकार से इस मामले की जांच रिपोर्ट मांगी है। इसके अलावा बीएचयू को निर्देश दिया है कि वह स्वतंत्र विशेषज्ञों की टीम से इस घटना की अलग से जांच कराएं। हालांकि कोर्ट को बताया गया कि बीएचयू ने घटना की जांच के लिए एक कमेटी बना दी है जिसने अपनी रिपोर्ट भी दी है। इन सभी निर्देशों का पालन कर दो सप्ताह में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है, जबकि इलाज के लिए एक सप्ताह की मोहलत दी है।
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सर सुंदरलाल अस्पताल में 27 जनवरी 2016 को ‘अवेस्टीन’ नामक इंजेक्शन लगाने से सात मरीजों की आंख खराब हो गई थी। उन्हें संक्रमित इंजेक्शन लगाया गया था। 31 जनवरी को जब मामला सामने आया तब इसे लेकर काफी बवाल मचा। उस वक्त तो बीएचयू ने उन्हें इलाज का भरोसा दिलाया था। कहा कि था इलाज के लिए कोलकाता से विशेषज्ञ बुलाए जाएंगे, लेकिन कोलकाता से विशेषज्ञ ने आने में असमर्थता जता दी थी। इसके बाद उन्हें कोलकाता रेफर किया जाने लगा।
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इस बीच बीएचयू ने शर्त ये भी रखी कि पीड़ित मरीज बीएचयू में इलाज कराएं तब ही उनका खर्च वहन किया जाएगा। हालांकि उन सात मरीजों में से तीन मरीज अपनी आंखों का इलाज शंकर नेत्रालय चेन्नई से करा रहे हैं जबकि अन्य मरीजों का इलाज बीएचयू में हो रहा है। बीएचयू के अधिवक्ता के बताया कि उन पांच मरीजों की आंख अब ठीक हो रही है। कोर्ट ने अगली सुनवाई पर 22 अप्रैल को प्रदेश सरकार और बीएचयू को रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। याचिका में अखबारों में प्रकाशित समाचारों को आधार बताते हुए कहा गया कि गरीब मरीजों को डॉक्टरों की लापरवाही से गलत इंजेक्शन लगाया गया, जिससे उनकी आंख खराब हो गई और अब उनका इलाज भी नहीं कराया जा रहा है। 
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