Varanasi: संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में जमीन बचाने के लिए प्रदर्शन जारी, लामबंद हुए 161 कर्मचारी
वाराणसी स्थित संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय की दो एकड़ जमीन बिजली विभाग को पट्टे पर देने के विरोध में शिक्षक, कर्मचारी और छात्रों का धरना जारी है।
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वाराणसी स्थित संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में विश्वविद्यालय प्रशासन और शिक्षक-कर्मचारी आमने सामने आ गए हैं। गुरुवार को 161 कर्मचारियों के हस्तारयुक्त चेतावनी पत्र को कुलपति को भेजा गया। इसके साथ ही इसकी प्रतिलिपि कुलाधिपति से लेकर जिलाधिकारी को भी भेजी गई है।
विश्वविद्यालय की जमीन बचाने के लिए शिक्षक, कर्मचारी और छात्रों का धरना जारी है। गुरुवार को भेजे गए हस्ताक्षर पत्र में कहा गया है कि कुलपति को विश्वविद्यालय की जमीन बचाने के लिए आंदोलन का नेतृत्व करना चाहिए लेकिन वह आंदोलन करने वालों को ही नोटिस भेज रहे हैं।
... तो विश्वविद्यालय को पूरी तरह बंद कर देंगे
हम लोग शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे हैं और इससे विश्वविद्यालय का कोई कार्य प्रभावित नहीं हो रहा है लेकिन फिर भी विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से प्रो. रामपूजन पांडेय, प्रो. अमित कुमार शुक्ल, प्रो. जितेंद्र कुमार, लालजी मिश्र तथा कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सुशील कुमार तिवारी से स्पष्टीकरण मांगा गया है। सभी ने स्पष्टीकरण की निंदा करते हुए उसको वापस लेने की मांग की है।
इसके साथ ही चेतावनी दी है कि अगर पत्रों को वापस नहीं लिया गया तो शिक्षक, कर्मचारी और छात्र 11 नवंबर से विश्वविद्यालय को पूरी तरह बंद करके असहयोग के लिए बाध्य होंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी कुलपति की होगी।
कर्मचारी संघ की बैठक में हुई निंदा
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय कर्मचारी संघ की बैठक में विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा मांगे गए स्पष्टीकरण पत्र की निंदा की गई। बृहस्पतिवार को कर्मचारी संघ कार्यसमिति की बैठक सुशील कुमार तिवारी की अध्यक्षता में हुई। कर्मचारियों की बैठक में निंदा प्रस्ताव पारित किया गया। कर्मचारियों ने कहा कि विश्वविद्यालय के सभी विभाग के कर्मचारी नियमित रूप से अपने दायित्व को निभा रहे हैं।
ऐसे में कर्मचारी संघ पर धरना प्रदर्शन से कार्य बाधित करने का आरोप लगाना उचित नहीं है। संघ ने मांग की है कि उक्त आरोप को वापस लिया जाए। 10 नवंबर तक आरोप पत्र निरस्त नहीं हुआ तो 11 नवंबर से कर्मचारी कार्य बहिष्कार के लिए बाध्य होंगे। इसकी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।