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पद्म पुरस्कार 2018 की घोषणा, काशी के प्रो. भागीरथ त्रिपाठी को पद्मश्री सम्मान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sat, 27 Jan 2018 10:57 AM IST
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प्रो. भागीरथ प्रसाद त्रिपाठी
- फोटो : अमर उजाला
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वागीश शास्त्री के उपनाम से विख्यात संस्कृत के अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त विद्वान् आचार्य प्रो. भागीरथ प्रसाद त्रिपाठी को वर्ष 2018 का पद्मश्री पुरस्कार मिलेगा। काशी के रहने वाले प्रो. त्रिपाठी को गुरुवार को पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा की गई है।
भारत सरकार ने साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री सम्मान देने का निर्णय लिया है। प्रो. त्रिपाठी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संस्कृत साहित्यकार, वैयाकरण, भाषावैज्ञानिक, योगी और तंत्रवेत्ता के रूप में प्रसिद्ध हैं।
84 वर्षीय प्रो. त्रिपाठी का जन्म मध्य प्रदेश के सागर जनपद के बिलइया गांव में हुआ था। इन्होंने 1959 ई में वाराणसी के टीकमणी संस्कृत महाविद्यालय में बतौर अध्यापक कार्य आरंभ किया था। इनके अब तक चार सौ से भी अधिक शोधलेख प्रकाशित हो चुके हैं।
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डा. त्रिपाठी को वर्ष 2013 के राष्ट्रपति पुरस्कार भी मिला है। राजस्थान संस्कृत अकादमी की ओर से उन्हें बाणभट्ट पुरस्कार से नवाजा जा चुका है। करीब 30 साल तक संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय को अपनी सेवा देने वाले आचार्य को 1982 में ही काशी पंडित परिषद की ओर से महामहोपाध्याय की पदवी दी गई थी।
भारत सरकार ने साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री सम्मान देने का निर्णय लिया है। प्रो. त्रिपाठी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संस्कृत साहित्यकार, वैयाकरण, भाषावैज्ञानिक, योगी और तंत्रवेत्ता के रूप में प्रसिद्ध हैं।
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84 वर्षीय प्रो. त्रिपाठी का जन्म मध्य प्रदेश के सागर जनपद के बिलइया गांव में हुआ था। इन्होंने 1959 ई में वाराणसी के टीकमणी संस्कृत महाविद्यालय में बतौर अध्यापक कार्य आरंभ किया था। इनके अब तक चार सौ से भी अधिक शोधलेख प्रकाशित हो चुके हैं।
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डा. त्रिपाठी को वर्ष 2013 के राष्ट्रपति पुरस्कार भी मिला है। राजस्थान संस्कृत अकादमी की ओर से उन्हें बाणभट्ट पुरस्कार से नवाजा जा चुका है। करीब 30 साल तक संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय को अपनी सेवा देने वाले आचार्य को 1982 में ही काशी पंडित परिषद की ओर से महामहोपाध्याय की पदवी दी गई थी।