{"_id":"58d6d5704f1c1bac2a1a2bff","slug":"professor-accused-of-harassment-of-schoolgirl","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रोफेसर पर छात्रा के उत्पीड़न का आरोप","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रोफेसर पर छात्रा के उत्पीड़न का आरोप
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sun, 26 Mar 2017 02:09 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रधानमंत्री के संसदीय कार्यालय पर शनिवार को फरियाद लेकर पहुंची इलाहाबाद विश्वविद्यालय की दिव्यांग शोध छात्रा ने गाइड पर प्रताड़ना करना का सनसनीखेज आरोप लगाया। केंद्रीय मानव संसाधन राज्यमंत्री डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय के समक्ष शोध छात्रा ने कहा कि चार वर्ष से उसका मानसिक उत्पीड़न किया जा रहा है। कुलपति से दो बार शिकायत भी की लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। मानव संसाधन राज्यमंत्री ने शोध छात्रा को न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया।
रवींद्रपुरी स्थित पीएम के संसदीय दफ्तर पर जन सुनवाई के लिए केंद्रीय मानव संसाधान राज्यमंत्री तीन घंटे विलंब से पहुंचे। मंत्री के पहुंचते ही फरियादियों की भीड़ लग गई। इलाहाबाद विश्वविद्यालय की एक शोध छात्रा ने मंत्री को शिकायतों का मोटा पुलिंदा दिया। गोपीगंज (भदोही) की रहने वाली छात्रा ने मंत्री के समक्ष अपने गाइड प्रोफेसर पर गंभीर आरोप लगाया। कहा कि वह पिछले चार वर्ष से उसका मानसिक उत्पीड़न कर रहे हैं। इतना लंबा समय बीतने के बाद अब तक थीसिस पर भी कोई काम शुरू नहीं कराया गया है। बताया कि वीसी से दो बार शिकायत करने पर भी कोई सुनवाई नहीं हुई। मजबूरन उसे पीएम के संसदीय दफ्तर पर आना पड़ा।
विज्ञापन
रवींद्रपुरी स्थित पीएम के संसदीय दफ्तर पर जन सुनवाई के लिए केंद्रीय मानव संसाधान राज्यमंत्री तीन घंटे विलंब से पहुंचे। मंत्री के पहुंचते ही फरियादियों की भीड़ लग गई। इलाहाबाद विश्वविद्यालय की एक शोध छात्रा ने मंत्री को शिकायतों का मोटा पुलिंदा दिया। गोपीगंज (भदोही) की रहने वाली छात्रा ने मंत्री के समक्ष अपने गाइड प्रोफेसर पर गंभीर आरोप लगाया। कहा कि वह पिछले चार वर्ष से उसका मानसिक उत्पीड़न कर रहे हैं। इतना लंबा समय बीतने के बाद अब तक थीसिस पर भी कोई काम शुरू नहीं कराया गया है। बताया कि वीसी से दो बार शिकायत करने पर भी कोई सुनवाई नहीं हुई। मजबूरन उसे पीएम के संसदीय दफ्तर पर आना पड़ा।
विज्ञापन