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वाराणसी: भ्रष्टाचार में लिप्त पेशकार, लेखपाल और कानूनगो की बर्खास्तगी भी होगी,शासन को भेजी जाएगी रिपोर्ट,पढ़ें

Tue, 17 Oct 2023 12:23 PM IST
किरन रौतेला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: किरन रौतेला Updated Tue, 17 Oct 2023 12:23 PM IST
सार

टाउनशिप योजना के लिए अधिसूचित दाऊदपुर में यूनिटेक की जमीन के आराजी नंबर 81 के रकबा 0.535 हेक्टेयर के सीमांकन का प्रार्थना पत्र बलिया निवासी कमलदेव सिंह यादव ने 28 सितंबर 2022 को पॉवर ऑफ अटार्नी के जरिये दिया था। 30 दिसंबर 2022 को राजस्व निरीक्षक ने फील्ड बुक बनाया।

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Professionals, accountants and lawyers involved in corruption will also be dismissed, report will be sent
टाउनशिप - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

यूनिटेक की जमीन पर बलिया के कमलदेव सिंह यादव का नाम दर्ज कराने के मामले में निलंबित पेशकार हेमंत कुमार संत, तत्कालीन लेखपाल लक्ष्मण गिरी और कानूनगो महेंद्र सिंह की बर्खास्तगी की सिफारिश शासन से की जाएगी। अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व वंदिता श्रीवास्तव की रिपोर्ट के साथ पूरे प्रकरण की रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। साथ ही एसडीएम शैलेंद्र कुमार मिश्र के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी।

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टाउनशिप योजना के लिए अधिसूचित दाऊदपुर में यूनिटेक की जमीन के आराजी नंबर 81 के रकबा 0.535 हेक्टेयर के सीमांकन का प्रार्थना पत्र बलिया निवासी कमलदेव सिंह यादव ने 28 सितंबर 2022 को पॉवर ऑफ अटार्नी के जरिये दिया था। 30 दिसंबर 2022 को राजस्व निरीक्षक ने फील्ड बुक बनाया। एक सप्ताह बाद फील्ड बुक को तत्कालीन एसडीएम के सामने रखा गया। 12 जनवरी को पक्षकारों को नोटिस देने के बाद एसडीएम न्यायालय में 16 मार्च को पत्रावली सुरक्षित रख ली। इसी बीच राजातालाब तहसील में तैनात एसडीएम गिरीश द्विवेदी का तबादला गैर जनपद हो गया। वर्तमान एसडीएम शैलेंद्र मिश्र ने आठ सितंबर 2023 को फील्ड बुक को पुष्ट कर दिया। यहां बता दें कि पिछले दिनों मुख्य सचिव ने यूनिटेक की जमीनों की नीलामी प्रक्रिया के लिए कहा था। राजातालाब एसडीएम शैलेंद्र मिश्र ने बिना किसी आदेश और उच्चाधिकारियों को संज्ञान में लाए ही इस अधिसूचित जमीन के एक हिस्से पर बलिया निवासी कमलदेव सिंह यादव का नाम दर्ज कर दिया था।

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रद्द हुआ एसडीएम का आदेश, पूरे पत्रावली की होगी जांच

तत्कालीन एसडीएम शैलेंद्र कुमार मिश्र के 8 सितंबर 2023 को फील्ड बुक की पुष्टि के आदेश को निरस्त कर दिया गया है। पूरी पत्रावली की जांच भी कराई जा रही है। इन सभी के कार्यकाल में कराए गए कार्याें की भी जांच होगी।

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एसडीएम शैलेंद्र कुमार मिश्र का तबादला आदेश - फोटो : फाइल फोटो

डीएम के आदेश पर आधे घंटे में हुआ अमल

जिलाधिकारी के अनुमोदन पर एडीएम वित्त एवं राजस्व ने एसडीएम शैलेंद्र कुमार मिश्र का तबादला आदेश जारी किया। एसडीएम अपने चेंबर में थे और उन्हें इसकी भनक तक नहीं थी। दोपहर में अचानक तबादला आदेश के साथ ही नवनियुक्त एसडीएम राजेश कुमार वर्मा भी वहां पहुंच गए। आदेश जारी करने और नए एसडीएम के चार्ज की प्रक्रिया पर आधे घंटे में ही अमल हुआ।

चपरासी पर भी आरोप, डीएम कार्यालय से संबद्ध

किसानों की शिकायत पर एसडीएम के चपरासी पर भी एडीएम वित्त एवं राजस्व ने कार्रवाई की है। कोरोता निवासी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को जिलाधिकारी कार्यालय से संबद्ध किया गया है। इस पर एसडीएम के कामकाज में लेनदेन का आरोप है।

पूरे प्रकरण में एसडीएम से स्पष्टीकरण मांगा गया है। पेशकार, लेखपाल और कानूनगो के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। पूरे प्रकरण की जानकारी शासन को दी जाएगी। जीरो टॉलरेंस नीति के खिलाफ काम करने वालों से सख्ती से निपटा जाएगा। - एस राजलिंगम, जिलाधिकारी

 

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यूनिटेक - फोटो : social media

फर्जी पॉवर अटॉर्नी से 252 एकड़ पर स्वयंभू मालिक बन गया था कमलदेव

बलिया निवासी कमलदेव सिंह यादव ने तहसील कर्मचारियों की मिलीभगत से किसान और यूनिटेक के विवाद में फंसी 252 एकड़ जमीन पर फर्जी पॉवर ऑफ अटॉर्नी के जरिये स्वयंभू मालिक बनने की तैयारी कर ली थी। पॉवर ऑफ अटॉर्नी हवाला देकर उसने पेशकार, लेखपाल और कानूनगो के जरिये 0.535 हेक्टेयर (करीब ढाई बीघा) जमीन का फील्ड बुक तैयार कराया था। इसी फील्ड बुक को एसडीएम की मदद से पुष्ट भी करा लिया था। करीब 10 करोड़ की जमीन पर नाम चढ़वाने के बाद वह अरबों रुपये की जमीन पर कब्जा जमाने की फिराक में था।

दरअसल, वर्ष 2005 में शहर के विस्तारीकरण के योजना के तहत यूनिटेक के साथ पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत सरकार ने टाउनशिप की योजना बनाई थी। उस वक्त कंपनी के अधिकृत अजय मुखर्जी और किसानों के बीच जमीन खरीदने का करार हुआ। वर्ष 2009 में कंपनी ने अजय मुखर्जी को निकाल दिया। इसके बाद वर्ष 2022 में गाजियाबाद से बलिया निवासी कमलदेव सिंह यादव ने फर्जी पॉवर ऑफ अटार्नी पंजीकृत करा लिया। इसकी जानकारी होने पर यूनिटेक के खिलाफ लड़ाई लड़ रही किसान सेवा संरक्षण समिति ने अजय मुखर्जी और कमलदेव सिंह के खिलाफ रोहनिया थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। इसके बाद अजय मुखर्जी और कमलदेव सिंह ने जुलाई 2022 में पॉवर ऑफ अटार्नी निरस्त करा ली और उसी दिन दूसरे पते पर पॉवर ऑफ अटार्नी करा ली थी।

पांच रकबा का आवेदन, एक की पुष्टि, विपक्ष को सुना ही नहीं

बलिया निवासी कमलदेव सिंह यादव ने तहसील में पांच रकबे के सीमांकन का आवेदन किया था। इसमें आराजी नंबर 73 रकबा 1.621 हेक्टेयर, आराजी नंबर 74 रकबा 0.123 हेक्टेयर, आराजी 76 रकबा 0.049, आराजी 79 रकबा 0.089 और आराजी 81 रकबा 0.535 के सीमांकन का आवेदन किया। इसमें प्रभावित काश्तकारों को 12 जनवरी 2023, 14 जनवरी 2023 और 16 जनवरी 2023 को अलग अलग माध्यम से नोटिस का भी जिक्र किया गया। मगर, दूसरा पक्ष एसडीएम के न्यायालय में हाजिर नहीं हुआ। 16 मार्च 2023 को एकपक्षीय कार्रवाई करते हुए फील्डबुक को सत्यापित कर दिया गया। दरअसल, इसमें नोटिस भेजने में खेल हुआ और दूसरे पक्ष तक सूचना नहीं गई। इसी आड़ में पूरी कार्रवाई को एक पक्षीय करार देते हुए एक आराजी 81 को पुष्ट किया गया। इसी आधार पर बाकी जमीनों पर ऐसी कार्रवाई की जाती।

जमीन हमारी या कंपनी की यह फैसला न्यायालय करेगा- समिति

किसान सेवा संरक्षण समिति के अध्यक्ष दिनेश नारायण सिंह ने तहसील में हुए भ्रष्टाचार का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि इस प्रकरण की सुनवाई न्यायालय में विचाराधीन है। इसमें वर्ष 2005 में दाऊदपुर में प्रदेश सरकार ने वर्ष 2009 में हाईटेक टाउनशिप पालिसी के तहत पीपीपी मॉडल पर ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट लांच किया। इसके तहत यूनिटेक कंपनी ने 1500 एकड़ जमीन पर परियोजना को धरातल पर उतारने का प्रस्ताव सरकार को दिया। साथ ही कंपनी ने 252 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री भी करा ली थी। मगर, इसमें किसानों के साथ हुए समझौते में यह तय हुआ था कि इस योजना के फेल होने पर कंपनी जिम्मेदार होगी। ऐसे में जब योजना आई ही नहीं तो जमीन पर किसानों का अधिकार है। हम न्यायालय के जरिये अपना अधिकार प्राप्त करने की लड़ाई लड़ रहे हैं।

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