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किसानों पर लाठीचार्ज के बाद प्रियंका का फूटा गुस्सा, बोलीं- किसान विरोध भरा पड़ा है सरकार में

Mon, 02 Mar 2020 02:37 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Mon, 02 Mar 2020 02:37 PM IST
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Priyanka gandhi tweet on Lathicharge on farmers harvest for takeover in mirzapur
प्रियंका गांधी (फाइल फोटो) - फोटो : Social Media

मिर्जापुर जिले में डेडिकेट फ्रेट कारिडोर का काम करा रही ठेका कंपनी द्वारा खड़ी गेहूं की फसल को रौंदे जाने का विरोध करना कुंडाडीह जादवपुर गांव के किसानों को महंगा पड़ गया। सैकड़ों किसान मौके पर पहुंच कर इसका विरोध करने लगे। उनकी सुनवाई न होने पर खेतों में दौड़ रही जेसीबी व पोकलैंड के सामने लेटकर विरोध दर्ज कराने लगे। पुलिस ने किसानों को हटाने की कोशिश की। न मानने पर पुलिस ने किसानों पर लाठीचार्ज कर दिया। अब इस मामले पर प्रियंका गांधी वाड्रा ने ट्विटर पर ट्वीट कर सरकार पर हमला बोला है।

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उन्होंने ट्विटर पर ट्वीट किया, मिर्जापुर के किसानों ने मेहनत से अपनी फसल लगाई थी और भाजपा सरकार की पुलिस ने खड़ी फसल रौंद दी। कल मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री ने किसानों के लिए खूब झूठे ऐलान किए और 24 घंटे भी नहीं बीते कि महिला किसानों के साथ सरकार का व्यवहार देखिए। किसान विरोध भरा है भाजपा के अंदर।
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लाठीचार्ज में तीन महिला समेत छह किसान घायल हो गए। घायलों का अस्पताल में उपचार कराया गया। इसमें एक को ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया गया। कुंडाडीह व जादवपुर गांव के किसानों की काफी जमीन रेलवे चौड़ी करण के लिए अधिग्रहीत हुई है। इसमें बहुत से किसानों को मुआवजा प्राप्त हो चुका हैं। कई किसानों को मुआवजा अभी तक नहीं मिल पाया है।

Priyanka gandhi tweet on Lathicharge on farmers harvest for takeover in mirzapur
किसानों पर किया गया लाठी चार्ज। - फोटो : अमर उजाला।

किसानों की मांग थी कि उनकी खड़ी फसल को न रौंदा जाए। जमीन की नापी व गेहूं की फसल कटने के बाद ही निर्माण कार्य कराया जाए। किसानों ने इस संबंध में उपजिलाधिकारी चुनार से लगातार मांग की थी लेकिन प्रशासन ने किसानों की एक भी न सुनी।

रविवार को जैसे ही प्रशासन ने किसानों की खड़ी फसलों को जेसीबी व पोकलैंड से रौंदना शुरू किया। गांव की किसान व महिलाएं जेसीबी व पोकलैंड के सामने आ कर लेट गए। खून पसीने से सींची गई फसलों को बचाने की किसान गुहार लगाते रहे, लेकिन प्रशासन ने अपनी पर अड़ा रहा।

महिलाओं और पुलिस में नोंकझोंक होने के बाद उपजिलाधिकारी चुनार जंग बहादुर यादव व सीओ चुनार हितेंद्र कृष्ण, थाना प्रभारी निरीक्षक अदलहाट प्रमोद कुमार यादव, थाना जमालपुर, थाना अहरौरा सहित एक प्लाटून पीएसी व भारी संख्या में पुलिस बल व महिला पुलिस किसानों पर टूट पड़ीं। इसमें 35 वर्षीय धर्मेद्र सिंह, 45 वर्षीय राजनाथ, 62 वर्षीय सुक्खी, 60 वर्षीय मुन्नी, 45 वर्षीय पत्ती देवी, 50 वर्षीय बदामी देवी घायल हो गए। जिनको स्थानीय चिकित्सालय में भर्ती कराया गया।

धर्मेंद्र की हाथ टूटने और गंभीर चोट लगे होने के कारण उसे ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया गया। कई और किसानों को हल्की फुल्की चोटें आईं। किसानों के विरोध के बाद भी फसलों को रौंदते हुए बिना मापी कराए कार्यदायी संस्था का कार्य चलता रहा।

पंचायत में हुआ था फैसला तो फिर क्यों चली फसल पर जेसीबी
कार्यदायी संस्था जमीन का अधिग्रहण करना चाहती थी, पर किसान फसल लगा चुके थे। किसानों ने बताया कि इस मामले को लेकर एसडीएम के साथ पूर्व किसान पंचायत में किसानों की वार्ता कर निर्णय लिया गया था कि फसल कटने और नापी होने के बाद अधिग्रहण किया जाएगा। पंचायत में निर्णय होने के बाद आखिर प्रशासन को क्या जल्दी थी कि आनन-फानन में जेसीबी लेकर किसानों के खेतों में खड़ी फसल को बर्बाद करने पहुंच गए।

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