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वाराणसीः हड़ताल पर निजी डॉक्टर, सरकारी अस्पतालों में मरीजों का बढ़ा दबाव

Tue, 02 Jan 2018 09:46 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Updated Tue, 02 Jan 2018 09:46 PM IST
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Private doctor on strike in varanasi
ओपीडी बंद होने से परेशान दिखे मरीज - फोटो : अमर उजाला
लोकसभा में पेश नेशनल मेडिकल कमीशन गठन के बिल के विरोध में वाराणसी के निजी डॉक्टर मंगलवार को हड़ताल पर रहे। केंद्र सरकार मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया को भंग कर नेशनल मेडिकल कमीशन के गठन के लिए बिल ला रही है। इससे खफा डॉक्टरों ने ओपीडी ठप कर दी।
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इस दौरान इमरजेंसी सेवाओं पर तो कोई असर नहीं दिखा लेकिन मरीजों और तीमारदारों की सांसत रही। लोकसभा में इस बिल पर पुनर्विचार का फैसला आने के बाद दोपहर ढाई बजे हड़ताल वापस ले ली।
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आईएमए के आह्वान पर सुबह छह बजे से शुरू हड़ताल की वजह से दूरदराज से इलाज के लिए आए मरीजों को मुसीबत झेलनी पड़ी। वहीं पूर्वांचल में निजी डाक्टरों की हड़ताल का मिलाजुला असर देखने को ‌मिला।
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उधर बीएचयू अस्पताल, मंडलीय अस्पताल, दीनदयाल सहित अन्य सरकारी अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों का दबाव अधिक रहा। हालांकि दोपहर में लोकसभा में मामले को स्टैंडिंग कमेटी में पुनर्विचार के लिए भेजे जाने के फैसले के बाद दोपहर ढाई बजे हड़ताल वापस हो गई।

उधर आईएमए पदाधिकारियों ने बिल को अव्यवहारिक होने के साथ ही जनविरोधी करार दिया है। नए सिरे से मेडिकल कमीशन के गठन के बारे में बिल प्रस्तुत करने का विरोध पिछले कई दिनों से चल रहा है।

सोमवार को इसे संसद में प्रस्तुत करने का निर्णय लिया गया, इसके बाद आईएमए राष्ट्रीय नेतृत्व ने सुबह छह से शाम छह बजे तक निजी अस्पतालों की ओपीडी ठप रखकर विरोध का फैसला लिया है।

इस वजह से मंगलवार को ओपीडी बंद होने से मरीजों का दबाव सरकारी अस्पतालों में दिखा। यहां अन्य दिनों की भांति मंगलवार को 15 से 20 प्रतिशत मरीज अधिक पहुंचे।

कुछ जगहों पर नहीं दिखा असर

Private doctor on strike in varanasi
जौनपुर में जिला अस्पताल में डाक्टर को दिखाने के लिए लाइन में खड़े मरीज - फोटो : अमर उजाला
कमीशन बिल के विरोध में आईएमए ने भले ही आह्वान किया हो लेकिन उसका खास असर नहीं दिखा। मंगलवार को भिखारीपुर, सुंदरपुर, लंका, वरुणापार सहित कई अस्पतालों में सामान्य दिनों की तरह ओपीडी में भीड़ लगी रही।

यहां रिसेप्शन पर बैठने वाले कर्मचारियों के साथ ही अन्य कर्मचारियों को भी हड़ताल के बारे में जानकारी नहीं थी, यहां रोजाना की तरह मरीज देखे जा रहे थे। आईएमए पदाधिकारियों ने सरकार द्वारा इस नए कमीशन के बिल को अव्यवहारिक, अलोकतांत्रिक और जनविरोधी बताया है।

लहुराबीर स्थित कार्यालय में प्रेसवार्ता में अध्यक्ष डॉ. अरविंद सिंह, सचिव डॉ. मनीषा सिंह, यूपी नर्सिंगहोम एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. अजीत सैगल, निर्वाचित अध्यक्ष डॉ. भानुशंकर पांडेय, जनसंपर्क सचिव डॉ. अमित सिंह ने इसका पुरजोर विरोध किया।

कहा कि बिल में प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों को मैनेजमेंट सीट पर प्रवेश 15 से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने का अधिकार हो या एमबीबीएस की परीक्षा पास करने के बाद भी एक परीक्षा देने, गैर चिकित्सकीय कर्मचारियों को कमीशन में प्रतिनिधित्व देने आदि से न केवल स्वास्थ्य सेवाओं पर इसका असर पड़ेगा बल्कि आमजन को नुकसान भी होगा।

बिल को राजनीति से प्रेरित बताते हुए पदाधिकारियों ने सरकार से इस पर चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े विद्वानों के साथ चर्चा कर अस्तित्व में लाने की सलाह दी। 
​मंडलीय अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. बीएन श्रीवास्तव ने बताया कि मरीजों की संख्या बढ़ने की वजह से किसी तरह की कोई परेशानी नहीं हुई, सभी का बेहतर इलाज हुआ। 
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