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Premchand Jayanti: कथा सम्राट की जन्मस्थली बनारस के लमही में लगा मेला, जीवंत हुए मैकू, मोती और घीसू

Sun, 31 Jul 2022 06:41 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Sun, 31 Jul 2022 06:41 PM IST
सार

कथा जगत के यशस्वी सम्राट मुंशी प्रेमचंद की 142वीं जयंती धूमधाम से मनाई गई। रामलीला स्थल पर प्रेमचंद की लेखनी से निकली कालजयी रचनाओं के पात्र एक-एक कर मंच पर उतरते चले गए।

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Premchand Jayanti 2022 in Lamhi of varanasi birthplace Maikoo Moti and Ghisu came alive
प्रेमचंद जयंती पर लमही में आयोजन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर जन्मस्थली बनारस के लमही गांव में मेला लगा। 142वीं जयंती के अवसर पर हर किसी ने लमही के नवाब राय को प्रेम से नमन किया। नवाब राय से मुंशी प्रेमचंद की जीवन यात्रा को स्मरण करते हुए उनके साहित्य संघर्ष को प्रणाम किया। कोरोना संक्रमण काल के दो साल बाद फिर से कथा सम्राट की लेखनी सजीव हो उठी।

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लमही के रामलीला मैदान पर मैकू और घीसू की बदहाली, ठाकुर की ज्यादती ने अतीत को वर्तमान के सामने जीवंत किया। एक तरफ लमही ने अपना जन्मदिन मनाया तो दूसरी तरफ अपने लाल की जयंती का पुण्य स्मरण भी किया। शाम को हर किसी ने लमही को अपने प्रेम के प्रतीक दीपों से सजाया।
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प्रवेश द्वार से लेकर रामलीला मैदान तक दीप से दीप जल उठे। मुंशी के मकान और स्मारक भी दीपमालिकाओं से जगमगा उठे। रविवार को कथा जगत के यशस्वी सम्राट मुंशी प्रेमचंद की 142वीं जयंती धूमधाम से मनाई गई। रामलीला स्थल पर प्रेमचंद की लेखनी से निकली कालजयी रचनाओं के पात्र एक-एक कर मंच पर उतरते चले गए।

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विषम हालात से जूझती निर्मला, डॉ. चड्ढा का अहंकार, जोखू, हरिया की दीनता, बिसुआ, भगत की संवेदनशीलता ने हर किसी के अंतर्मन को झकझोर कर रख दिया।  देश ही नहीं दुनिया भर में मुंशी प्रेमचंद ही शायद अकेले साहित्यकार होंगे जिनकी जयंती पर उनके गांव में मेला सजता है। 

कठपुतली नृत्य में दिखा मुंशी प्रेमचंद का जीवन दर्शन 
मुंशी प्रेमचंद जयंती पर रविवार को डीएवीपीजी कॉलेज के छात्रों ने उनके गांव लमही का शैक्षणिक भ्रमण किया। इस दौरान जहां ग्रामीणों के साथ ही मुंशी प्रेमचंद के जीवनी पर चर्चा की वहीं कठपुतली नृत्य के माध्यम से भी उनका जीवन दर्शन देखने को मिला।  

हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार राम के नेतृत्व में छात्रों ने सबसे पहले प्रेमचंद के घर और गांव का भ्रमण कर गांव के लोगों से ही प्रेमचंद के बारे में जानकारी हासिल की। डॉ. राकेश कुमार राम ने कहा कि प्रेमचंद को याद करना आज के दौर में सामाजिक  विषमता और आर्थिक संकट से जूझ रहे मध्यवर्ग के संघर्ष को याद करना है। 

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