Premchand Jayanti: कथा, कहानी और नाटकों से मुंशी प्रेमचंद ने स्थापित किया नया आयाम
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, हिंदी विभाग, महामना मदन मोहन मालवीय पत्रकारिता संस्थान और क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र, संस्कृति विभाग की ओर से समिति कक्ष, केंद्रीय पुस्तकालय सभागार में प्रेमचंद अध्यापक और पत्रकार विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी हुई।
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काशी विद्यापीठ हिंदी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. सुरेंद्र प्रताप ने कहा कि पत्रकारिता नई पीढ़ी के लिए एक चुनौती है, आज प्रेमचंद के युग की पत्रकारिता नहीं रही, वर्तमान में पत्रकारिता के कई आयाम हैं। हमें समरस समाज को गढ़ने की जरूरत है। कथा, कहानी और नाटकों से प्रेमचंद ने नया आयाम स्थापित किया है।
शनिवार को वह महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, हिंदी विभाग, महामना मदन मोहन मालवीय पत्रकारिता संस्थान और क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र, संस्कृति विभाग की ओर से समिति कक्ष, केंद्रीय पुस्तकालय सभागार में प्रेमचंद अध्यापक और पत्रकार विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन सत्र की अध्यक्षता कर रहे थे।
मुख्य अतिथि हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. गजेंद्र पाठक ने कहा कि कठिन होना आसान है, लेकिन सरल होना बहुत कठिन है। आकाशवाणी के केंद्रीय निदेशक राजेश गौतम ने कहा कि प्रेमचंद विद्यापीठ में अध्यापक रहे। विशिष्ट वक्ता डॉ. वंदना मिश्रा ने कहा कि टूटे-फूटे शब्द महाकाव्य से भी बड़े होते हैं।
प्रेमचंद ने अपने साहित्य में मानव मन को बहुत सूक्ष्म तरीके से समाहित किया है। प्रेमचंद विरोध का समर्थन करते हैं। इस दौरान छात्र-छात्राओं ने अपने शोध पत्र पढ़े। संचालन रविनंदन सिंह और धन्यवाद ज्ञापन केपी गौडर ने किया। इस दौरान अंकित कुमार सिंह, डॉ. प्रीति, प्रो. निरंजन सहाय, प्रो. अनुराग कुमार, डॉ. रामाश्रय, डॉ. रविन्द्र पाठक, डॉ. प्रीति और शिवशंकर यादव मौजूद रहे।