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लमही के लाल की जयंती पर चिंतन, मनन और नमन
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वाराणसी। कथासम्राट मुंशी प्रेमचंद की 140 जयंती पर महोत्सव तो नहीं हुआ, लेकिन लमही की लोगों ने अपने लाल को नमन किया। मुंशी जीके स्मारक पर सादगी और सोशल डिस्टेंसिंग के साथ पुष्प अर्पित किया गया। वहीं ग्रामीणों ने केक काटकर जयंती मनाई तो संस्थाओं ने वर्चुअल नमन किया। शुक्रवार को संस्कृति विभाग की ओर से क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र प्रभारी यशवंत सिंह राठौर, प्रो. श्रद्धानंद, दुर्गा श्रीवास्तव, सलीम राजा तथा विविध संस्थाओं के प्रतिनिधि लमही पहुंचे। पांडेयपुर चौराहा एवं लहुराबीर चौराहा पर स्थापित प्रेमचंद की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण किया गया। इस दौरान लोगों से कोरोना संक्रमण से बचने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क का इस्तेमाल और सैनिटाइजेशन का ध्यान रखने की अपील भी की गई।
चार सौ ने किया प्रतिभाग : जयंती पर क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र एवं जिला प्रशासन की ओर से हुए ऑनलाइन आयोजन में चार सौ प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
आम आदमी के मन से जुड़ने वाले साहित्यकार थे प्रेमचंद
वाराणसी। मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर श्री अग्रसेन कन्या पीजी कॉलेज के हिन्दी विभाग द्वारा हमारे समय में प्रेमचंद विषयक वेबिनार हुआ। प्रबंधक अनिल कुमार जैन ने कहा कि मुंशी जी आम आदमी के मन से जुड़ने वाले साहित्यकार थे। प्राचार्या डॉ. कुमकुम मालवीय ने कहा कि मुंशी जी के उपन्यास अपने युग का दस्तावेज हैं। बीएचयू के प्रो. सदानंद शाही और डॉ. रामसुधार सिंह ने कहा कि प्रेमचंद को समझने के लिए उनके लेख और पत्रों को भी पढना होगा। संचालन डॉ. अर्चना सिंह तथा डॉ. आरती सिंह ने किया। संयोजन प्रियंका अग्रवाल ने किया।
हर घर में हैं बड़े भाई साहब और बूढ़ी काकी
वाराणसी। भारत विकास परिषद ओजस्वी शाखा की ओर से जयंती पर ऑनलाइन वेबिनार हुआ। जिसमें मुख्य वक्ता साहित्यकार डॉ. नीरजा माधव ने कहा कि प्रेमचंद के पात्र आज भी हमारे बीच हैं। आज के संदर्भ में घर-घर मे बड़े भाई साहब, नमक का दरोगा और बूढ़ी काकी समाज में मौजूद हैं।
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अंतरराष्ट्रीय हिंदी शिक्षण संस्थान आगरा के विभागध्यक्ष प्रो. उमापति दीक्षित और भारत विकास परिषद ओजस्वी के अध्यक्ष विजय त्रिपाठी ने कहा कि आज भी उनके उपन्यास और कहानियां पाठकों के मध्य अत्यंत लोकप्रिय हैं। इस अवसर पर प्रतिमा सिन्हा, डॉ. शरद कुमार, सौरभ पाठक, अशोक अग्रवाल, अवनीश अग्रवाल, अंजू त्रिपाठी, जमुना शुक्ला, अशोक सोनकर आदि मौजूद रहे।
चित्रकला प्रतियोगिता में रामविनय प्रथम
महापंडित राहुल सांकृत्यायन शोध एवं अध्ययन केंद्र की ओर से ऑनलाइन चित्रकला प्रतियोगिता हुई। कथा सम्राट के उपन्यास नमक के दारोगा पर आधारित प्रतियोगिता में विजेता प्रतिभागियों को ई प्रमाणपत्र दिए गए। प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार बीएचयू के रामविनय चौहान, द्वितीय पुरस्कार प्रसन्न पटेल और तृतीय स्थान पर श्रेया सिंह रहीं। सांत्वना पुरस्कार रितिका रॉय और दीपक को दिया गया।
अनंत काल तक पढ़े जाने वाले लेखक हैं मुंशी जी
बीएचयू स्थित अंबेडकर चेयर की ओर से अंतरराष्ट्रीय प्रेमचंद विमर्श आयोजित हुआ। संगोष्ठी का प्रारंभ प्रख्यात लेखक अजय मिश्रा को श्रद्धांजलि के साथ हुआ। कलाकार गोविंद नामदेव द्वारा अजय मिश्र और प्रोफ़ेसर मंजीत चतुर्वेदी की नाट्य और उपन्यास रचना तर्पण ताम-ढकोसला का विमोचन किया गया। प्रो. मंजीत द्वारा मुंशी प्रेमचंद की रचनाओं, कफन और मंत्र पर आधारित नाटक के संग्रह का भी विमोचन भी हुआ। विद्यापीठ के पूर्व कुलपति पृथ्वीश नाग, प्रो. सदानंद शाही, प्रो. आनंद वर्धन शर्मा आदि ने मुंशी जी को एक अनंत काल तक पढ़े जाने वाला लेखक बताया। इस दौरान विद्वानों ने प्रेमचंद की रचनाओं को लेकर एक मुहिम चलाने पर सहमति जताई। संचालन डॉ. संजीव सर्राफ ने किया।
डिजिटल मंच पर कहानियों का मंचन
वाराणसी। कामायनी वाराणसी की ओर से जयंती पर कलाकारों ने डिजिटल मंच पर मुंशी जी को श्रद्धांजलि दी। कलाकारों ने प्रेमचंद की साहित्यिक रचनाओं को कहानीकार बनकर अभिनय के रूप में प्रस्तुत किया। कलाकार उमेश भाटिया ने बड़े भाई साहब का मंचन किया। कार्यक्रम में संस्था के निर्देशक डॉ.दीपक कुमार, वीना सहाय, इला पांडेय, श्रवन्ति मुखर्जी, साकेत चटर्जी, प्रमोद प्रमिल, अमन श्रीवास्तव, अमलेश श्रीवास्तव आदि कलाकारों ने परफॉरमेंस की और विचार रखे।
व्यापारियों ने मुंशी प्रेमचंद को अर्पित किए श्रद्धा के फूल
वाराणसी। मुंशी प्रेमचंद के जयंती पर महानगर उद्योग व्यापार समिति युवा के पदाधिकारियों ने श्रद्धा सुमन अर्पित किये। शुक्रवार को संस्था के अध्यक्ष मनीष चौबे के नेतृत्व में व्यापारियों का दल लमही पहुंचा। उनके स्मारक स्थल व मूर्ति पर माल्यार्पण कर श्रद्धा सुमन अर्पित किए। इस दौरान प्रेमचंद स्मारक के अध्यक्ष सुरेश चंद दुबे, सुजीत गुप्ता ,हृदय गुप्ता राजीव यादव ,शिव शंकर विश्वकर्मा, मोहित गुप्ता, शिवम पांडेय, उदयलाल इत्यादि लोग उपस्थित रहे।
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चार सौ ने किया प्रतिभाग : जयंती पर क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र एवं जिला प्रशासन की ओर से हुए ऑनलाइन आयोजन में चार सौ प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
आम आदमी के मन से जुड़ने वाले साहित्यकार थे प्रेमचंद
वाराणसी। मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर श्री अग्रसेन कन्या पीजी कॉलेज के हिन्दी विभाग द्वारा हमारे समय में प्रेमचंद विषयक वेबिनार हुआ। प्रबंधक अनिल कुमार जैन ने कहा कि मुंशी जी आम आदमी के मन से जुड़ने वाले साहित्यकार थे। प्राचार्या डॉ. कुमकुम मालवीय ने कहा कि मुंशी जी के उपन्यास अपने युग का दस्तावेज हैं। बीएचयू के प्रो. सदानंद शाही और डॉ. रामसुधार सिंह ने कहा कि प्रेमचंद को समझने के लिए उनके लेख और पत्रों को भी पढना होगा। संचालन डॉ. अर्चना सिंह तथा डॉ. आरती सिंह ने किया। संयोजन प्रियंका अग्रवाल ने किया।
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हर घर में हैं बड़े भाई साहब और बूढ़ी काकी
वाराणसी। भारत विकास परिषद ओजस्वी शाखा की ओर से जयंती पर ऑनलाइन वेबिनार हुआ। जिसमें मुख्य वक्ता साहित्यकार डॉ. नीरजा माधव ने कहा कि प्रेमचंद के पात्र आज भी हमारे बीच हैं। आज के संदर्भ में घर-घर मे बड़े भाई साहब, नमक का दरोगा और बूढ़ी काकी समाज में मौजूद हैं।
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अंतरराष्ट्रीय हिंदी शिक्षण संस्थान आगरा के विभागध्यक्ष प्रो. उमापति दीक्षित और भारत विकास परिषद ओजस्वी के अध्यक्ष विजय त्रिपाठी ने कहा कि आज भी उनके उपन्यास और कहानियां पाठकों के मध्य अत्यंत लोकप्रिय हैं। इस अवसर पर प्रतिमा सिन्हा, डॉ. शरद कुमार, सौरभ पाठक, अशोक अग्रवाल, अवनीश अग्रवाल, अंजू त्रिपाठी, जमुना शुक्ला, अशोक सोनकर आदि मौजूद रहे।
चित्रकला प्रतियोगिता में रामविनय प्रथम
महापंडित राहुल सांकृत्यायन शोध एवं अध्ययन केंद्र की ओर से ऑनलाइन चित्रकला प्रतियोगिता हुई। कथा सम्राट के उपन्यास नमक के दारोगा पर आधारित प्रतियोगिता में विजेता प्रतिभागियों को ई प्रमाणपत्र दिए गए। प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार बीएचयू के रामविनय चौहान, द्वितीय पुरस्कार प्रसन्न पटेल और तृतीय स्थान पर श्रेया सिंह रहीं। सांत्वना पुरस्कार रितिका रॉय और दीपक को दिया गया।
अनंत काल तक पढ़े जाने वाले लेखक हैं मुंशी जी
बीएचयू स्थित अंबेडकर चेयर की ओर से अंतरराष्ट्रीय प्रेमचंद विमर्श आयोजित हुआ। संगोष्ठी का प्रारंभ प्रख्यात लेखक अजय मिश्रा को श्रद्धांजलि के साथ हुआ। कलाकार गोविंद नामदेव द्वारा अजय मिश्र और प्रोफ़ेसर मंजीत चतुर्वेदी की नाट्य और उपन्यास रचना तर्पण ताम-ढकोसला का विमोचन किया गया। प्रो. मंजीत द्वारा मुंशी प्रेमचंद की रचनाओं, कफन और मंत्र पर आधारित नाटक के संग्रह का भी विमोचन भी हुआ। विद्यापीठ के पूर्व कुलपति पृथ्वीश नाग, प्रो. सदानंद शाही, प्रो. आनंद वर्धन शर्मा आदि ने मुंशी जी को एक अनंत काल तक पढ़े जाने वाला लेखक बताया। इस दौरान विद्वानों ने प्रेमचंद की रचनाओं को लेकर एक मुहिम चलाने पर सहमति जताई। संचालन डॉ. संजीव सर्राफ ने किया।
डिजिटल मंच पर कहानियों का मंचन
वाराणसी। कामायनी वाराणसी की ओर से जयंती पर कलाकारों ने डिजिटल मंच पर मुंशी जी को श्रद्धांजलि दी। कलाकारों ने प्रेमचंद की साहित्यिक रचनाओं को कहानीकार बनकर अभिनय के रूप में प्रस्तुत किया। कलाकार उमेश भाटिया ने बड़े भाई साहब का मंचन किया। कार्यक्रम में संस्था के निर्देशक डॉ.दीपक कुमार, वीना सहाय, इला पांडेय, श्रवन्ति मुखर्जी, साकेत चटर्जी, प्रमोद प्रमिल, अमन श्रीवास्तव, अमलेश श्रीवास्तव आदि कलाकारों ने परफॉरमेंस की और विचार रखे।
व्यापारियों ने मुंशी प्रेमचंद को अर्पित किए श्रद्धा के फूल
वाराणसी। मुंशी प्रेमचंद के जयंती पर महानगर उद्योग व्यापार समिति युवा के पदाधिकारियों ने श्रद्धा सुमन अर्पित किये। शुक्रवार को संस्था के अध्यक्ष मनीष चौबे के नेतृत्व में व्यापारियों का दल लमही पहुंचा। उनके स्मारक स्थल व मूर्ति पर माल्यार्पण कर श्रद्धा सुमन अर्पित किए। इस दौरान प्रेमचंद स्मारक के अध्यक्ष सुरेश चंद दुबे, सुजीत गुप्ता ,हृदय गुप्ता राजीव यादव ,शिव शंकर विश्वकर्मा, मोहित गुप्ता, शिवम पांडेय, उदयलाल इत्यादि लोग उपस्थित रहे।