यूपी: प्रधानमंत्री मुद्रा लोन को बनाया ठगी का जरिया, 300 से अधिक खाते खुलवाए; पूर्व बैंककर्मी समेत दो गिरफ्तार
पुलिस ने सरकारी योजनाओं का झांसा देकर 300 से अधिक बैंक खाते खुलवाने वाले पूर्व बैंककर्मी समेत दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी इन खातों को म्यूल अकाउंट के रूप में इस्तेमाल कर साइबर ठगी की रकम मंगाते थे। जांच में नेटवर्क तीन राज्यों तक फैला मिला है। चार खातों के खिलाफ 18 साइबर शिकायतें दर्ज हैं।
विस्तार
गरीब ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं और प्रधानमंत्री मुद्रा लोन का लाभ दिलाने का झांसा देकर बैंक खाते खुलवाने और उनमें साइबर ठगी की रकम मंगाने वाले गिरोह के दो सदस्यों को धानापुर पुलिस और साइबर टीम ने गिरफ्तार किया है। इनमें एक आरोपी रोहित कुमार उर्फ काला पूर्व में एक्सिस बैंक में कर्मचारी रह चुका है। पुलिस के अनुसार, उसने अपने कार्यकाल के दौरान 300 से अधिक बैंक खाते खुलवाए थे। इन खातों में से करीब 300 खातों की साइबर अपराध में संलिप्तता की जांच की जा रही है।
पुलिस के मुताबिक, गिरोह का नेटवर्क आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और ओडिशा तक फैला होने के साक्ष्य मिले हैं। फिलहाल चार संदिग्ध म्यूल बैंक खातों के प्रारंभिक विश्लेषण में इनके खिलाफ राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर 18 अंतरराज्यीय साइबर फ्रॉड की शिकायतें मिली हैं। इनमें करीब 2.50 लाख रुपये की ठगी की शिकायत दर्ज है। गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से दो मोबाइल, कूटरचित आधार कार्ड, एक एटीएम कार्ड और एक चेकबुक बरामद हुई है।
पुलिस ने आरोपियों को शनिवार को ओदरा मार्ग से करीब 12:20 बजे मुखबिर की सूचना पर गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान धीना थाना क्षेत्र के पसाई गांव निवासी आशीष विश्वकर्मा (22) और बलुआ थाना क्षेत्र के सेवढ़ी मड़ई गांव निवासी रोहित कुमार उर्फ काला (31) के रूप में हुई है।
सरकारी योजनाओं का झांसा देकर खुलवाते थे खाते
पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि आरोपी ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर गरीब लोगों को प्रधानमंत्री मुद्रा लोन और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देते थे। इसके लिए जीरो बैलेंस पर बैंक खाते खुलवाए जाते थे। खाता खुलने के बाद खाताधारकों से एटीएम कार्ड, पासबुक और ओटीपी का एक्सेस हासिल कर लिया जाता था। इसके बाद खातों की जानकारी गिरोह के अन्य सदस्यों को भेज दी जाती थी।
आरोपियों के अनुसार, मुंबई में बैठे सहयोगी फर्जी लोन वेबसाइट और भ्रामक विज्ञापनों के माध्यम से लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। साइबर ठगी से हासिल रकम इन्हीं बैंक खातों में मंगाई जाती थी। बाद में एटीएम कार्ड के माध्यम से रकम निकालकर गिरोह के सदस्य आपस में बांट लेते थे।
300 खातों की जांच से खुल सकता है बड़ा नेटवर्क
पुलिस के अनुसार, रोहित कुमार पूर्व में एक्सिस बैंक सकलडीहा में कर्मचारी था। उसने अपने कार्यकाल में करीब 300 बैंक खाते खुलवाए थे। बैंक में संदिग्ध गतिविधियां सामने आने के बाद उसे नौकरी से निकाल दिया गया था। पुलिस का दावा है कि बैंकिंग प्रक्रिया की जानकारी का इस्तेमाल उसने साइबर अपराध के लिए किया और अपने साथियों को भी खातों के इस्तेमाल का तरीका बताया।
वर्तमान में पुलिस ने चार बैंक खातों का प्रारंभिक विश्लेषण पूरा किया है। इन खातों के खिलाफ एनसीआरपी पर 18 साइबर फ्रॉड शिकायतें मिली हैं। पुलिस अब रोहित द्वारा पूर्व में खुलवाए गए करीब 300 अन्य खातों की जांच कर रही है। इन खातों में हुए लेनदेन और साइबर अपराध से उनके संबंधों की पड़ताल की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
कूटरचित आधार पर बदलते थे पहचान
पुलिस के मुताबिक, गिरोह के सदस्य साइबर ठगी की रकम मंगाने के लिए दूसरे लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल करते थे। जांच से बचने के लिए आरोपी फर्जी आधार कार्ड का भी इस्तेमाल करते थे। पूछताछ में आशीष ने कथित तौर पर बताया कि उसने अन्य लोगों के नाम-पते वाले कूटरचित आधार कार्ड पर अपनी फोटो लगाकर इस्तेमाल किया था।
पीड़ितों के खातों से लाखों के संदिग्ध लेनदेन का खुलासा
इस मामले की जांच की शुरुआत 22 फरवरी 2026 को साइबर क्राइम थाना चंदौली में मिली शिकायत से हुई थी। असना गांव निवासी एहतशामुद्दीन और उनके साथियों ने आरोप लगाया था कि जनवरी 2024 में गांव के कालीन कारखाने में एक्सिस बैंक के कर्मचारी रोहित कुमार और उसके साथी रावण उर्फ शुभम ने विभिन्न सुविधाओं का लालच देकर उनके जीरो बैलेंस खाते खुलवाए थे।
शिकायत के अनुसार, खाता खुलने के बाद पासबुक दे दी गई, लेकिन एटीएम कार्ड देने के बहाने ओटीपी हासिल कर लिया गया और एटीएम कार्ड नहीं दिया गया। बाद में खाताधारकों के ई-मेल पर बैंक खातों में भारी लेनदेन के संदेश आने लगे। बैंक जाकर जानकारी करने पर खातों से उनकी जानकारी और सहमति के बिना लाखों रुपये के संदिग्ध लेनदेन का पता चला।
इस मामले में साइबर क्राइम थाना चंदौली में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की गई। वित्तीय लेनदेन और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच में म्यूल खातों के जरिए साइबर ठगी की रकम के लेनदेन का मामला सामने आया।