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लचर सिस्टम, ऐसे कैसे संभलेगा जन सैलाब

Thu, 03 Nov 2016 01:56 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी Updated Thu, 03 Nov 2016 01:56 AM IST
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Poor system, such as how Snblega Jnsailab
बुधवार को बांसफाटक में लगे जाम में घंटों फंसे रहे लोग। अतिक्रमण इसका सबसे बड़ा कारण है।
यातायात माह में अगले एक पखवारे तक ट्रैफिक पुलिस के लिए शहर का ट्रैफिक मैनेजमेंट बड़ी चुनौती होगा। दरअसल, आगामी छह और सात अक्तूबर को डाला छठ है। इसके मद्देनजर सामने घाट से लेकर राजघाट तक गंगा किनारे लाखों श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ेगा। वहीं, इसके एक हफ्ते बाद 14 अक्तूबर को देव दीपावली पर देश-विदेश से भी भारी संख्या में सैलानी और श्रद्धालु शहर आएंगे। मगर, इन बड़े आयोजनों के मद्देनजर यातायात पुलिस के पास कार्ययोजना का अभाव तो है ही, संसाधनों की भी कमी है।
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 बीते 15 अक्तूबर को राजघाट पुल पर जय गुरुदेव जन जागरण यात्रा के दौरान भगदड़ में 25 लोगों की मौत और दर्जनों लोगों के घायल होने की एक बड़ी वजह ट्रैफिक मैनेजमेंट का अभाव था। पुलिस और प्रशासन के ही अधिकारियों का मानना है कि यदि समय रहते मुकम्मल व्यवस्थाएं की गई होती तो पुल पर भीड़ न एकत्र होने पाती और 25 लोगों की जान न जाती। वहीं, मौजूदा समय में ट्रैफिक पुलिस के पास उपलब्ध स्वीकृत कांस्टेबल के 200 पद के स्थान पर 150 की ही तैनाती है। शहर की जनसंख्या और ट्रैफिक के दबाव को देखते हुए 500 कांस्टेबल की आवश्यकता है। इसी तरह 75 हेड कांस्टेबल चाहिए लेकिन तैनाती सिर्फ 36 की है।
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ट्रैफिक सब इंस्पेक्टर जिले भर में मात्र छह हैं जबकि 25 चाहिए। ट्रैफिक इंस्पेक्टर तीन के बजाय एक ही है। इसके साथ ही ट्रैफिक पुलिस को पांच से अधिक क्रेन चाहिए लेकिन दो हैं। बैरियर, अस्थायी डिवाइडर इत्यादि एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाने के लिए ट्रैफिक पुलिस के पास ट्रक तक की व्यवस्था नहीं है। हालांकि ट्रैफिक पुलिस के पास 415 होमगार्ड और सौ से ज्यादा यातायात मित्र हैं। मगर, चौराहों पर मौजूद रहकर यातायात व्यवस्था संभालने ने वाले होमगार्डों और यातायात मित्रों की बातों पर राहगीर ध्यान नहीं देते हैं और ट्रैफिक नियमों को धता बताते हुए निकल जाते हैं।
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ट्रैफिक व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए नगर निगम ने भी फिर सक्रिय हुआ है। स्मार्ट शहरों की सूची में काशी के शामिल होने के बाद वाराणसी स्मार्ट सिटी लिमिटेड कंपनी का गठन कर लिया गया है। इसी के तहत ट्रैफिक व्यवस्था को भी ठीक किया जाएगा। नगर आयुक्त श्रीहरि प्रताप शाही ने बताया कि नवंबर के दूसरे सप्ताह में कंपनी की बैठक होगी।



यातायात माह के मद्देनजर चलाए जा रहे अभियान के दौरान बुधवार को बिना परमिट के शहर में चल रहे 63 डग्गामार वाहनों को सीज कर ट्रैफिक पुलिस लाइन में खड़ा कराया गया। इस दौरान 74 हजार रुपये शमन शुल्क के तौर पर वसूला गया। उधर, 18 साल से कम उम्र के बाइक चला रहे 12 किशोरों को कैंट, शिवपुर, भेलूपुर, लक्सा और कोतवाली थाने की पुलिस ने रोका। सभी के अभिभावकों को पुलिस ने मौके पर बुलाकर गंभीरता बरतने की चेतावनी दी।
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