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काशी की आबोहवा में फिर से बढ़ा प्रदूषण

Mon, 05 Dec 2016 08:28 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी Updated Mon, 05 Dec 2016 08:28 PM IST
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pollution level increase in varanasi
काशी में नहीं हो रहे प्रदूषण रोकने के प्रयास - फोटो : अमर उजाला

बाबा विश्वनाथ की नगरी वाराणसी में प्रदूषण का मानक स्तर चिंताजनक स्थिति में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी शहर में वायु प्रदूषण का स्तर कम होने का नाम नहीं हो रहा है। दिवाली के बाद तो यह खतरनाक स्तर पर पहुंच गया था। बीच में स्थिति कुछ सुधरी लेकिन अब पीएम-10 और पीएम-2.5 का घनत्व बढ़ने लगा है। प्रदूषण रोकने में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड विफल रहा है। प्रदूषण विभाग की ओर से कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

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यहां के विभागीय अधिकारी ऊपर तक केवल पत्राचार तक ही सीमित हैं। प्रदूषण को रोकने के मद्देनजर एडीएम की अध्यक्षता में टास्क फोर्स गठित की जानी है। दस दिनों में टास्क फोर्स अपना काम करेगी।

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शहर की आबोहवा में जहर घुल रहा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक रविवार की शाम शहर में प्रदूषण का स्तर पीएम 10 -230, पीएम 2.5 -349 प्रति घन मीटर था। इसे 50 से 100 के बीच होना चाहिए। गाड़ियों से निकलने वाली जहरीली गैस हवा में जम जाती है और हवा रुकी हुई है जिसकी वजह से इस बार पिछले तीन-चार दिन से पड़ रही धुंध और प्रदूषण दोनों एक दूसरे में घुल मिल गए हैं। ऐसे में प्रदूषण फैलाने में मुख्य रूप से वाहनों से निकलने वाला धुआं, भवन निर्माण कार्य से निकलने वाली धूल, भी शहर की हवा को जहरीली करने में अपना पूरा योगदान दे रही है।इस प्रदूषण से सांस, फेफड़ों की बीमारी हो सकती है।

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दिवाली के बाद हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित

दिवाली के बाद शहर की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित थी। दिवाली की अगली सुबह शहर के 13 विभिन्न स्थानों पर प्रदूषक तत्वों की जांच कराई गई। इसमें पीएम 10 और पीएम 2.5 अनुमन्य मानकों की तुलना में 15 से 20 गुना पाए गए। सोनारपुरा चौराहे पर पीएम 2.5 कण 990, पीएम 10 कण 687.9 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर पाया गया था। लंका पर क्रमश: 432.6 और 482, गोदौलिया चौराहे पर 541.5 और 720.1 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर पाया गया। प्रदूषण विभाग ने शासन और प्रशासन को पत्र लिखकर रोकथाम में मदद करने को कहा था। पटाखे पर प्रतिबंध के साथ पुरानी डीजल गाड़ियों पर भी रोक लगाने की बात थी। अब तक इस पर कोई निर्णय नहीं हो सका।

 

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