सांसों पर संकट: पांच बड़े कारण, जिनके चलते बनारस बना देश का तीसरा सबसे प्रदूषित शहर
वाराणसी में प्रदूषण के कारण हवा जहरीली होती जा रही है। गुरुवार को देश भर के टॉप-10 प्रदूषित शहरों की सूची में दिल्ली जहां दूसरे नंबर पर है वहीं बनारस का स्थान तीसरा रहा।
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बनारस में पिछले तीन दिनों से हवा की गुणवत्ता बेहद खराब बनी हुई है। हालत यह है कि प्रदूषण के मामले में बनारस छठवें नंबर से तीसरे नंबर पर पहुंच गया। हवा में धूल, धुआं और कार्बन कणों की मात्रा के कारण दिल्ली के बाद बनारस देश का सर्वाधिक प्रदूषित शहर बन गया।
देश भर के टॉप-10 प्रदूषित शहरों की सूची में दिल्ली जहां दूसरे नंबर पर है वहीं बनारस का स्थान तीसरा है। आईक्यूएयर के अनुसार पहले नंबर पर नानपारा है जिसका एक्यूआई 414 दर्ज किया गया जबकि दिल्ली का एक्यूआई 376 और बनारस का एक्यूआई 339 रहा।
प्रदूषण का स्तर बेहद खराब
14 दिसंबर को एक्यूआई रहा 376 जबकि 15 दिसंबर को एक्यूआई 353 था। वहीं केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार शहर का एक्यूआई सिर्फ 163 था। गुरुवार को बनारस में प्रदूषण का स्तर बेहद खराब दर्ज किया गया। पिछले तीन दिनों से लगातार बनारस रेड जोन में बना हुआ है लेकिन सरकारी आंकड़ों में इसको येलो जोन में दर्शाया जा रहा है।
वायु प्रदूषण की पांच बड़ी वजहें
- - विभिन्न योजनाओं के तहत सड़क की लगातार हो रही खोदाई
- - सीवर लाइन के लिए चल रहा काम
- - निर्माणाधीन इमारतें और रिंग रोड से उड़ने वाली धूल
- - बिना स्ट्रक्चर ढके हो रहा निर्माण और इससे धूल के कण हवा में ज्यादा फैलते हैं।
- - कई जगहों पर कूड़ा डंप होना और कूड़े में आग लगाने के कारण
- - आठ लाख से ज्यादा वाहन हैं शहर में, इनसे लगने वाला जाम भी प्रदूषण का बड़ा कारण।
बनारस के बाद जौनपुर का नंबर
आईक्यूएयर की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार गुरुवार बनारस 339 एक्यूआई के साथ देश का तीसरा सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा जबकि जौनपुर 333 एक्यूआई के साथ चौथे नंबर पर था। वाराणसी शहर के इलाकों में साकेत नगर 425 एक्यूआई के साथ सबसे अधिक प्रदूषित, इसके बाद लंका का एक्यूआई 361, बलभद्र कॉलोनी का 339, रामनगर का 312, नाटी इमली रोड का एक्यूआई 296 दर्ज किया गया। सड़क पर उड़ रही धूल और जगह-जगह जलाए जा रहे कूड़े व ठंड के कारण हवा में प्रदूषक तत्वों की मात्रा बढ़ी है।
प्रदूषण कम करने को ये उपाय हैं जरूरी
बीएचयू के मौसम वैज्ञानिक प्रो. एसएन पांडेय के अनुसार, सड़कों की खोदाई के बाद मरम्मत का काम जल्द से जल्द करें। गहरी खोदाई के दौरान पानी जरूर डालें। जो एजेंसी सड़क खोदने का काम कर रही हैं, वह प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड, प्रशासन और शासन को रिपोर्ट सौंपे। पेड़ों को काट कर मल्टी स्टोरीज बिल्डिंग बनाई जा रही हैं और वह भी बिना ढंके। कोई भी कंस्ट्रक्शन ढंक कर होना चाहिए और पेड़ भी लगने चाहिए। ट्रैफिक के लिए मास्टर प्लान बनाएं और सही डायवर्जन पर काम करें।
ऐसे समझें पॉल्यूशन मीटर
वायु पॉल्यूशन माइक्रोग्राम परक्यूबिक मीटर में मापा जाता है। पीए 2.5 का मतलब सांस के साथ अंदर जाने वाले पार्टिकल और 2.5 माइक्रोंस से छोटे पार्टिकल से है। एयर पॉल्यूशन को मापने में पीएम 2.5 कंसंट्रेशन सबसे अच्छा सूचक माना जाता है।