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ड्रोन कैमरों से शहर की निगहबानी, रूफ टॉप फोर्स रहेगी तैनात
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अयोध्या विवाद के फैसले के मद्देनजर शहर की निगहबानी तीन ड्रोन कैमरों से की जाएगी। माहौल की निगरानी के लिए चौराहों पर लगाए गए और पहले से लगे सीसी कैमरों की मदद भी ली जाएगी। बहुमंजिला इमारतों की छतों पर रूफ टॉप फोर्स तैनात रहेगी। इसके साथ ही मिश्रित आबादी वाले इलाकों में स्थित पानी की टंकियों का उपयोग वॉच टावर के तौर पर किया जाएगा। ऐसी व्यवस्था की जाएगी कि सारे पब्लिक एड्रेस सिस्टम से एकसाथ संदेश प्रसारित किया जा सके। इस बीच लोगोें में शांति और कानून व्यवस्था के प्रति भरोसा बनाए रखने के लिए सुरक्षा बलों का रूट मार्च और शांति समितियों की बैठकों का सिलसिला बुधवार को भी जारी रहा।
अयोध्या प्रकरण पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद शहर की फिजा में पहले की तरह ही गंगा-जमुनी तहजीब झलकती रहे, इसके लिए प्रशासन हरसंभव उपाय कर रहा है। एसएसपी प्रभाकर चौधरी ने बुधवार को बताया कि पुलिस की ओर से सूचनाओं के संकलन में अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। जो लोग गड़बड़ी कर सकते हैं उन्हें चिह्नित कर पाबंद कर दिया गया है। रोजाना जिले के सभी थाना क्षेत्रों में लोगोें के साथ बैठक कर उनसे सहयोग करने की अपील की जा रही है। सोशल मीडिया पर यदि कोई अफवाह फैलाएगा या दुष्प्रचार करेगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई में देरी नहीं की जाएगी।
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दंगा नियंत्रण का प्रशिक्षण जारी, साफ किए जा रहे शस्त्र
पुलिस लाइन में लगातार दूसरे दिन भी दंगा नियंत्रण उपकरणों का प्रशिक्षण जारी रहा। देहात क्षेत्र के नौ थानों के एक-एक दरोगा और 45 सिपाहियों को दंगा नियंत्रण उपकरणों के उपयोग के बारे में बताया गया। प्रशिक्षण के बाद कहा गया कि वह अपने थाने के अन्य पुलिसकर्मियों को इस संबंध में प्रशिक्षित करेंगे। इस बीच सभी थानों में रायफल सहित अन्य अस्त्रों की साफ सफाई कर उन्हें दुरुस्त किया जा रहा है।
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अफवाह फैलाने वालों की जानकारी सोशल मीडिया सेल को दें
एसएसपी ने कहा कि जानकारी में आया है कि कुछ लोग व्हाट्स एप सहित सोशल मीडिया के अन्य प्लेटफार्म पर अयोध्या विवाद के फैसले को लेकर भ्रामक सूचनाएं और अफवाह फैला रहे हैं। ऐसा करने वाले कानूनी कार्रवाई की जद में आएंगे। आमजन से अपील है कि अफवाहें फैलाने वालों के संबंध में सोशल मीडिया सेल के मोबाइल नंबर 7839857011 पर दें। सूचना देने वाले का नाम और पता गुप्त रखा जाएगा।
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मिश्रित आबादी वाले इलाकों पर खुफिया एजेंसियों की नजर
अयोध्या विवाद के फैसले के मद्देनजर मिश्रित आबादी वाले इलाकों पर स्थानीय अभिसूचना इकाई और आईबी की नजर है। इसके अलावा आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) अपने स्तर से अलग से निगहबानी कर रहा है। अधिकारियों के अनुसार ऐसे इलाकों में रहने वाले सभी लोगों की गतिविधियों पर खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों की नजर है। रोजाना की रिपोर्ट शासन स्तर के अधिकारियों को भेज कर सुरक्षा संबंधी आगे की रणनीति तैयार की जा रही हैं।
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अयोध्या प्रकरण पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद शहर की फिजा में पहले की तरह ही गंगा-जमुनी तहजीब झलकती रहे, इसके लिए प्रशासन हरसंभव उपाय कर रहा है। एसएसपी प्रभाकर चौधरी ने बुधवार को बताया कि पुलिस की ओर से सूचनाओं के संकलन में अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। जो लोग गड़बड़ी कर सकते हैं उन्हें चिह्नित कर पाबंद कर दिया गया है। रोजाना जिले के सभी थाना क्षेत्रों में लोगोें के साथ बैठक कर उनसे सहयोग करने की अपील की जा रही है। सोशल मीडिया पर यदि कोई अफवाह फैलाएगा या दुष्प्रचार करेगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई में देरी नहीं की जाएगी।
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दंगा नियंत्रण का प्रशिक्षण जारी, साफ किए जा रहे शस्त्र
पुलिस लाइन में लगातार दूसरे दिन भी दंगा नियंत्रण उपकरणों का प्रशिक्षण जारी रहा। देहात क्षेत्र के नौ थानों के एक-एक दरोगा और 45 सिपाहियों को दंगा नियंत्रण उपकरणों के उपयोग के बारे में बताया गया। प्रशिक्षण के बाद कहा गया कि वह अपने थाने के अन्य पुलिसकर्मियों को इस संबंध में प्रशिक्षित करेंगे। इस बीच सभी थानों में रायफल सहित अन्य अस्त्रों की साफ सफाई कर उन्हें दुरुस्त किया जा रहा है।
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अफवाह फैलाने वालों की जानकारी सोशल मीडिया सेल को दें
एसएसपी ने कहा कि जानकारी में आया है कि कुछ लोग व्हाट्स एप सहित सोशल मीडिया के अन्य प्लेटफार्म पर अयोध्या विवाद के फैसले को लेकर भ्रामक सूचनाएं और अफवाह फैला रहे हैं। ऐसा करने वाले कानूनी कार्रवाई की जद में आएंगे। आमजन से अपील है कि अफवाहें फैलाने वालों के संबंध में सोशल मीडिया सेल के मोबाइल नंबर 7839857011 पर दें। सूचना देने वाले का नाम और पता गुप्त रखा जाएगा।
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मिश्रित आबादी वाले इलाकों पर खुफिया एजेंसियों की नजर
अयोध्या विवाद के फैसले के मद्देनजर मिश्रित आबादी वाले इलाकों पर स्थानीय अभिसूचना इकाई और आईबी की नजर है। इसके अलावा आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) अपने स्तर से अलग से निगहबानी कर रहा है। अधिकारियों के अनुसार ऐसे इलाकों में रहने वाले सभी लोगों की गतिविधियों पर खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों की नजर है। रोजाना की रिपोर्ट शासन स्तर के अधिकारियों को भेज कर सुरक्षा संबंधी आगे की रणनीति तैयार की जा रही हैं।