Varanasi: अविमुक्तेश्वरानंद को ज्ञानवापी की परिक्रमा से रोका, पुलिस बोली- नई परंपरा नहीं शुरू होने दी जाएगी
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की ओर से घोषणा की गई है कि विश्वनाथ मंदिर (ज्ञानवापी) की परिक्रमा करेंगे। इसे लेकर पुलिस प्रशासन सतर्क है। आश्रम के बाहर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को रोका गया है।
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ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को सोमवार को केदार घाट स्थित श्री विद्या मठ से ज्ञानवापी जाने से पुलिस ने रोक दिया। धक्का-मुक्की और नोकझोंक के बीच पुलिस ने ज्ञानवापी की परिक्रमा या दर्शन-पूजन का कोई प्रावधान न होने और कमिश्नरेट में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा-144 लागू होने का हवाला देकर उन्हें श्री विद्या मठ से बाहर नहीं निकलने दिया।
इसे लेकर अविमुक्तेक्तश्वरानंद और उनके अनुयायियों ने खासी नाराजगी जताई, लेकिन पुलिस ने किसी की एक न सुनी। इस बीच केदार घाट से सोनारपुरा, मदनपुरा, जंगमबाड़ी, गोदौलिया होते हुए श्री काशी विश्वनाथ धाम के गेट नंबर-4 तक चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात रही। इसके साथ ही लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (एलआईयू) के कर्मी भी माहौल की टोह लेते रहे।
अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की ओर से रविवार को ऐलान किया गया था कि वह सोमवार को अपराह्न तीन बजे मूल विश्वनाथ (ज्ञानवापी परिसर) की परिक्रमा करेंगे। इस सूचना के आधार पर एसीपी दशाश्वमेध अवधेश कुमार पांडेय और एसीपी भेलूपुर डॉ. अतुल अंजान त्रिपाठी सोमवार की सुबह श्री विद्या मठ पहुंचे, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।
पुलिस अफसरों के अनुसार वह लगभग 11 बजे फिर मठ गए, तब भी उनसे संपर्क नहीं हो सका। इसके साथ श्री विद्या मठ के चौतरफा, केदार घाट और सोनारपुरा से गोदौलिया मार्ग पर पुलिस तैनात कर दी गई। दोपहर 2:30 बजे के बाद पुलिस अफसर फोर्स के साथ मठ के सामने पहुंचे।
अपने अनुयायियों के साथ अविमुक्तेश्वरानंद मठ के पिछले गेट से बाहर निकलने जा रहे थे, तभी उन्हें पुलिस अफसरों ने बताया कि ज्ञानवापी की परिक्रमा करने जैसी नई परंपरा की शुरुआत नहीं होने दी जाएगी। कमिश्नरेट में धारा-144 लागू है और कोई इजाजत नहीं ली गई है। ज्ञानवापी का मसला संवदेनशील है, इसलिए भी वहां नहीं जाने दिया जाएगा।
शांतिपूर्ण तरीके से श्री काशी विश्वनाथ के दर्शन-पूजन करने में किसी को कोई आपत्ति नहीं है। पुलिस से काफी धक्का-मुक्की और नोकझोंक के बाद भी वे श्री विद्या मठ के बाहर नहीं निकल सके। एहतियातन श्री विद्या मठ और उसके आसपास के इलाके में पुलिस तैनात की गई है।
नमाज पर रोक नहीं तो हमें क्यों रोक रहे
अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि उन्हें श्री विद्या मठ में पुलिस ने नजरबंद कर रखा है। ज्ञानवापी में जब नमाज पर रोक नहीं है तो वहां हमारे आराध्य देव शिव के बावजूद परिक्रमा से क्यों रोका जा रहा है। परिक्रमा की हमारी परंपरा बहुत पुरानी है। उन्होंने कहा कि के सिर्फ दो लोगों के साथ मूल विश्वनाथ की परिक्रमा करना चाहते हैं, इसके बावजूद पुलिस जबरदस्ती कर रही है। हमने डेढ़ साल से भगवान के राग-भोग, शृंगार के लिए मुकदमा दाखिल कर रखा है, लेकिन अदालत से सिर्फ तारीख मिल रही है। एक पक्ष कह रहा है कि वहां शिवलिंग है। दूसरा पक्ष कह रहा है वहां शिवलिंग नहीं है। ऐसे में अदालत कोई ऐसी अंतरिम व्यवस्था बनाए, जिससे मुकदमा चलने तक दोनों पक्ष अपनी श्रद्धा अनुसार पूजापाठ कर सकें।
2022 में 108 घंटे बाद तोड़ा था अनशन
ज्ञानवापी में दर्शन-पूजन की मांग को लेकर अविमुक्तेश्वरानंद वर्ष 2022 में भी मुखर हुए थे। वे चार जून 2022 की सुबह 8:30 बजे श्री विद्या मठ से ज्ञानवापी में दर्शन-पूजन को निकले थे। पुलिस ने उन्हें विद्या मठ में ही रोक दिया था। इससे क्षुब्ध होकर उन्होंने अन्न-जल त्याग दिया था। ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के तत्कालीन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के निर्देश पर 108 घंटे बाद आठ जून 2022 को उन्होंने आदि विश्वेश्वर की पादुकाओं का प्रतीक पूजन कर अनशन खत्म किया था।