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Varanasi News: बीएचयू में कवि सुभाष राय को मिला शुकदेव सिंह स्मृति सम्मान
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वाराणसी में शुक्रवार को बीएचयू समाजिक विज्ञान संकाय में आयोजित प्रो शुकदेव सिंह सृमति सम्मा
- फोटो : Archive
वाराणसी। बीएचयू में शुक्रवार को कवि सुभाष राय को शुकदेव सिंह स्मृति सम्मान दिया गया। बीएचयू के प्रो. श्रीप्रकाश शुक्ल, प्रो. सदानंद शाही, आचार्य रामचंद्र शुक्ल की पाैत्री डाॅ. मुक्ता आदि ने सम्मानित किया। सुभाष राय ने बताया कि दक्षिण की कवयित्रियां शिव और विष्णु की उपासना करती हैं। जहां कभी स्त्रियों और शूद्रों को मंदिर जाने के मनाही थी। इस दमन के खिलाफ कोई उनके साथ नहीं आया। तब उन्होंने स्वयं ईश्वर को ढूंढने के लिए गीत गाया। अक्क कहती हैं तुम मुझे प्रेम करते हो और मेरे पास नहीं आना चाहते तो मैं तिलक लगाकर आऊंगी और लड़ मरूंगी।
अंडाल कहती हैं कि तुम मेरे पास क्यों नहीं आते प्रेम नहीं करते तो आकर कहो। ये अधिकार जताने वाली बातें हैं जो उत्तर भारत में नहीं दिखतीं। अंडाल के गीत तमिलनाडु में प्रतिबंधित हैं। बीएचयू के महिला अध्ययन और विकास केंद्र और कबीर विवेक परिवार की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में केंद्र के समन्वयक प्रो. आशीष त्रिपाठी ने सुभाष राय की दो प्रमुख किताबों पर चर्चा करते हुए बताया कि पितृसत्ता और स्त्री रचना को देखने का नजरिया इसमें दिया गया है।
निर्णायक मंडल में प्रो. काशीनाथ सिंह और अशोक वाजपेयी शामिल रहे। अध्यक्षता करते हुए प्रो. अवधेश प्रधान ने कहा भक्ति साहित्य के अध्ययन से हमें पता चलता है कि सांस्कृतिक एकता का निर्माण कविता के माध्यम से हुआ। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. प्रज्ञा पारमिता और संचालन डॉ. किंगसन ने किया।
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अंडाल कहती हैं कि तुम मेरे पास क्यों नहीं आते प्रेम नहीं करते तो आकर कहो। ये अधिकार जताने वाली बातें हैं जो उत्तर भारत में नहीं दिखतीं। अंडाल के गीत तमिलनाडु में प्रतिबंधित हैं। बीएचयू के महिला अध्ययन और विकास केंद्र और कबीर विवेक परिवार की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में केंद्र के समन्वयक प्रो. आशीष त्रिपाठी ने सुभाष राय की दो प्रमुख किताबों पर चर्चा करते हुए बताया कि पितृसत्ता और स्त्री रचना को देखने का नजरिया इसमें दिया गया है।
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निर्णायक मंडल में प्रो. काशीनाथ सिंह और अशोक वाजपेयी शामिल रहे। अध्यक्षता करते हुए प्रो. अवधेश प्रधान ने कहा भक्ति साहित्य के अध्ययन से हमें पता चलता है कि सांस्कृतिक एकता का निर्माण कविता के माध्यम से हुआ। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. प्रज्ञा पारमिता और संचालन डॉ. किंगसन ने किया।
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