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पीएम मोदी का भोजपुरिया अंदाज: लोकार्पण के बाद संबोधन में बोले- ई विश्वनाथ धाम, त बाबा आपन आशीर्वाद से बनईले हऊन

Mon, 13 Dec 2021 10:57 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Mon, 13 Dec 2021 10:57 PM IST
सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक करने के बाद धाम का लोकार्पण किया। इसके बाद उन्होंने लोगों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने हर-हर महादेव के उद्घोष के साथ संबोधन की शुरुआत की। इसके बाद वह भोजपुरी में बोले।

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PM Modi Bhojpuri style in speech after Kashi Vishwanath Dham inaugration in varanasi
पीएम मोदी। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

श्री काशी विश्वनाथ धाम के लोकार्पण के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने काशीवासियों के साथ देश की जनता का दिल अपनी भोजपुरी से जीत लिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि ई विश्वनाथ धाम, त बाबा आपन आशीर्वाद से बनईले हऊन। उनकर इच्छा के बिना, का कोई पत्ता हिल सकेला? कोई कितना बड़ा हव, तो अपने घरै क होइहें। ऊ बोलईय्ये तबे कोई आ सकेला, कुछ कर सकेला। बाबा के साथ अगर किसी और का योगदान है तो वो बाबा के गणों का है। बाबा के गण यानी हमारे सारे काशीवासी, जो खुद महादेव के ही रूप हैं। जब भी बाबा को अपनी शक्ति अनुभव करानी होती है, वो काशीवासियों का माध्यम ही बना देते हैं। फिर काशी करती है और दुनिया देखती है। इदम् शिवाय, इदम् न मम..।

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पीएम ने हर हर महादेव। हर हर महादेव। नम: पार्वती पतये, हर हर महादेव॥  माता अन्नपूर्णा की जय। गंगा मइया की जय के साथ उद्बोधन की शुरूआत की। कहा कि देश के हर कोने से आए हुए पूज्य संत गण, और मेरे प्यारे मेरे काशीवासी और देश-विदेश से इस अवसर के साक्षी बन रहे सभी श्रद्धालु साथीगण, काशी के सभी बंधुओं के साथ, बाबा विश्वनाथ के चरणों में हम शीश नवावत हईं। माता अन्नपूर्णा के चरणन क बार बार बंदन करत हईं।
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अभी मैं बाबा के साथ साथ नगर कोतवाल कालभैरव जी के दर्शन करके ही आ रहा हूं, देशवासियों के लिए उनका आशीर्वाद लेकर आ रहा हूं। काशी में कुछ भी खास हो, कुछ भी नया हो, तो सबसे पहले उनसे पूछना आवश्यक है। मैं काशी के कोतवाल के चरणों में भी प्रणाम करता हूँ। गंगा तरंग रमणीय जटा-कलापम्, गौरी निरंतर विभूषित वाम-भागम्नारायण प्रिय-मनंग-मदाप-हारम्, वाराणसी पुर-पतिम् भज विश्वनाथम्। हम बाबा विश्वनाथ दरबार से, देश दुनिया के उन श्रद्धालु-जनन के प्रणाम करत हईं, जो अपने अपने स्थान से,  इस महायज्ञ के साक्षी बनत हऊअन। हम आप सब काशी वासी लोगन के, प्रणाम करत हईं, जिनके सहयोग से, ई शुभ घड़ी आयल हौ। हृदय गदगद हौ। मन आह्लादित हौ। आप सब लोगन के बहुत बहुत बधाई हौ।

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जहां गंगा अपनी धारा बदलकर बहती हों, उस काशी को भला कौन रोक सकता है
पीएम मोदी ने कहा कि जब मैं बनारस आया था तो एक विश्वास लेकर आया था। विश्वास अपने से ज्यादा बनारस के लोगों पर था, आप पर था। आज हिसाब-किताब का समय नहीं है लेकिन मुझे याद है, तब कुछ ऐसे लोग भी थे जो बनारस के लोगों पर संदेह करते थे। कैसे होगा., होगा ही नहीं., यहां तो ऐसे ही चलता है।

ये मोदी जी जैसे बहुत आके गये। मुझे आश्चर्य होता था कि बनारस के लिए ऐसी धारणाएं बना ली गई थीं। ऐसे तर्क दिये जाने लगे थे। काशीखंड में भगवान शंकर ने खुद कहा है- विना मम प्रसादम् वै, क: काशी प्रति-पद्यतेऽ। अर्थात बिना मेरी प्रसन्नता के काशी में कौन आ सकता है, कौन इसका सेवन कर सकता है? काशी में महादेव की इच्छा के बिना न कोई आता है, और न यहां उनकी इच्छा के बिना कुछ होता है। यहां जो कुछ होता है, महादेव की इच्छा से होता है। ये जो कुछ भी हुआ है, महादेव ने ही किया है।

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