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Varanasi News: हॉस्टल में जाने के तीन साल बाद ही राष्ट्रीय मैच खेला, अंतरराष्ट्रीय के लिए लग गए 11 साल
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ओलंपियन राजकुमार पाल ने गंगापुर में खिलाड़ियों को दिए सफलता के मंत्र, कहा असफलता से डरे नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहनिया। असफलता से डरने की जगह खिलाड़ी को अपने खेल पर ध्यान देकर लगातार अभ्यास करना चाहिए। असफलता सफलता की ही पहली सीढ़ी है। उक्त बातें हॉकी खिलाड़ी और ओलंपियन राजकुमार पाल ने मंगलवार शाम को गंगापुर में सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए कही। राजकुमार ने कहा कि उन्हें खेल छात्रावास जाने के तीन साल बाद ही राष्ट्रीय प्रतियोगिता में खेलने का मौका मिल गया, लेकिन अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता खेलने के लिए 11 साल का लंबा इंतजार करना पड़ा। ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय हाकी टीम के खिलाड़ी ने उभरते हुए खिलाड़ियों को टिप्स भी दिए।
गंगापुर हॉकी एकेडमी के सदस्यों ने स्मृति चिह्न और अंगवस्त्रम देखकर राजकुमार पाल का सम्मान किया। कहा कि जब वो अपने गांव में खेलते थे, तब उन्हें हॉकी के बारे में बहुत कुछ नहीं पता था। लखनऊ के स्पोर्ट्स स्टेडियम पहुंचे, तब खेल की बारीकियां समझ आईं। उन्होंने खिलाड़ियों को अलग-अलग राज्यों की एकेडमी से मैच खेलने की सलाह दी। बताया कि उनके दो बड़े भाई भी हॉकी खिलाड़ी हैं, लेकिन वह राष्ट्रीय टीम का हिस्सा नहीं बन पाए। उनके बीच के भाई राजू पाल राष्ट्रीय शिविर तक पहुंचे थे। इसे उन्होंने चुनौती की तरह लिया और सफल हुए। इस मौके पर गंगापुर हॉकी एकेडमी के मैनेजर रोहित मोदनवाल, सचिव अवधेश मौर्य, चरनदास गुप्ता, अभिषेक यादव मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रोहनिया। असफलता से डरने की जगह खिलाड़ी को अपने खेल पर ध्यान देकर लगातार अभ्यास करना चाहिए। असफलता सफलता की ही पहली सीढ़ी है। उक्त बातें हॉकी खिलाड़ी और ओलंपियन राजकुमार पाल ने मंगलवार शाम को गंगापुर में सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए कही। राजकुमार ने कहा कि उन्हें खेल छात्रावास जाने के तीन साल बाद ही राष्ट्रीय प्रतियोगिता में खेलने का मौका मिल गया, लेकिन अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता खेलने के लिए 11 साल का लंबा इंतजार करना पड़ा। ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय हाकी टीम के खिलाड़ी ने उभरते हुए खिलाड़ियों को टिप्स भी दिए।
गंगापुर हॉकी एकेडमी के सदस्यों ने स्मृति चिह्न और अंगवस्त्रम देखकर राजकुमार पाल का सम्मान किया। कहा कि जब वो अपने गांव में खेलते थे, तब उन्हें हॉकी के बारे में बहुत कुछ नहीं पता था। लखनऊ के स्पोर्ट्स स्टेडियम पहुंचे, तब खेल की बारीकियां समझ आईं। उन्होंने खिलाड़ियों को अलग-अलग राज्यों की एकेडमी से मैच खेलने की सलाह दी। बताया कि उनके दो बड़े भाई भी हॉकी खिलाड़ी हैं, लेकिन वह राष्ट्रीय टीम का हिस्सा नहीं बन पाए। उनके बीच के भाई राजू पाल राष्ट्रीय शिविर तक पहुंचे थे। इसे उन्होंने चुनौती की तरह लिया और सफल हुए। इस मौके पर गंगापुर हॉकी एकेडमी के मैनेजर रोहित मोदनवाल, सचिव अवधेश मौर्य, चरनदास गुप्ता, अभिषेक यादव मौजूद रहे।
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