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वेस्ट मैनेजमेंट: हर ग्राम पंचायत में लगाए जाएंगे 100- 100 बोरे, गांवों को प्लास्टिक मुक्त करने की तैयारी

Wed, 02 Oct 2024 01:41 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Wed, 02 Oct 2024 01:41 PM IST
सार

स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत गांवों को प्लास्टिक मुक्त करने की तैयारी है।इसके तहत वाराणसी में तीन ब्लॉकों में प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट का संचालन जल्द होगा। 

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Plastic waste management units will be operational in three blocks in Varanasi
प्लास्टिक कचरा - फोटो : Istock

विस्तार

स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत वाराणसी के गांवों को प्लास्टिक मुक्त किया जा रहा है। जिले के तीन विकासखंड में प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट का संचालन जल्द शुरू होने वाला है। ग्रामीण क्षेत्रों को प्लास्टिक मुक्त करने के लिए थ्री आर रिड्यूज, रीयूज, रिसाइकिल की विधि अपनाई जाएगी। गांव को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ओन रिसोर्स रेवेन्यू मॉडल पर फोकस किया जा रहा है।

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ग्राम पंचायत से दो से तीन रुपये में प्लास्टिक पिलेट्स कंपनियां खरीदेंगी। पीडब्ल्यूडी,आरईएस और जिला पंचायत की सड़क बनाने के लिए प्लास्टिक बेचे जाएंगे। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण होगा बल्कि ग्राम पंचायतें अपनी आय बढ़ाएंगी। सीडीओ हिमांशु नागपाल ने बताया कि गांव से एकत्र किए गए प्लास्टिक से प्लास्टिक पिलेट्स बनाया जाएगा। इसे प्लास्टिक री-साइकिल करने वाली कंपनी को बेचा जाएगा।

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पीडब्लूएमयू (प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट) के जरिये कार्बन क्रेडिट से भी ग्राम पंचायत की आय होगी। ग्रामीणों की ओर से इस्तेमाल करने वाले प्लास्टिक को रिसाइकिल किया जाएगा। इसके लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत में विभिन्न सार्वजनिक स्थलों पर 100 बोरे लगाए गए हैं।

ग्रामीणों को प्रेरित किया जा रहा है कि प्लास्टिक को इस बोरे में ही डाला जाए। फिर इस प्लास्टिक को तीन विकासखंड पिंडरा ब्लाक के नोहिया, सेवापुरी ब्लाक के भीषमपुर और चिरईगांव के बर्थराकला गांव में लगे पीडब्लूएमयू में ले जाकर रिसाइकल करके प्लास्टिक पिलेट्स बनाया जाएगा। कानपुर की एक कंपनी से इसे उचित दामों पर खरीदने की बात चल रही है। इसके लिए सभी ग्राम पंचायतों से एमओयू भी किया गया है।
 
एक ब्लॉक से एक टन हर महीने प्लास्टिक निकलने की संभावना
एडीपीआरओ राकेश यादव ने बताया कि एक ब्लॉक से लगभग एक टन हर महीने प्लास्टिक निकलने की संभावना है। एक यूनिट से स्वयं सहायता समूह की लगभग पांच से 10 महिलाओं और मशीन संचालन के लिए अन्य लोगों को रोजगार मिलेगा। गांवों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ओन रिसोर्स रेवेन्यू मॉडल पर काम हो रहा है।
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