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असि नदी के किनारे रोपे गए पौधे
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Mon, 06 Jun 2016 02:00 AM IST
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असि नदी के दोनों किनारों पर हरित पट्टी के विकास का काम रविवार को शुरू हो गया। संकट मोचन पुलिया के पास तलहटी में नदी किनारे छायादार और फलदार पौधे रोपे गए। विश्व पर्यावरण दिवस पर यह पहल साझा संस्कृति मंच की ओर से की गई। पौधरोपण के इस कार्यक्रम में दर्जन भर से अधिक संगठनों के कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। यहां लोगों ने असि नदी को पुनर्जीवित कर काशी के पर्यावरण को बचाने का संकल्प लिया गया।
वाराणसी के अस्तित्व से जुड़ी असि नदी नाले में तब्दील हो गई है। वाराणसी की महायोजना-2031 में करीब आठ किमी लंबी नदी के दोनों किनारों पर 25 मीटर तक के दायरे में हरित पट्टी के विकास का प्रस्ताव है लेकिन नदी को कूड़े-कचरे से पाट कर कब्जा करने की होड़ मची है। सिंचाई विभाग और नगर निगम ने तो इसे नाला घोषित कर रखा था। हालांकि नगर निगम ने अब इसे नदी मान लिया है। राजस्व रिकार्ड में अब इसे दुरुस्त किया जा रहा है। मुख्य सचिव आलोक रंजन ने असि के पुनर्जीवन के लिए वरुणा की तर्ज पर योजना बनाने के संकेत दिए हैं।
इस बीच असि नदी की रक्षा के लिए आवाज उठने लगी है। रविवार को असि तट पर हरित पट्टी के विकास के प्रस्ताव के प्रति वीडीए, नगर निगम का ध्यान आकृष्ट कराने के लिए साझा संस्कृति मंच, असि नदी मुक्ति अभियान, देव एक्सेल फाउंडेशन, लक्ष्य संस्था समेत कई संगठनों के कार्यकर्ताओं ने संकट मोचन पुलिया के पास 25 से अधिक पौधे लगाए।
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इसमें नीम, पाकड़, कदंब, बरगद, पीपल, करंज के पौधे शामिल हैं। पौधों की सुरक्षा के लिए ट्री गार्ड भी आपसी सहयोग से तैयार कर लगाए गए।
अभियान में डॉ. आनंद प्रकाश तिवारी, वल्लभाचार्य पांडेय, एकता सिंह, रवि शेखर, विनय सिंह, शिवांग शेखर, अतुल सिंह, धनंजय त्रिपाठी, सतीश सिंह, सूरज पांडेय, कपींद्र तिवारी, पंकज सिंह, चिंतामणि सेठ समेत तमाम लोग शामिल थे।
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वाराणसी के अस्तित्व से जुड़ी असि नदी नाले में तब्दील हो गई है। वाराणसी की महायोजना-2031 में करीब आठ किमी लंबी नदी के दोनों किनारों पर 25 मीटर तक के दायरे में हरित पट्टी के विकास का प्रस्ताव है लेकिन नदी को कूड़े-कचरे से पाट कर कब्जा करने की होड़ मची है। सिंचाई विभाग और नगर निगम ने तो इसे नाला घोषित कर रखा था। हालांकि नगर निगम ने अब इसे नदी मान लिया है। राजस्व रिकार्ड में अब इसे दुरुस्त किया जा रहा है। मुख्य सचिव आलोक रंजन ने असि के पुनर्जीवन के लिए वरुणा की तर्ज पर योजना बनाने के संकेत दिए हैं।
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इस बीच असि नदी की रक्षा के लिए आवाज उठने लगी है। रविवार को असि तट पर हरित पट्टी के विकास के प्रस्ताव के प्रति वीडीए, नगर निगम का ध्यान आकृष्ट कराने के लिए साझा संस्कृति मंच, असि नदी मुक्ति अभियान, देव एक्सेल फाउंडेशन, लक्ष्य संस्था समेत कई संगठनों के कार्यकर्ताओं ने संकट मोचन पुलिया के पास 25 से अधिक पौधे लगाए।
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इसमें नीम, पाकड़, कदंब, बरगद, पीपल, करंज के पौधे शामिल हैं। पौधों की सुरक्षा के लिए ट्री गार्ड भी आपसी सहयोग से तैयार कर लगाए गए।
अभियान में डॉ. आनंद प्रकाश तिवारी, वल्लभाचार्य पांडेय, एकता सिंह, रवि शेखर, विनय सिंह, शिवांग शेखर, अतुल सिंह, धनंजय त्रिपाठी, सतीश सिंह, सूरज पांडेय, कपींद्र तिवारी, पंकज सिंह, चिंतामणि सेठ समेत तमाम लोग शामिल थे।