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वादी पक्ष ने कहा, कोर्ट कमिश्नर पर लगे आरोप झूठे व निराधार

Tue, 10 May 2022 01:45 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 10 May 2022 01:45 AM IST
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Plaintiff's side said, the allegations against the court commissioner are false and baseless
ज्ञानवापी परिसर में सर्वे और वीडियोग्राफी मामले में सोमवार को न्यायालय में सुनवाई के दौरान वादी पक्ष की तरफ से लिखित आपत्ति अधिवक्ताओं सुधीर त्रिपाठी, सुभाष नन्दन चतुर्वेदी, शिवम गौंड, अनुपम द्विवेदी आदि ने दाखिल की। अदालत में इस आपत्ति पर प्रति आपत्ति दाखिल करने के लिए अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के अधिवक्ताओं अभय नाथ यादव, तौफीक खान, एखलाक अहमद, मुमताज अहमद, रईस खान ने समय मांगा। इस पर अदालत ने 10 मई मंगलवार को सुनवाई की तारीख तय कर दी।
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आपत्ति में कहा गया कि अंजुमन इंतजामिया मसाजिद की तरफ से कोई तथ्य कोर्ट कमिश्नर के खिलाफ नहीं दिया गया है। आरोप झूठे व निराधार हैं। ऐसे में अंजुमन इंतजामिया का आवेदन खारिज होने योग्य है। अंजुमन के आवेदन पर यूपी सरकार, डीएम और पुलिस आयुक्त की तरफ से जिला शासकीय अधिवक्ता सिविल महेंद्र प्रसाद पांडेय पहले ही आपत्ति कर चुके है। उनका कहना है कि पहले दिन ढाई घंटे की कमीशन कार्यवाही के बाद अगले दिन भी कार्यवाही तय समय पर शुरू कर दी गई। फिर कमीशन विलंबित करने के लिए कमिश्नर को हटाए जाने का कोई औचित्य नही है।
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नमाज के बाद वहां एक या दो सदस्य ही ही रह सकते हैं
वादिनी गण की तरफ से आवेदन देकर कहा गया कि मस्जिद परिसर में स्पष्ट आदेश के बावजूद कमीशन रोकने के लिए मुस्लिम सदस्य पहले ही परिसर में छिपकर बैठे रहे, जबकि नमाज के बाद वहां एक या दो सदस्य ही ही रह सकते हैं। यह भी कहा गया कि 1990 तक इस परिसर में पूजा चल रही थी और यहां तहखाना पाया गया। इसके बाद जिला प्रशासन ने ताले की चाभी नहीं मिलने की बात की थी। सुनवाई के दौरान अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी पर बाधा डालने और प्रशासन पर कोर्ट के आदेश को लागू कराने में रुचि न लेने का आरोप लगाया गया है। वादिनी गण ने ज्ञानवापी मस्जिद समेत बैरिकेडिंग के अंदर, तहखाना का ताला तोड़कर की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी के साथ दोनों पक्षकारो और उनसे जुड़े वकीलो को प्रवेश देने के लिए यूपी सरकार, डीएम और पुलिस आयुक्त को आदेशित करने की मांग की।
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अधिवक्ता ने की पक्षकार बनने की मांग
सुनवाई के दौरान अधिवक्ता चंद्रशेखर सेठ निवासी कोतवालपुरा दशाश्वमेध ने अधिवक्ता अरुण कुमार त्रिपाठी के जरिये अपने को हिंदू धर्मावलंबी और मां शृंगार गौरी अन्य देव विग्रहों में आस्था जताते हुए कहा देवताओं के इस मुकदमे में वह पक्षकार बनना चाहता है। अदालत ने इस आवेदन पर पक्षकारो से आपत्ति मांगी है।
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