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41 स्थानों पर खुदाई, क्यों न लगे जाम
ब्यूरो/अमर उजाला वाराणसी
Updated Wed, 16 Mar 2016 02:50 AM IST
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जाम का झाम
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शहर में सड़क, बिजली, पानी, सीवर जैसी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकार पैसा तो खर्च कर रही मगर कार्यदायी एजेंसियाें और मनबढ़ ठेकेदारों की मनमानी के चलते तमाम दुश्वारियां भी आ रही हैं। पानी की भूमिगत पाइप लाइन बिछाने के लिए जल निगम ने 37 स्थानों पर सड़कों को खोदा है। इसी तरह, गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई ने सीवर पाइप लाइन डालने के लिए चार स्थानों पर इजाजत ली है। काम तो चल रहा है मगर सुरक्षा मानकों की अनदेखी करके। आपसी समन्वय का भी अभाव है। जिन सड़कों को खोदा गया है, वहां पूरे दिन जाम लगता है। यह समस्या सालों पुरानी है मगर न तो किसी राजनीतिक दल ने इसे मुद्दा बनाया और न ही यह मसला पीआईएल करने वालों को नजर आया। मगर ‘अमर उजाला’ जनता से सीधे सरोकार रखने वाले मसले को केवल इसलिए उठा रहा है ताकि पंगु हो चुकी व्यवस्था को पटरी पर लाया जा सकेे। सड़कों से जुड़ी इस मुहिम में हम शहरियों का दर्द भी पाठकों के सामने रखेंगे।
वाराणसी (ब्यूरो)। शहर की एक भी ऐसी सड़क नहीं जिस पर पैबंद न लगे हों। सीवर, पेयजल, टेलीफोन, इंटरनेट वायर न जाने किन-किन कामों के लिए सड़कों को खोदा जाता है और पैच करने की बजाय उसे पाटकर छोड़ दिया जाता है। कार्यदायी संस्थाओं में आपसी समन्वय न होने के चलते एक ही सड़क को अलग-अलग कार्यों के लिए दोबारा-तीबारा खोदे जाने से मुश्किलें और बढ़ गई हैं। विकास कार्यों के नाम पर सालों से इस शहर में ऐसा ही हो रहा है। मौजूदा समय भी शहर भर में सीवर और पेयजल के लिए 41 स्थानों पर सड़क खोदी गई है। काम शुरू है मगर खत्म कब होगा, पता नहीं। सड़कों पर गड्ढे और धूल से पैदल चलना भी मुश्किल है। जाम भी लग रहा। इतना ही नहीं सरकारी एजेंसियां और उसके मनबढ़ ठेकेदार खुदाई के दौरान जरूरी सुरक्षा मानकों का भी ख्याल नहीं रख रहे हैं।
आम जनता के साथ-साथ विदेशी पर्यटकों को इन्हीं खस्ताहाल सड़कों से गुजरना पड़ रहा है। निर्माण कार्य और खुदाई वाले स्थानों पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही है जबकि टेंडर में सुरक्षा मानकों का उल्लेख किया जाता है। खर्च बचाने के लिए कार्यदायी संस्थाएं सुरक्षा मानकों पर ध्यान नहीं देती हैं। दूसरे बड़े शहरों में जहां निर्माण कार्य और खुदाई होती है। वहां पर सबसे पहले सुरक्षा मानकों का ध्यान रखा जाता है। पूरे कार्यक्षेत्र को टीनशेड और तिरपाल से कवर किया जाता है। निर्माण कार्य के अलग बगल सर्विस रोड बेहतर बनाई जाती है। इसके अलावा खतरनाक काम करने वालों को सुरक्षा उपकरण दिए जाते हैं। गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई, जल निगम, सेतु निगम की ओर से सड़कों पर खुदाई और निर्माण कार्य चल रहा है। प्रशासन ने यह तय किया था कि जिन भी सड़कों पर खुदाई कराई जाएगी, वहां सौ-सौ मीटर के आधार पर काम कराया जाएगा। काम पूरा होने के बाद पहले की सौ मीटर सड़क दुरुस्त कराने के बाद ही आगे की सौ मीटर सड़क खोदी जाएगी। लेकिन, इन नियम-निर्देशों की अनदेखी कर कार्यदायी संस्थाएं काम पूरा होने के महीनों बाद तक भी सड़कें नहीं बनवा रही हैं।
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शहरवासियों का कहना है कि विकास कार्यों के लिए जहां जरूरी हो खुदाई कराई जाए लेकिन नियम-निर्देश और सुरक्षा मानकों का पालन भी सुनिश्चित कराया जाए। निर्धारित समय पर हर हाल में कार्य पूरे हो जाएं और उसके तत्काल बाद सड़क बनवा दी जाए।
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वाराणसी (ब्यूरो)। शहर की एक भी ऐसी सड़क नहीं जिस पर पैबंद न लगे हों। सीवर, पेयजल, टेलीफोन, इंटरनेट वायर न जाने किन-किन कामों के लिए सड़कों को खोदा जाता है और पैच करने की बजाय उसे पाटकर छोड़ दिया जाता है। कार्यदायी संस्थाओं में आपसी समन्वय न होने के चलते एक ही सड़क को अलग-अलग कार्यों के लिए दोबारा-तीबारा खोदे जाने से मुश्किलें और बढ़ गई हैं। विकास कार्यों के नाम पर सालों से इस शहर में ऐसा ही हो रहा है। मौजूदा समय भी शहर भर में सीवर और पेयजल के लिए 41 स्थानों पर सड़क खोदी गई है। काम शुरू है मगर खत्म कब होगा, पता नहीं। सड़कों पर गड्ढे और धूल से पैदल चलना भी मुश्किल है। जाम भी लग रहा। इतना ही नहीं सरकारी एजेंसियां और उसके मनबढ़ ठेकेदार खुदाई के दौरान जरूरी सुरक्षा मानकों का भी ख्याल नहीं रख रहे हैं।
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आम जनता के साथ-साथ विदेशी पर्यटकों को इन्हीं खस्ताहाल सड़कों से गुजरना पड़ रहा है। निर्माण कार्य और खुदाई वाले स्थानों पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही है जबकि टेंडर में सुरक्षा मानकों का उल्लेख किया जाता है। खर्च बचाने के लिए कार्यदायी संस्थाएं सुरक्षा मानकों पर ध्यान नहीं देती हैं। दूसरे बड़े शहरों में जहां निर्माण कार्य और खुदाई होती है। वहां पर सबसे पहले सुरक्षा मानकों का ध्यान रखा जाता है। पूरे कार्यक्षेत्र को टीनशेड और तिरपाल से कवर किया जाता है। निर्माण कार्य के अलग बगल सर्विस रोड बेहतर बनाई जाती है। इसके अलावा खतरनाक काम करने वालों को सुरक्षा उपकरण दिए जाते हैं। गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई, जल निगम, सेतु निगम की ओर से सड़कों पर खुदाई और निर्माण कार्य चल रहा है। प्रशासन ने यह तय किया था कि जिन भी सड़कों पर खुदाई कराई जाएगी, वहां सौ-सौ मीटर के आधार पर काम कराया जाएगा। काम पूरा होने के बाद पहले की सौ मीटर सड़क दुरुस्त कराने के बाद ही आगे की सौ मीटर सड़क खोदी जाएगी। लेकिन, इन नियम-निर्देशों की अनदेखी कर कार्यदायी संस्थाएं काम पूरा होने के महीनों बाद तक भी सड़कें नहीं बनवा रही हैं।
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शहरवासियों का कहना है कि विकास कार्यों के लिए जहां जरूरी हो खुदाई कराई जाए लेकिन नियम-निर्देश और सुरक्षा मानकों का पालन भी सुनिश्चित कराया जाए। निर्धारित समय पर हर हाल में कार्य पूरे हो जाएं और उसके तत्काल बाद सड़क बनवा दी जाए।