फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Pitru Paksha 2024 Shraddha of untimely death performed on Chaturdashi and monk on Ekadashi

Pitru Paksha 2024: अकाल मृत्यु वालों का श्राद्ध चतुर्दशी को, संन्यासी का श्राद्ध एकादशी को

Sun, 22 Sep 2024 06:09 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Sun, 22 Sep 2024 06:09 PM IST
सार

गरुण पुराण के अनुसार जिन लोगों को अपने परिजनों की मृत्यु की तिथि ज्ञात नहीं होती, उनके श्राद्ध के लिए पितृ पक्ष में कुछ विशेष तिथियां भी निर्धारित की गई हैं।

विज्ञापन
Pitru Paksha 2024 Shraddha of untimely death performed on Chaturdashi and monk on Ekadashi
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पितृ पक्ष के दौरान पितरों को याद कर तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध, दान, ब्राह्मण भोज, पंचबलि का विधान है। तिथियों के अनुसार पितरों का तर्पण किया जाता है। तर्पण करने से पितर खुश होते हैं और तृप्त होकर आशीर्वाद देते हैं। बहुत से ऐसे लोग भी होते हैं जिनकी मृत्यु की तिथि ज्ञात नहीं होती है। ऐसे में पुराणों के अनुसार उनके लिए भी अलग-अलग तिथियों का निर्धारण किया गया है।

विज्ञापन


गरुण पुराण के अनुसार जिन लोगों को अपने परिजनों की मृत्यु की तिथि ज्ञात नहीं होती, उनके श्राद्ध के लिए पितृ पक्ष में कुछ विशेष तिथियां भी निर्धारित की गई हैं। काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के सदस्य पं. दीपक मालवीय ने बताया कि जिनकी मृत्यु अविवाहित स्थिति में हो जाती है ऐसे लोगों का श्राद्ध अश्विन कृष्णपक्ष की पंचमी तिथि को किया जाता है। 
विज्ञापन


अगर किसी सुहागन महिला का निधन हुआ हो और उसकी तिथि ज्ञात ना हो तो उसका श्राद्ध नवमी तिथि पर किया जाता है। यह तिथि माता और मातृपक्ष से जुड़े लोगों के श्राद्ध के लिए भी सर्वोत्तम होती है। मातृनवमी पर श्राद्ध कर्म करने से कुल की सभी दिवंगत महिलाओं का श्राद्ध हो जाता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

वैष्णव संन्यासी का श्राद्ध एकादशी और द्वादशी तिथि पर करने का विधान है। इस तिथि को उन लोगों का श्राद्ध किया जाता है जिन्होंने गृहस्थ आश्रम से संन्यास लिया हो। छोटे बच्चों का श्राद्ध कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को किया जाता है। आत्महत्या, दुर्घटना, विष या शस्त्र से मरने वालों व अकाल मृत्यु प्राप्त करने वालों के श्राद्ध के लिए चतुर्दशी तिथि नियत की गई है। 

अंत में सबसे अंतिम तिथि सर्वपितृ अमावस्या की होती है। अगर कोई श्रद्धालु पितृपक्ष की तिथियों पर अपने पितरों का श्राद्ध करने से चूक गया हो या फिर उसे पितरों की तिथि याद नहीं हो तो वह सर्वपितृ अमावस्या पर सभी पितरों का श्राद्ध कर सकता है। 

शास्त्रों के अनुसार इस दिन श्राद्ध करने से कुल के सभी पितरों का श्राद्ध हो जाता है। इसके अलावा जिनका मरने के बाद संस्कार नहीं हुआ हो तो उनका भी अमावस्या तिथि को ही श्राद्ध करना चाहिए।

यह भी जानें

  • पंचमी का श्राद्ध - 22 सितंबर - इस दिर अविवाहित व्यक्ति का श्राद्ध करना चाहिए
  • षष्ठी का श्राद्ध - 23 सितंबर - देवी-देवताओं का मिलता है आशीर्वाद
  • सप्तमी का श्राद्ध - 24 सितंबर-यज्ञ के समान पुण्यफल का योग
  • अष्टमी का श्राद्ध - 25 सितंबर -सुख-समृद्धि का योग
  • नवमी का श्राद्ध - 26 सितंबर - सुपत्नी की प्राप्ति
  • दशमी का श्राद्ध - 27 सितंबर -लक्ष्मी की प्राप्ति
  • एकादशी का श्राद्ध - 28 सितंबर-भगवान विष्णु का सानिध्य, वेद-पुराण का ज्ञानार्जन
  • द्वादशी का श्राद्ध - 29 सितंबर-प्रचुन अन्न-धन की प्राप्ति
  • त्रयोदशी का श्राद्ध - 30 सितंबर-दीर्घायु व प्रज्ञा प्राप्त
  • चतुर्दशी का श्राद्ध - 1 अक्तूबर -दीर्घायु, शत्रुओं से रक्षा
  • सर्वपितृ अमावस्या - 2 अक्तूबर- सर्वमनोरथ पूर्ण

मध्याह्नव्यापिनी तिथि में होते हैं श्राद्ध कर्म

प्रातः एवं सायंकाल के समय श्राद्ध निषेध कहा गया है। पितरों का श्राद्ध श्रद्धा भाव से आश्विन कृष्ण पक्ष में किया जाता है। इससे स्वास्थ्य, समृद्धि, आयु, सुख- शांति, वंशवृद्धि एवं उत्तम संतान की प्राप्ति होती है। श्रद्धापूर्वक किए जाने के कारण ही इसका नाम श्राद्ध है। ध्यान रहे कि श्राद्ध के सभी कर्म अपराह्नकाल अर्थात मध्याह्ननव्यापिनी तिथि में किए जाते हैं। उत्तर और दक्षिणी भारतीय लोगों के श्राद्ध की विधि समान और समान दिन ही होता है।

मात्र जल में काला तिल लेकर कर सकते हैं तिलांजलि
श्राद्धकर्ता को तर्पण व पिंडदान करने के लिए सफेद व पीतवर्ण के वस्त्र धारण करने चाहिए। जो व्यक्ति श्राद्ध करने में असमर्थ हो, उन्हें मात्र जल में काला तिल लेकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके अपने पितरों को याद करके तिलांजलि देनी चाहिए। साथ ही अपने दोनों हाथों को ऊपर करके पितरों से कहना चाहिए कि मेरे पास श्राद्ध करने का सामर्थ्य नहीं है, मुझे क्षमा करें। योग्य ब्राह्मण को एक मुट्ठी काला तिल दान कर देना चाहिए ताकि पितृगण प्रसन्न रहें।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed