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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Petition for make new case against suspended ARTO RS Yadav

निलंबित एआरटीओ आरएस यादव के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के लिए याचिका

Tue, 04 Jul 2017 02:47 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी Updated Tue, 04 Jul 2017 02:47 PM IST
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Petition for make new case  against suspended ARTO RS Yadav
निलंबित एआरटीओ आरएस यादव - फोटो : अमर उजाला
विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण जितेंद्र कुमार पांडेय की अदालत में भ्रष्टाचार से अर्जित की गई करोड़ों की काली कमाई के मामले में जेल में निरुद्ध निलंबित एआरटीओ आरएस यादव के खिलाफ सीआरपीसी की धारा 156-3 के तहत याचिका दाखिल की गई है।
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अदालत ने शिवपुर निवासी राकेश न्यायिक की तरफ  से दाखिल याचिका पर एसपी विजिलेंस और कैंट थाने से 11 जुलाई को आख्या तलब की है। 
याचिका में निलंबित एआरटीओ, पत्नी गंगोत्री, पुत्र अपूर्व, पुत्रियां पूनम एवं ऋचा, अपर परिवहन आयुक्त प्रवर्तन विजय सिंह, उपायुक्त देवेंद्र त्रिपाठी, आरटीओ प्रवर्तन वाराणसी राधेश्याम सरोज, चार्टर्ड अकाउंटेंट एसके द्विवेदी, महेंद्र मौर्य के अलावा चार कंपनियों के अलग-अलग शेयर होल्डर अशोक द्विवेदी, नीलम, राजेश समेत 59 को पक्षकार बनाया गया है। 
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याचिका में आरएस पर आरोपों की कड़ी में एक चौंकाने वाला तथ्य भी है। इसमें वर्ष 1998 में नजदीकी की 14 वर्षीय बेटी के जबरन दुष्कर्म से गर्भवती होने पर गला दबाकर हत्या कर पंखे से लटकाने के बाद प्रभाव व प्रलोभन से उसे आत्महत्या का रूप देने का आरोप लगाया गया है। 
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याचिका में 70 करोड़ का होटल वेस्ट इन, मकबूल आलम रोड पर 30 करोड़ के दो बंगले, सोनभद्र में 25 बीघा जमीन, लखनऊ के आशियाना कॉलोनी में 20 करोड़ का बंगला, गोरखपुर में 12 करोङ़ का शॉपिंग माल, चंद्रिकानगर में 20 करोड़ के आवासीय भवन समेत दर्जन भर अन्य स्थानों पर करोड़ों की संपत्ति का जिक्र भी किया गया है। 

साक्ष्य के रुप में कागजात भी दाखिल

Petition for make new case  against suspended ARTO RS Yadav
एआरटीओ आरएस यादव - फोटो : SELF

याचिका में कहा गया है कि लोक सेवक के रूप में आरएस ने जघन्य सामाजिक अपराध किया गया जिससे सरकार को अरबों की क्षति हुई। इस कार्य में अन्य आरोपी उच्चाधिकारी मदद करते रहे ऐसे में आईपीसी की धारा 166, 167, 169, 171, 177, 188, 197, 198, 200, 203, 204, 217, 218 एवं भ्रष्टाचार अधिनियम की धारा 7/13, 8/13 व धारा 3, 4, 5, 6, 24, 27, 53 बेनामी संपत्ति के तहत अभियोग पंजीकृत कर विवेचना किए जाने की याचना कोर्ट से की गई है। याचिका के समर्थन में न्यायिक की तरफ से शपथ पत्र दाखिल किया गया है और साक्ष्य के रुप में कागजात भी दाखिल किए गए हैं। याचिका न्यायिक के अधिवक्ता योगेंद्र नारायण सिंह एवं अमरेंद्र सिंह ने दाखिल की।
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