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काशी की प्रसिद्ध गलियों के घरों के बाहर लटके बोर्ड, यह मकान बिकाऊ नहीं
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Mon, 30 Apr 2018 05:29 PM IST
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काशी विश्वनाथ मंदिर
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काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के लिए मंदिर प्रशासन के हथकंडों से स्थानीय लोग आजिज आ गए हैं। उन्होंने अब घरों के बाहर बकायदा नोटिस लटका दिया है कि यह मकान बिकाऊ नहीं है। कोई भी इस संदर्भ में किसी तरह की बातचीत न करे।
मंदिर परिक्षेत्र के सरस्वती फाटक, नीलकंठ महादेव, लाहौरी टोला, नेपाली खपड़ा आदि में मकानों, मठों और मंदिरों के बाहर यह नोटिस आसानी से देखने को मिल सकते हैं।
दूसरी तरफ बिक चुके मकानों को खाली करने के नोटिस भी प्रशासन की ओर से चस्पा कराए गए हैं। निर्मल संस्कृत महाविद्यालय व निर्मल मठ पर भी मकान नहीं बेचने के नोटिस लटका दिए गए हैं।
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नीलकंठ महादेव मंदिर के महंत परिवार के पं. पद्माकर पांडेय ने बताया कि पुरखों की संपत्ति कैसे बेच दें। पैसा ही सब कुछ नहीं होता। यहां छोड़ दिया तो बाबा का सानिध्य फिर कहां मिलेगा।
उन्होंने बताया कि जब प्रशासन की ओर से मकान बेचने का प्रस्ताव आया था तो मैंने लिखित रूप से इनकार कर दिया। अब तो दबाव भी बनाया जा रहा है। सभी मोहल्लेवासी बहुत परेशान हैं।
कैसे बेच दें, मकान से सटा है नीलकंठ महादेव का मंदिर। घर में ही है जरविश्वेश्वर महादेव का मंदिर और प्राचीन कुआं। ऐसा कहां मिलेगा। कहां मिलेगा काशी पुराधिपति बाबा विश्वनाथ का सानिध्य। हम तो बाबा की ड्योढ़ी नहीं लांघने वाले।
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मंदिर परिक्षेत्र के सरस्वती फाटक, नीलकंठ महादेव, लाहौरी टोला, नेपाली खपड़ा आदि में मकानों, मठों और मंदिरों के बाहर यह नोटिस आसानी से देखने को मिल सकते हैं।
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दूसरी तरफ बिक चुके मकानों को खाली करने के नोटिस भी प्रशासन की ओर से चस्पा कराए गए हैं। निर्मल संस्कृत महाविद्यालय व निर्मल मठ पर भी मकान नहीं बेचने के नोटिस लटका दिए गए हैं।
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नीलकंठ महादेव मंदिर के महंत परिवार के पं. पद्माकर पांडेय ने बताया कि पुरखों की संपत्ति कैसे बेच दें। पैसा ही सब कुछ नहीं होता। यहां छोड़ दिया तो बाबा का सानिध्य फिर कहां मिलेगा।
उन्होंने बताया कि जब प्रशासन की ओर से मकान बेचने का प्रस्ताव आया था तो मैंने लिखित रूप से इनकार कर दिया। अब तो दबाव भी बनाया जा रहा है। सभी मोहल्लेवासी बहुत परेशान हैं।
कैसे बेच दें, मकान से सटा है नीलकंठ महादेव का मंदिर। घर में ही है जरविश्वेश्वर महादेव का मंदिर और प्राचीन कुआं। ऐसा कहां मिलेगा। कहां मिलेगा काशी पुराधिपति बाबा विश्वनाथ का सानिध्य। हम तो बाबा की ड्योढ़ी नहीं लांघने वाले।