यूपी: कालीन नगरी में मीठा जहर पी रहे लोग, हैंडपंपों से निकल रहा पानी पीने लायक नहीं
तीन ओर गंगा से घिरे भदोही जिले के कोनिया के गंगा तटीय गांवों में भूजल दूषित होने के कारण क्षेत्र के लोग पानी के साथ मीठा जहर पी रहे हैं। ऐसा कोई भी गंगा तटीय गांव नहीं है, जिसका भूजल दूषित न हो। एक दशक पहले हुई जांच में इन गांवों के हैंडपंपों से निकलने वाले पानी में आर्सेनिक और आयरन की पुष्टि हो चुकी है, लेकिन प्रशासन और शासन स्तर से ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल मुहैया कराने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया।
कोनिया के छेछुआ, भुर्रा, कलिक मवैया, कलातुलसी आदि कई ऐसे गांव हैं, जिन गांवों के भू-जल में आर्सेनिक की पुष्टि हुई थी, जबकि नारेपार, बारीपुर, बनकट, डीघ, अरई, खेमापुर, दुगुना, इटहरा, कूड़ी कला, कूड़ी खुर्द, बहपूरा, मवैया थान सिंह, भभौरी, धनतुलसी, गजाधरपुर, के स्थापित हैंडपंपों से निकलने वाले पानी में अत्यधिक आयरन है। बारीपुर निवासी राहुल दूबे ने बताया कि कोनिया क्षेत्र में अत्यधिक गहराई की बोरिंग वाले हैंडपंप लगाने की जरूरत है।
शेरपुर निवासी ओम प्रकाश दूबे का कहना है कि क्षेत्र के हैंडपंपों का पानी महज 15 मिनट में ही पीला होकर दुर्गंध देने लगता है। इटहरा के कमला शंकर मिश्रा कहते हैं कि समूह पेयजल का बुरा हाल है। हैंडपंपों से निकलने वाला पानी दूषित है। डीघ के माताचरन तिवारी और खेमापुर के शशिकांत पांडेय का कहना है कि पूरे कोनिया में स्वच्छ पेयजल की गंभीर समस्या है, जिला प्रशासन और शासन को ध्यान देना चाहिए।
दम तोड़ चुकी हैं परियोजनाएं
कोनिया क्षेत्र में स्वच्छ पेयजल एक बड़ी समस्या का रूप ले चुका है। बारीपुर, मठहा, डीघ और इटहरा में स्थापित समूह पेयजल योजनाओं का बुरा हाल है। तीनों गांवों में समूह पेयजल योजनाएं दम तोड़ चुकी हैं। बारीपुर, डीघ और कूड़ी खुर्द ( इटहरा) में स्थापित समूह पेयजल योजनाओं की स्थिति यह है कि सभी बस्तियों में भी जलापूर्ति नहीं हो पाती है। बहपुरा के प्रधान शिवचंद्र शुक्ला और इटहरा के प्रधान डॉ. अजीत सिंह का कहना है कि कोनिया में नई समूह पेयजल योजनाओं की स्थापना होनी चाहिए।