दहकती चिताओं में सभी विकारों का हवन
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वाराणसी। प्रतिबंध के बावजूद श्री काशी विश्वनाथ मंदिर क्षेत्र के रेड जोन में असलहे लेकर घुसने की घटना हो या सुरक्षा मानकों की अनदेखी की शिकायतें। आए दिन रेड जोन के सुरक्षा प्रबंधों पर सवाल खड़े होते हैं। मंदिर क्षेत्र में हर बार पुख्ता सुरक्षा बंदोबस्त के दावे किए जाते हैं लेकिन इन दावों की असलियत सामने आते देर नहीं लगती। दरअसल, रेड और येलो जोन में थोक के भाव बांटे गए पास अब सुरक्षा के मोर्चे पर चुनौती बन गए हैं। पास धारक, सुरक्षाकर्मी सभी मोबाइल लेकर अंदर घुस जाते हैं। वे अपने साथ दूसरों को भी प्रवेश दिला देते हैं। यह सब सुरक्षा अधिकारियों की आंखों के सामने होता है लेकिन कभी कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता।
इसी का नतीजा था कि महाशिवरात्रि पर विशेष सुरक्षा रणनीति के बावजूद बिहार के पूर्व मंत्री के साथ आया गार्ड रिवाल्वर लेकर बेखौफ मंदिर तक पहुंच गया। यह कोई पहला मामला नहीं।
इससे पहले भी सुरक्षा में ऐसी चूक सामने आ चुकी है। आतंकी घटनाओं के लिहाज से बेहद संवेदनशील विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र की सुरक्षा में ऐसी लापरवाही कितनी भारी पड़ सकती है, इसका अंदाजा लगाना कठिन नहीं। मंदिर परिसर के रेड जोन में गेट नंबर एक ढूंढीराज गणेश मंदिर गेट से सरस्वती फाटक, छताद्वार से अंदर का क्षेत्र, ज्ञानवापी परिसर एवं रानी भवानी मंदिर का क्षेत्र है।
स्पष्ट निर्देश है कि रेड जोन में मोबाइल का उपयोग कोई नहीं कर सकता। ऐसा पुलिस के सुरक्षा प्लान में भी है। मंदिर प्रशासन के मुताबिक नियमित दर्शनार्थियों, मंदिर के पुजारियों और कर्मचारियों को मिलाकर करीब सौ पास जारी किए गए हैं जबकि वास्तविक तौर पर पासधारकों की संख्या इससे कहीं अधिक है। सूत्रों की मानें तो कुछ दूकानदारों और स्थानीय लोगों ने फर्जी कंप्यूटराइज्ड पास तैयार करा लिया है। पास दिखाकर वह मोबाइल आदि भी धड़ल्ले से लेकर आते-जाते हैं जबकि मंदिर परिसर में मोबाइल भी प्रतिबंधित है
। यदि कोई श्रद्धालु भूलवश भी यदि एक पेन भी लेकर चला जाए तो सुरक्षाकर्मी उसके लिए मुसीबत खड़ी कर देते हैं लेकिन मंदिर परिसर के अंदर खुद सुरक्षाकर्मी और पास धारक मोबाइल पर खुलेआम बात करते हैं लेकिन यह सब उच्चाधिकारियों को नजर नहीं आता। मंदिर के कुछ सीसीटीवी कैमरों के भी खराब पड़े होने की जानकारी मिली है।