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मां पधारेंगी भक्तों के द्वार, बरसेगी कृपा अपार
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Fri, 30 Sep 2016 01:23 AM IST
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नवरात्र
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दुर्गा शब्दार्थ: दैत्यनाशार्थ वचनो दकार: परिकीर्तित:/ उकारो विघ्ननाश्य वाचको वेद सम्मत:/रेफो रोगघ्न वचनों गश्च पापग्घ वाचक:/भय शत्रुघ्न वचनस्चाकार: परिकीर्तित:। अर्थात देवी पुराण के अनुसार दुर्गा नाम दैत्य, विघ्न, रोग, पाप, भय, शत्रु नाशक है। बृहद सार सिद्धांत में आश्विन पक्ष के नवरात्र के बारे में कहा गया है - ‘आश्विनस्तय कृते पक्षे नानाविधि महोत्सवै। प्रसादयेयु: श्रीदुर्गा चर्तुवर्ग फलार्थिन:।’ आश्विन शुक्ल पक्ष में विशेष महोत्सवों से मां दुर्गा की पूजा धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थों के फल की प्रदाता होती है। शारदीय नवरात्र की आराधना शनिवार से घट स्थापन के साथ शुरू होगी।
शंख, चक्र, गदा, पद्म और अस्त्र, शस्त्र से सुसज्जित होकर मां भक्तों के मंगल और शत्रुओं के संहार के लिए पधारेंगी। शक्ति आराधना के शारदीय नवरात्र को लेकर बाजार चुनरी, नारियल, धूप और मिट्टी के दीयों से सज गए हैं। घरों में साफ-सफाई के साथ ही अन्य तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। देवी मंदिरों को जहां ध्वजा, पताकाओं, रंग-बिरंगी लतरों से सजाने का साम शुरू हो गया है, वहीं घर-घर में कलश स्थापन की तैयारियां चल रही हैं। शहर के पांच पंडालों में नवरात्र के पहले दिन से ही कहीं प्रतिमा तो कहीं कलश स्थापन कर झांकियां सजाई जाएंगी।
कालीबाड़ी, ताराबाड़ी के अलावा शवशिवा काली के मंदिरों में विशेष अनुष्ठान की तैयारी की गई हैं। शीतला घाट पर आदि बुढ़िया माता की गुफा की भी सफाई कर ली गई। इस गुफा में भी मंगल कामना के लिए नौ दिन तक महंत शिव प्रसाद पांडेय मौन व्रत रखकर विशेष अनुष्ठान करेंगे। दुर्गाकुंड में दुर्गा मंदिर को रंग-रोगन करने के साथ ही सजाने का काम शुरू कर दिया गया है। कलश स्थापन प्रात: काल से लेकर संध्या से पूर्व किसी भी समय किया जा सकता है।
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ज्योतिषाचार्य दीपक मालवीय के अनुसार इस बार द्वितीया तिथि की वृद्धि के चलते शारदीय नवरात्र 10 दिन का होगा। इसलिए कि इस बार एक तिथि की वृद्धि हो गई है। दो अक्तूबर की सुबह 5:45 बजे द्वितीया लगेगी और तीन अक्तूबर की सुबह 7:44 बजे तक रहेगी। सूर्योदय के बाद इस तिथि के समाप्त होने की वजह से उस दिन भी द्वितीया का ही मान होगा। तिथियों का मान उदयाकाल से होता है। ज्योतिषाचार्य मालवीय कहना है कि नवरात्र में तिथि का बढ़ना शुभ फलदायक है। तिथि वृद्धि को ज्योतिषी सुख, शांति और समृद्धि का सूचक बता रहे हैं।
नवरात्र की तीन दिवसीय पूजा में सप्तमी तिथि के दिन देवी के आगमन के वाहन और दशमी को गमन का विचार होता है। सप्तमी शनिवार को पड़ रही है। देवी का आगमन घोड़े पर और गमन मुर्गे पर होगा। महावीर पंचांग के संपादक डॉ. रामेश्वर नाथ ओझा के अनुसार देवी का आगमन और प्रस्थान की दोनों ही सवारी शुभ नहीं हैं।
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शंख, चक्र, गदा, पद्म और अस्त्र, शस्त्र से सुसज्जित होकर मां भक्तों के मंगल और शत्रुओं के संहार के लिए पधारेंगी। शक्ति आराधना के शारदीय नवरात्र को लेकर बाजार चुनरी, नारियल, धूप और मिट्टी के दीयों से सज गए हैं। घरों में साफ-सफाई के साथ ही अन्य तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। देवी मंदिरों को जहां ध्वजा, पताकाओं, रंग-बिरंगी लतरों से सजाने का साम शुरू हो गया है, वहीं घर-घर में कलश स्थापन की तैयारियां चल रही हैं। शहर के पांच पंडालों में नवरात्र के पहले दिन से ही कहीं प्रतिमा तो कहीं कलश स्थापन कर झांकियां सजाई जाएंगी।
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कालीबाड़ी, ताराबाड़ी के अलावा शवशिवा काली के मंदिरों में विशेष अनुष्ठान की तैयारी की गई हैं। शीतला घाट पर आदि बुढ़िया माता की गुफा की भी सफाई कर ली गई। इस गुफा में भी मंगल कामना के लिए नौ दिन तक महंत शिव प्रसाद पांडेय मौन व्रत रखकर विशेष अनुष्ठान करेंगे। दुर्गाकुंड में दुर्गा मंदिर को रंग-रोगन करने के साथ ही सजाने का काम शुरू कर दिया गया है। कलश स्थापन प्रात: काल से लेकर संध्या से पूर्व किसी भी समय किया जा सकता है।
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ज्योतिषाचार्य दीपक मालवीय के अनुसार इस बार द्वितीया तिथि की वृद्धि के चलते शारदीय नवरात्र 10 दिन का होगा। इसलिए कि इस बार एक तिथि की वृद्धि हो गई है। दो अक्तूबर की सुबह 5:45 बजे द्वितीया लगेगी और तीन अक्तूबर की सुबह 7:44 बजे तक रहेगी। सूर्योदय के बाद इस तिथि के समाप्त होने की वजह से उस दिन भी द्वितीया का ही मान होगा। तिथियों का मान उदयाकाल से होता है। ज्योतिषाचार्य मालवीय कहना है कि नवरात्र में तिथि का बढ़ना शुभ फलदायक है। तिथि वृद्धि को ज्योतिषी सुख, शांति और समृद्धि का सूचक बता रहे हैं।
नवरात्र की तीन दिवसीय पूजा में सप्तमी तिथि के दिन देवी के आगमन के वाहन और दशमी को गमन का विचार होता है। सप्तमी शनिवार को पड़ रही है। देवी का आगमन घोड़े पर और गमन मुर्गे पर होगा। महावीर पंचांग के संपादक डॉ. रामेश्वर नाथ ओझा के अनुसार देवी का आगमन और प्रस्थान की दोनों ही सवारी शुभ नहीं हैं।