फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   PCS Officer Suicide Case in Ballia News: Mani Manjari rai who made women aware of poems why she did suicide in ballia

EO आत्महत्या: कविताओं से महिलाओं को जागरूक करने वाली मणि मंजरी ने क्यों चुनी मौत

Sun, 12 Jul 2020 05:42 PM IST
गीतार्जुन गौतम अमर उजाला नेटवर्क, बलिया
अमर उजाला नेटवर्क, बलिया Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Sun, 12 Jul 2020 05:42 PM IST
विज्ञापन
PCS Officer Suicide Case in Ballia News: Mani Manjari rai who made women aware of poems why she did suicide in ballia
मणि मंजरी राय (फाइल फोटो)। - फोटो : अमर उजाला।

बलिया जिले के मनियर नगर पंचायत ईओ मणि मंजरी राय की मौत के बाद जांच का नतीजा चाहे जो निकले, उनके फेसबुक पेज पर नजर डालने से उसकी हिम्मत और महिला अधिकारों के प्रति सजगता की झलक साफ मिलती है। उनके फेसबुक पेज पर उसकी ओर से अपलोड की गई दो कविताओं को पढ़ने के बाद यह समझ में नहीं आ रहा कि महिलाओं को अधिकारों के लिए जागरूक करने वाली कविताएं लिखने वाली यह हिम्मती आखिर जिंदगी से निराश क्यों हो गई। जो दूसरों को हर बाधा हर रुकावट से लड़ने की सीख देने वाली कविताएं रच सकती है, आखिर ऐसा क्या हुआ कि उसने अपनी ही जिंदगी खत्म करने का कठोर निर्णय ले लिया।

विज्ञापन

पेज पर नजर डालने से एक चीज तो साफ होती है कि मणि मंजरी सोशल मीडिया से बहुत हद तक नहीं जुड़ी थीं। उन्होंने प्रोफाइल जरूर बनाई थी लेकिन उस पर गाहे-बगाहे ही अपनी उपस्थिति दर्ज कराती थी। मणि मंजरी ने दो मार्च 2017 को अपने फेसबुक पेज पर 'तू पारकर द्वार देहरी' नामक कविता पोस्ट की है और नीचे अपना नाम भी लिखा है।
विज्ञापन



इससे यह तो स्पष्ट हो रहा है कि कविता की रचयिता वहीं है। इस कविता को पढ़ने के बाद किसी भी हद तक निराश हो चुकी महिला को ताकत मिल सकती है, लेकिन अपना जीवन समाप्त करते समय क्या मणि मंजरी अपनी ही कविता को भूल गई थीं? कविता मूल स्वरूप में हम आपके सामने रख रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

तू पार कर द्वार देहरी,
पैर के बंधन खोल आज
फिजा में बिखरी कोई धुन पे
संग हवा के डोल आज 
सतरंगी आसमा के रंगों में
रंग तू भी घोल आज
हटा के परदे होंठो से
तू मन की बातें बोल आज 
है पता मुझे,
लोग तुझे आजादी के
गीत न गाने देंगे ।
बातें तेरे अतीत की कर 
तुझको ताने देंगे ।
चुप तुझे करने की खातिर
लोग लाख बहाने देंगे ।
इन बातों की तू परवाह न कर
न आंधी तूफान से डर
सिर्फ जज्बात नही, इंकलाब तू लिख
संग आँगन के आसमान भी लिख
यू छुप के तू लिखेगी कब तक
अब अपनी पहचान भी लिख
जो दर्द सहे हैं चुप रह कर
उन के बचे निशान भी लिख
तू पार कर द्वार देहरी 
पैर के बंधन खोल आज
फिजा में बिखरी कोई धुन पे
संग हवा के डोल आज 

इसके बाद 14 जुलाई 2018 को उसने फिर अपना फेसबुक पेज ओपन किया है और एक दूसरी कविता जिंदगी से वक्त मांगते हुए पोस्ट की है। इस कविता के नीचे भी अपना नाम लिखा है। कविता कुछ इस प्रकार है...

ए ज़िंदगी 
तू थोड़ा सा वक़्त दे
थोड़ी सी रुक जरा
जरा साँस लेने दे 
जरा जख्मों को भरने दे
जरा आंसू छुपाने दे
अधूरे सपनों को मरने दे
पलकों पे नींद आने दे
जरा फिर से मुस्कुराने दे
ए ज़िंदगी 
तू थोड़ी सी रुक जरा
थोड़ा सा वक़्त दे

11 अक्टूबर 2018 को मणि मंजरी ने इसी पेज पर बलिया में जॉइनिंग का पोस्ट भी डाला है। उस पोस्ट से यह महसूस हो रहा है कि जिले में ज्वाइन करते वक्त वह कितनी खुश थीं, लेकिन उसे क्या पता था कि उसकी पहली पोस्टिंग ही उसकी आखिरी बन जाएगी और उसे इस बेदर्द जमाने से जिंदगी की जंग हारनी पड़ेगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed