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Varanasi: अब शुगर के मरीज जमकर खा सकेंगे चावल, चावल की कई किस्में होंगी शुगर फ्री; सेहत के लिए फायदेमंद

Thu, 30 Nov 2023 06:05 PM IST
किरन रौतेला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: किरन रौतेला Updated Thu, 30 Nov 2023 06:05 PM IST
सार

इरी और दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र (आईआरआरआई-सार्क) के वैज्ञानिक शुगर-फ्री चावल की किस्मों को विकसित करने में लगे हैं। इसी कड़ी में उन्होंने भारत के सांभा मंसूरी चावल पर तकनीक का प्रयोग किया। इसमें सबसे कम जीआई इंडेक्स मिले हैं।

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patients will be able to eat rice to their heart's content, many varieties of rice will be sugar free; benefic
चावल को लॉन्च करते फिलिपींस के राष्ट्रपति और इर्री के डीजी डॉ अजय कोहली - फोटो : संवाद

विस्तार

शुगर के मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। उनको जल्द ही पूरी तरह से शुगर फ्री चावल मिलने वाला है, जो उनके सेहत को भी फायदा मिलेगा। अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (आईआरआरआई, इरी) के वैज्ञानिकों ने अल्ट्रा-लो जीआई इंडेक्स (ग्लाइसेमिक इंडेक्स) वाले चावल की किस्में तैयार की हैं। अक्तूबर में मनीला में आयोजित अंतरराष्ट्रीय चावल कांग्रेस में 150 से अधिक देशों के वैज्ञानिक, प्रोफेसर व शोध छात्रों की मौजूदगी में इन किस्मों को फिलीपींस के राष्ट्रपति ने लांच किया था।

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इरी और दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र (आईआरआरआई-सार्क) के वैज्ञानिक शुगर-फ्री चावल की किस्मों को विकसित करने में लगे हैं। इसी कड़ी में उन्होंने भारत के सांभा मंसूरी चावल पर तकनीक का प्रयोग किया। इसमें सबसे कम जीआई इंडेक्स मिले हैं। आईआरआरआई-सार्क के निदेशक डॉ. सुधांशु सिंह ने बताया कि मनीला में इरी के मुख्यालय में पिछले माह आयोजित कांग्रेस में सांभा मंसूरी पर किए गए शोध को फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डीनांड मार्कोस जूनियर ने लांच किया था।

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इरी के अंतरिम महानिदेशक डॉ. अजय कोहली ने बताया कि अल्ट्रा-लो जीआई इंडेक्स की एक उन्नत किस्म जो सांभा मंसूरी और आईआर 36 एई के पार-प्रजनन के ज़रिये विकसित की गई हैं। इरी द्वारा अब तक किए गए शोध में लो जीआई इंडेक्स वाला चावल सांभा मसूरी पाया गया है। यह विश्व की पहली किस्म है, जिसमें जीआई इंडेक्स अन्य प्रजातियों की अपेक्षा सबसे कम (44) है। इस चावल को मधुमेह के मरीजों के लिए काफी लाभ होगा। इसके सेवन से शुगर की मात्रा भी नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि इन किस्मों को देश के अन्य शोध संस्थानों व कृषि विश्वविद्यालयों में भी शोध के लिए भेजे जाएंगे। उम्मीद है कि दो साल के अंदर इस अल्ट्रा-लो जीआई इंडेक्स चावल की किस्म को भारत की बीज प्रणाली में शामिल कर किसानों को उपलब्ध कराए जाएंगे।

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केंद्र सरकार को सौंपने की तैयारी

निदेशक सुधांशु सिंह ने बताया कि अल्ट्रा-लो जीआई इंडेक्स की किस्मों को केंद्र सरकार को सौंपा जाएगा। यहां भी राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री इसे लांच कर सकते हैं। ताकि देश में इस किस्म को प्रमोशन किया जा सके।

क्या है जीआई इंडेक्स

ग्लाइसेमिक इंडेक्स (जीआई) एक सूचक होता है, जो यह प्रदर्शित करता है कि कौन से कार्बोहाइड्रेट खाद्य-पदार्थ कितनी देरी से या कितनी जल्दी से ग्लूकोज़ में विघटित होते हैं। इससे आपको यह चुनने में सहायता मिलती है कि अपने डायबटीज़ और वजन का नियंत्रण करने के लिए कार्बोहाइड्रेट खाद्य-पदार्थ खाने की जरूरत पड़ती है।

ये भी हैं शुगर फ्री चावल

धान की शुगर फ्री किस्मों इरी-147, इरी-162 व इरी-125 किस्म के चावल हैं। इनकी उत्पादन क्षमता 4.2 से 5.5 टन प्रति हेक्टेयर है। इनका जीआई इंडेक्स क्रमशः 55, 57 एवं 51 आंकी गई है। अधिकतर चावल के किस्मों का ग्लाइसेमिक इंडेक्स 70 से 92 के बीच होते हैं, जो मधुमेह ग्रस्त लोगों के लिए नुकसान पहुंचाते हैं। अधिक जीआई वाले खाद्य पदार्थ रक्त में शुगर के स्तर में तेजी से वृद्धि करते हैं।

भारत में 7.7 करोड़ लोग मधुमेह से पीड़ित

 

इंटरनेशनल डायबिटिज फेडरेशन की 2021 की रिपोर्ट के मुताबिक विश्व में 537 मीलियन मधुमेह के रोगी हैं। जबकि भारत में करीब 7.7 करोड़ लोग मधुमेह यानी डायबिटीज से पीड़ित हैं।

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