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Varanasi News: अस्पतालों में हर महीने पहुंच रहे कोलोरेक्टल कैंसर से पीड़ित
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महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर संस्थान और होमी भाभा कैंसर अस्पताल लहरतारा में बड़ी आंत में कैंसर (कोलोरेक्टल कैंसर) के पीड़ितों की संख्या बढ़ी है। पिछले कुछ महीनों से औसतन 200 मरीज हर महीने इलाज कराने पहुंच रहे हैं। पहले यह संख्या कम थी।
मार्च महीने को काेलोरेक्टल कैंसर जागरूकता माह के रूप में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य इस बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करने के साथ ही इलाज के बारे में जानकारी देना होता है। सर्जरी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. स्वप्निल पटेल ने बताया कि एक साल में 2500 कोलोरेक्टल कैंसर के मरीज पहुंच रहे हैं। ज्यादातर मामलों में यह देखने को मिल रहा है कि इलाज के लिए मरीज देरी से पहुंच रहे हैं, जिससे बीमारी बढ़ती जा रही है। समय रहते इन मरीजों का इलाज शुरू होने से कैंसर के सही होने की संभावना अधिक रहती है। डॉ. पटेल ने बताया कि अस्पताल में मरीजों का इलाज कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी एवं सर्जरी के माध्यम से होता है। इसके अलावा लैप्रोस्कोपिक विधि से भी सर्जरी की जाती है। दो साल में ऐसे 300 मरीजों की सर्जरी भी हो चुकी है।
30 साल से अधिक उम्र वालों में यह बीमारी
डॉ. स्वप्निल पटेल ने बताया कि पश्चिमी देशों में यह कैंसर सामान्यत: 50 की उम्र में होता है। भारत में इस बीमारी के मरीज अब 30 से 40 की उम्र में भी मिल रहे हैं। कैंसर अस्पताल में भी इसी उम्र वाले मरीज आ रहे हैं। बार-बार कब्ज की समस्या, पेट में दर्द, मल के रास्ते खून आना जैसे लक्षण दिखे तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श ले लेना चाहिए।
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मार्च महीने को काेलोरेक्टल कैंसर जागरूकता माह के रूप में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य इस बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करने के साथ ही इलाज के बारे में जानकारी देना होता है। सर्जरी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. स्वप्निल पटेल ने बताया कि एक साल में 2500 कोलोरेक्टल कैंसर के मरीज पहुंच रहे हैं। ज्यादातर मामलों में यह देखने को मिल रहा है कि इलाज के लिए मरीज देरी से पहुंच रहे हैं, जिससे बीमारी बढ़ती जा रही है। समय रहते इन मरीजों का इलाज शुरू होने से कैंसर के सही होने की संभावना अधिक रहती है। डॉ. पटेल ने बताया कि अस्पताल में मरीजों का इलाज कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी एवं सर्जरी के माध्यम से होता है। इसके अलावा लैप्रोस्कोपिक विधि से भी सर्जरी की जाती है। दो साल में ऐसे 300 मरीजों की सर्जरी भी हो चुकी है।
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30 साल से अधिक उम्र वालों में यह बीमारी
डॉ. स्वप्निल पटेल ने बताया कि पश्चिमी देशों में यह कैंसर सामान्यत: 50 की उम्र में होता है। भारत में इस बीमारी के मरीज अब 30 से 40 की उम्र में भी मिल रहे हैं। कैंसर अस्पताल में भी इसी उम्र वाले मरीज आ रहे हैं। बार-बार कब्ज की समस्या, पेट में दर्द, मल के रास्ते खून आना जैसे लक्षण दिखे तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श ले लेना चाहिए।
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