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पटाखों के धुएं और शोर से नहीं, दीये जलाकर रोशन करें दिवाली
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वाराणसी। तन और मन को स्वस्थ को रखने के लिए हमें धुएं और तेज धमाके वाले पटाखों से दूरी बनानी होगी। यह अपील जिले के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों ने अमर उजाला की ‘एक युद्ध, पटाखों के विरुद्ध’ मुहिम से जुड़ कर की है। जिले के प्रतिभावान खिलाड़ियों का कहना है कि पर्यावरण को ध्वनि और वायु प्रदूषण से मुक्त रखना भी हमारी ही जिम्मेदारी है। ऐसे में इस कोराना काल की दिवाली में आतिशबाजी से परहेज कर हम सभी मिट्टी के दीये जलाकर एक-दूसरे के साथ त्योहार की खुशियां साझा करें।
पर्यावरण को साफ सुथरा और प्रदूषण मुक्त रखना हम सबकी जिम्मेदारी है। इस दिवाली में अधिक से अधिक दीये जलाएं और पटाखों से दूरी बनाएं। दिवाली धुएं और धमाके से मुक्त हो, यही हम सबका प्रयास हो। -विशेष भृगुवंशी, अर्जुन अवार्डी
पटाखे न जलाने की शुरुआत मैंने अपने घर से की है। इस दिवाली में सभी से अपील है कि अच्छा खाना खाएं, मिट्टी के दीये जलाएं और रंगोली बनाएं। पटाखे आदमी के साथ ही सबके लिए नुकसानदायक हैं। - छोटेलाल यादव, अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज
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कोरोना काल में अपनी सुरक्षा अपने हाथ में है। ऐसे में इस दिवाली पटाखे जलाने के बजाय हमें ज्यादा से ज्यादा दीये जलाने चाहिए, ताकि हम अपने पर्यावरण का ध्वनि और वायु प्रदूषण कम कर सकें। - पूजा यादव, अंतरराष्ट्रीय पहलवान
पटाखों के खिलाफ अभियान चलाकर प्रशासन कार्रवाई करे। प्रत्येक घर के बड़े-बुजुर्ग भी ध्वनि और वायु प्रदूषण के कारक पटाखों से परहेज कर बच्चों को भी इसके नुकसान के बारे में समझाएं। - अनीता पटेल, नेशनल फुटबालर
आतिशबाजी बेहद ही जोखिम भरा काम है। यदि कोई हादसा हो जाए तो जीवन बर्बाद हो सकता है। हम सबको यह समझने की जरूरत है कि दिवाली पर पटाखे नहीं बल्कि दीये जलाकर खुशियां मनाएं। - यशोवर्धन सिंह, क्रिकेटर
पटाखों का जहरीला धुआं पर्यावरण में कई दिन तक रहता है। इसके चलते सांस की समस्या से जूझ रहे लोगों को और पशु-पक्षियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कृपया, दीये जलाकर दिवाली मनाएं। - ललित उपाध्याय, अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी
आतिशबाजी के बाद मैदान में अभ्यास के दौरान सांस लेने में हफ्तों तक परेशानी होती हैं। सरकार को तेज ध्वनि वाले पटाखों पर बैन लगाना चाहिए। हम सबको दीये जलाकर दिवाली मनानी चाहिए। - सत्यवर्धन सिंह, ताइक्वांडो खिलाड़ी
कोराना काल में वैसे ही लोगों का स्वास्थ्य ठीक नहीं है। पटाखे जलाना सांस की बीमारी से परेशान लोगों के लिए जानलेवा साबित होगा। सबसे अपील है कि पटाखों से तौबा कर दीये जलाकर दिवाली मनाएं। - श्वेता पटेल, कबड्डी खिलाड़ी
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पर्यावरण को साफ सुथरा और प्रदूषण मुक्त रखना हम सबकी जिम्मेदारी है। इस दिवाली में अधिक से अधिक दीये जलाएं और पटाखों से दूरी बनाएं। दिवाली धुएं और धमाके से मुक्त हो, यही हम सबका प्रयास हो। -विशेष भृगुवंशी, अर्जुन अवार्डी
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पटाखे न जलाने की शुरुआत मैंने अपने घर से की है। इस दिवाली में सभी से अपील है कि अच्छा खाना खाएं, मिट्टी के दीये जलाएं और रंगोली बनाएं। पटाखे आदमी के साथ ही सबके लिए नुकसानदायक हैं। - छोटेलाल यादव, अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज
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कोरोना काल में अपनी सुरक्षा अपने हाथ में है। ऐसे में इस दिवाली पटाखे जलाने के बजाय हमें ज्यादा से ज्यादा दीये जलाने चाहिए, ताकि हम अपने पर्यावरण का ध्वनि और वायु प्रदूषण कम कर सकें। - पूजा यादव, अंतरराष्ट्रीय पहलवान
पटाखों के खिलाफ अभियान चलाकर प्रशासन कार्रवाई करे। प्रत्येक घर के बड़े-बुजुर्ग भी ध्वनि और वायु प्रदूषण के कारक पटाखों से परहेज कर बच्चों को भी इसके नुकसान के बारे में समझाएं। - अनीता पटेल, नेशनल फुटबालर
आतिशबाजी बेहद ही जोखिम भरा काम है। यदि कोई हादसा हो जाए तो जीवन बर्बाद हो सकता है। हम सबको यह समझने की जरूरत है कि दिवाली पर पटाखे नहीं बल्कि दीये जलाकर खुशियां मनाएं। - यशोवर्धन सिंह, क्रिकेटर
पटाखों का जहरीला धुआं पर्यावरण में कई दिन तक रहता है। इसके चलते सांस की समस्या से जूझ रहे लोगों को और पशु-पक्षियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कृपया, दीये जलाकर दिवाली मनाएं। - ललित उपाध्याय, अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी
आतिशबाजी के बाद मैदान में अभ्यास के दौरान सांस लेने में हफ्तों तक परेशानी होती हैं। सरकार को तेज ध्वनि वाले पटाखों पर बैन लगाना चाहिए। हम सबको दीये जलाकर दिवाली मनानी चाहिए। - सत्यवर्धन सिंह, ताइक्वांडो खिलाड़ी
कोराना काल में वैसे ही लोगों का स्वास्थ्य ठीक नहीं है। पटाखे जलाना सांस की बीमारी से परेशान लोगों के लिए जानलेवा साबित होगा। सबसे अपील है कि पटाखों से तौबा कर दीये जलाकर दिवाली मनाएं। - श्वेता पटेल, कबड्डी खिलाड़ी