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स्पेशल ट्रेन से अचार रोटी खाकर 1600 यात्रियों ने तय किया 1300 किमी का सफर, किराया भी लिया गया मनमाना पर घर लौटने की खुशी
Fri, 15 May 2020 06:58 PM IST
स्वाधीन तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मिर्जापुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मिर्जापुर
Published by: स्वाधीन तिवारी
Updated Fri, 15 May 2020 06:58 PM IST
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मिर्जापुर रेलवे स्टेशन पर ट्रेन के आते ही श्रमिकों का तालियों से स्वागत करते जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी सहित रेलवे विभाग के अधिकारी ।
- फोटो : अमर उजाला।
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रेलवे स्टेशन मिर्जापुर पर शुक्रवार की सुबह पहली श्रमिक एक्सप्रेस ट्रेन से उतरे श्रमिकों में घर जाने की खुशी तो थी, पर इस बात का मलाल भी था कि ट्रेन से आने पर उनसे मनमाना किराया लिया गया और खाने के नाम पर अचार और रोटी दी गई। कुछ को तो वो भी नहीं मिला। जो कुछ साथ में था, वह खाकर किसी तरह सफर तय किया। मिर्जापुर स्टेशन पर स्वागत और व्यवस्था से सभी यात्री खुश नजर आए।
सूरत में काम करने वाले प्रवासी श्रमिक 1300 किमी की यात्रा 23 घंटे पूरा करने के बाद शुक्रवार की सुबह मिर्जापुर स्टेशन पर पहुंचे। रेलवे स्टेशन मिर्जापुर पर ट्रेन के रूकने के बाद किए गए स्वागत से सभी के चेहरे पर घर जाने की खुशी दिखी, पर सफर के दौरान ट्रेन में मिले भोजन और किराए को लेकर सभी में आक्रोश और निराशा भी देखने को मिला। 23 घंटे का सफर करने वाले अधिकांश मजदूर अपने परिवार के साथ थे।
जिसमें दो वर्ष से लेकर 10 वर्षे के बच्चे और 70 साल की वृद्धा भी थी। स्टेशन पर उतरने के बाद टिकट का किराया और ट्रेन में मिले भोजन को लेकर सभी श्रमिको का दर्द छलका। जौनपुर निवासी विरेंद्र कुमार यादव ने बताया कि जो घर से खाना लाए थे वही खाए रेल में तो बस रोटी और अचार मिला था। बताया कि पुलिस के द्वारा कैंप लगाकर फॉर्म भरा गया था और उनसे 800 रुपये टिकट का किराया लिया गया।
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जौनपुर के केराकत निवासी छोटेलाल ने बताया कि सिर्फ एक बार रोटी और एक फांकी अचार मिला था। बताया कि छह सौ का टिकट 800 रुपये में दिया। जौनपुर के केराकत निवासी उज्ज्वल सिंह ने कहा कि टिकट का तो 600 ही लिया, पर ट्रेन में खाने को कुछ नहीं मिला। जो कुछ साथ लिए थे, वही खाकर किसी तरह सफर तय किया। जौनपुर के आदमपुर निवासी अशोक कुमार ने बताया कि किराया 800 लिया गया, खाने के नाम पर ट्रेन में बस रोटी व अचार ही मिला।
सुबह छह बजे आने वाली ट्रेन अपने निर्धारित समय से चार घंटे देरी से मिर्जापुर स्टेशन पर सुबह 10 बजे पहुंची। जौनपुर निवासी राजेश पटेल ने बताया कि पूरे सफर में सिर्फ चार रोटी, अचार और पानी का बोतल मिला। टिकट के लिए पैसा जमा किए थे मोहल्ले के कुछ लोगों को पर टिकट नहीं मिला। आज-कल लगा था। टिकट नहीं मिला तो बिचौलिए को एक हजार दिए तो टिकट मिला। जौनपुर मुगरा बादशाहपुर निवासी ओम प्रकाश ने बताया कि खाने को कुछ नहीं मिला। उपवास करके आया हूं। टिकट का भी आठ सौ लिया गया। जौनुपर के बदलापुर निवासी राधेश्याम मौर्या ने बताया कि सिर्फ एक बार पराठा मिला था।
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सूरत में काम करने वाले प्रवासी श्रमिक 1300 किमी की यात्रा 23 घंटे पूरा करने के बाद शुक्रवार की सुबह मिर्जापुर स्टेशन पर पहुंचे। रेलवे स्टेशन मिर्जापुर पर ट्रेन के रूकने के बाद किए गए स्वागत से सभी के चेहरे पर घर जाने की खुशी दिखी, पर सफर के दौरान ट्रेन में मिले भोजन और किराए को लेकर सभी में आक्रोश और निराशा भी देखने को मिला। 23 घंटे का सफर करने वाले अधिकांश मजदूर अपने परिवार के साथ थे।
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जिसमें दो वर्ष से लेकर 10 वर्षे के बच्चे और 70 साल की वृद्धा भी थी। स्टेशन पर उतरने के बाद टिकट का किराया और ट्रेन में मिले भोजन को लेकर सभी श्रमिको का दर्द छलका। जौनपुर निवासी विरेंद्र कुमार यादव ने बताया कि जो घर से खाना लाए थे वही खाए रेल में तो बस रोटी और अचार मिला था। बताया कि पुलिस के द्वारा कैंप लगाकर फॉर्म भरा गया था और उनसे 800 रुपये टिकट का किराया लिया गया।
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जौनपुर के केराकत निवासी छोटेलाल ने बताया कि सिर्फ एक बार रोटी और एक फांकी अचार मिला था। बताया कि छह सौ का टिकट 800 रुपये में दिया। जौनपुर के केराकत निवासी उज्ज्वल सिंह ने कहा कि टिकट का तो 600 ही लिया, पर ट्रेन में खाने को कुछ नहीं मिला। जो कुछ साथ लिए थे, वही खाकर किसी तरह सफर तय किया। जौनपुर के आदमपुर निवासी अशोक कुमार ने बताया कि किराया 800 लिया गया, खाने के नाम पर ट्रेन में बस रोटी व अचार ही मिला।
सुबह छह बजे आने वाली ट्रेन अपने निर्धारित समय से चार घंटे देरी से मिर्जापुर स्टेशन पर सुबह 10 बजे पहुंची। जौनपुर निवासी राजेश पटेल ने बताया कि पूरे सफर में सिर्फ चार रोटी, अचार और पानी का बोतल मिला। टिकट के लिए पैसा जमा किए थे मोहल्ले के कुछ लोगों को पर टिकट नहीं मिला। आज-कल लगा था। टिकट नहीं मिला तो बिचौलिए को एक हजार दिए तो टिकट मिला। जौनपुर मुगरा बादशाहपुर निवासी ओम प्रकाश ने बताया कि खाने को कुछ नहीं मिला। उपवास करके आया हूं। टिकट का भी आठ सौ लिया गया। जौनुपर के बदलापुर निवासी राधेश्याम मौर्या ने बताया कि सिर्फ एक बार पराठा मिला था।
जांच के लिए लगी थी छह टेबल, दो पर राशन
ट्रेन से पहुंचे लोग।
- फोटो : अमर उजाला।
मिर्जापुर रेलवे स्टेशन पर आई श्रमिक एक्सप्रेस से उतरने वाले यात्रियों की जांच के लिए अनारक्षित टिकट परिसर में छह टेबल बनाया गया था। प्लेटफार्म एक के दोनों गेट के किनारे तीन-तीन टेबल लगया गया था। एसीएमओ डा. सुबोध कुमार सिन्हा के नेतृत्व में डा. विवेक खरे, डा. बृजेश कुमार, डा. राजेश, डा. धर्मदेव, डा. अनिल गुप्ता, सुजीत, राम प्रवेश आदि को लगाया गया था। इन टेबलों पर थर्मल स्क्रीनिंग से जांच के बाद यात्री आगे दोनों ओर लगे टेबल पर रखे फूड पैकेट और पानी की बोतल को लेकर आगे बढ़ रहे थे।
मै एसपी धर्मवीर सिंह बोल रहा हूं
मिर्जापुर। हैलो मैं एसपी धर्मवीर सिंह बोल रहा हूं। मां विंध्यवासिनी की नगर मिर्जापुर रेलवे स्टेशन पर आने वाले कर्मयोगियों का स्वागत है। सभी लोग लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करे हुए लाइन में लगे। जो भी लोग स्टेशन परिसर पर है वो मास्क और ग्लब्स आदि लगा कर रखे। यात्रियों का ताली बजाकर स्वागत करें। पुलिस अधीक्षक ने एनांसमेंट की भूमिका का काफी देर तक निर्वहन कर पुलिसकर्मियों का उत्साहवर्धन और लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग का पाठ पढ़ाते रहे।
266 पुलिसकमियों की लगी थी ड्यूटी
प्रवासी श्रमिकों के विशेष ट्रेन से आगमन के मद्देनजर 266 पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाव्ई गई थी। इसमें दो अपर पुलिस अधीक्षक, चार क्षेत्राधिकारी, एक महिला थानाध्यक्ष समेत थानाध्यक्ष, एक महिला उप निरीक्षक समेत 19 उप निरीक्षक, चार महिला समेत 134 सिपाहियों की तैनाती की गई थी। 10 सिपाहियों को 50 बसों में तैनात किया गया था। जिससे श्रमिको को उनके घर रवाना किया गया। स्टेशन पर फायर बिग्रेड का भी इंतजाम किया गया था। 10 आरक्षी और क्यूआरटी को रिजर्व में रखा गया था।
ट्रेन से उतरने वाला पहला यात्रा रहा नितेश
रेलवे स्टेशन पर ट्रेन के आने के बाद सबसे पहले जौनपुर के यात्रियों को बाहर निकलने के लिए एनाउंसमेंट किया गया। इसमें जौनपुर हिरांव निवासी नितेश पाठक पहले यात्री थी। नितेश सूरत में पेंटिंग का काम करता है। स्टेशन पर उतरने के बाद बस में बैठने पर नितेश ने बताया कि मिर्जापुर स्टेशन पर उसका स्वागत किया गया। व्यवस्था अच्छी रही। ट्रेन में जरुर परेशानी का सामना करना पड़ा।
मै एसपी धर्मवीर सिंह बोल रहा हूं
मिर्जापुर। हैलो मैं एसपी धर्मवीर सिंह बोल रहा हूं। मां विंध्यवासिनी की नगर मिर्जापुर रेलवे स्टेशन पर आने वाले कर्मयोगियों का स्वागत है। सभी लोग लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करे हुए लाइन में लगे। जो भी लोग स्टेशन परिसर पर है वो मास्क और ग्लब्स आदि लगा कर रखे। यात्रियों का ताली बजाकर स्वागत करें। पुलिस अधीक्षक ने एनांसमेंट की भूमिका का काफी देर तक निर्वहन कर पुलिसकर्मियों का उत्साहवर्धन और लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग का पाठ पढ़ाते रहे।
266 पुलिसकमियों की लगी थी ड्यूटी
प्रवासी श्रमिकों के विशेष ट्रेन से आगमन के मद्देनजर 266 पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाव्ई गई थी। इसमें दो अपर पुलिस अधीक्षक, चार क्षेत्राधिकारी, एक महिला थानाध्यक्ष समेत थानाध्यक्ष, एक महिला उप निरीक्षक समेत 19 उप निरीक्षक, चार महिला समेत 134 सिपाहियों की तैनाती की गई थी। 10 सिपाहियों को 50 बसों में तैनात किया गया था। जिससे श्रमिको को उनके घर रवाना किया गया। स्टेशन पर फायर बिग्रेड का भी इंतजाम किया गया था। 10 आरक्षी और क्यूआरटी को रिजर्व में रखा गया था।
ट्रेन से उतरने वाला पहला यात्रा रहा नितेश
रेलवे स्टेशन पर ट्रेन के आने के बाद सबसे पहले जौनपुर के यात्रियों को बाहर निकलने के लिए एनाउंसमेंट किया गया। इसमें जौनपुर हिरांव निवासी नितेश पाठक पहले यात्री थी। नितेश सूरत में पेंटिंग का काम करता है। स्टेशन पर उतरने के बाद बस में बैठने पर नितेश ने बताया कि मिर्जापुर स्टेशन पर उसका स्वागत किया गया। व्यवस्था अच्छी रही। ट्रेन में जरुर परेशानी का सामना करना पड़ा।
पीपीई किट न मिलने से पुलिसकर्मियों में रही निराशा
स्टेशन पर पहुंचे लोग।
- फोटो : अमर उजाला।
मिर्जापुर रेलवे स्टेशन मिर्जापुर पर श्रमिकों को ट्रेन से उतरने के बाद बस से उनके घर रवाना गया किया। बस में एक सिपाही की ड्यूटी लगाई गई थी। बस में सफर करने वाले पुलिसकर्मियों को पीपीई किट न दिए जाने पर उनके अंदर निराशा रही। ट्रेन से उतरने के बाद जब श्रमिक बस में बैठ रहे थे तो उनका नाम नोट करने के लिए राजस्वकर्मियों को लगाया गया था। राजस्व कर्मियों को पीपीई किट प्रदान किया गया था।
इसमें वे ऊपर से लेकर नीचे तक पूरी तरह से पैक थे, पर बस में प्रवासी श्रमिकों के साथ सफर करने वाले पुलिसकर्मियों को सुविधा प्रदान नहीं किया गया था। वे अपने मास्क आदि की व्यस्था करके बस में सवार होकर गए। इस बात को लेकर पुलिसकर्मियों में चर्चा भी रही। श्रमिकों को स्टेशन पर ट्रेन से उतार कर बस में बैठाने और घर तक छोड़ने पर पुलिस विभाग ही प्रवासियों के सबसे करीब रहा, पर उनको बेहतर सुविधा नहीं मिली।
पानी के लिए परेशान रहे पुलिसकर्मी
मिर्जापुर। स्टेशन पर श्रमिको को बस में बैठाने के लिए सबसे अधिक मशक्कत पुलिसकर्मियों को करनी पड़ी। धूप में काम करते हुए सभी बेहाल हो रहे थे। धूप के चलते प्यास लग रही थी। पानी के लिए पुलिसकर्मियों को परेशान होना पड़ा। स्टेशन के सामने बस में श्रमिकों को बैठा रहे विंध्याचल कोतवाल वेद प्रकाश राय ने राजस्व कर्मी से रखा पानी का बोतल मांगा तो उसने मना कर दिया। वहां रखा पानी बोतल समिति है। दूसरी ओर के स्टाल से पानी का बोतल ले। थोड़ी देर बाद महिला थानाध्यक्ष सीमा सिंह एएसपी नक्सल के लिए पानी का बोतल लेने गई तो उनको भी वही जवाब मिला। किसी तरह एक पानी का एक बोतल लिया। कर्मयोद्धाओं को ही पानी के लिए परेशान पड़ा।
धूप से सभी हो गए तर-बतर
मिर्जापुर। सुबह आने वाले ट्रेन तय समय से चार घंटे लेट से आई। इसके चलते श्रमिको को बस में बैठाते समय धूप हो गई। धूप के चलते ड्यूटी में लगे कर्मचारी पसीने से तर बतर हो गए। स्टेशन के प्लेटफार्म पर तो कुछ हद तक राहत रही, पर बाहर परिसर में ड्यूटी में लगे कर्मचारी धूप के चलते पसीने से तर बतर हो गए थे। एक तो पुलिसकर्मी सुबह से ही स्टेशन पर पहुंच गए थे। दोपहर तक बिना खाए ड्यूटी करते सबकी हालत पतली हो गई थी।
इसमें वे ऊपर से लेकर नीचे तक पूरी तरह से पैक थे, पर बस में प्रवासी श्रमिकों के साथ सफर करने वाले पुलिसकर्मियों को सुविधा प्रदान नहीं किया गया था। वे अपने मास्क आदि की व्यस्था करके बस में सवार होकर गए। इस बात को लेकर पुलिसकर्मियों में चर्चा भी रही। श्रमिकों को स्टेशन पर ट्रेन से उतार कर बस में बैठाने और घर तक छोड़ने पर पुलिस विभाग ही प्रवासियों के सबसे करीब रहा, पर उनको बेहतर सुविधा नहीं मिली।
पानी के लिए परेशान रहे पुलिसकर्मी
मिर्जापुर। स्टेशन पर श्रमिको को बस में बैठाने के लिए सबसे अधिक मशक्कत पुलिसकर्मियों को करनी पड़ी। धूप में काम करते हुए सभी बेहाल हो रहे थे। धूप के चलते प्यास लग रही थी। पानी के लिए पुलिसकर्मियों को परेशान होना पड़ा। स्टेशन के सामने बस में श्रमिकों को बैठा रहे विंध्याचल कोतवाल वेद प्रकाश राय ने राजस्व कर्मी से रखा पानी का बोतल मांगा तो उसने मना कर दिया। वहां रखा पानी बोतल समिति है। दूसरी ओर के स्टाल से पानी का बोतल ले। थोड़ी देर बाद महिला थानाध्यक्ष सीमा सिंह एएसपी नक्सल के लिए पानी का बोतल लेने गई तो उनको भी वही जवाब मिला। किसी तरह एक पानी का एक बोतल लिया। कर्मयोद्धाओं को ही पानी के लिए परेशान पड़ा।
धूप से सभी हो गए तर-बतर
मिर्जापुर। सुबह आने वाले ट्रेन तय समय से चार घंटे लेट से आई। इसके चलते श्रमिको को बस में बैठाते समय धूप हो गई। धूप के चलते ड्यूटी में लगे कर्मचारी पसीने से तर बतर हो गए। स्टेशन के प्लेटफार्म पर तो कुछ हद तक राहत रही, पर बाहर परिसर में ड्यूटी में लगे कर्मचारी धूप के चलते पसीने से तर बतर हो गए थे। एक तो पुलिसकर्मी सुबह से ही स्टेशन पर पहुंच गए थे। दोपहर तक बिना खाए ड्यूटी करते सबकी हालत पतली हो गई थी।